130 साल पुराने किर्लोस्कर परिवार में विरासत को लेकर जंग, संजय किर्लोस्कर ने भाइयों पर लगाया गुमराह करने का आरोप

किर्लोस्कर परिवार में लंबे समय से संपत्ति को लेकर विवाद चल रहा है। इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है। अब संजय किर्लोस्कर ने अतुल और राहुल किर्लोस्कर पर 130 साल पुरानी विरासत को छीनने की कोशिश करने का आरोप लगाया है।

Kirloskar Brothers Limited, Kirloskar Plant
किर्लोस्कर ब्रदर्स लिमिटेड का शीरवाल प्लांट। फोटो- किर्लोस्कर पंपस वेबसाइट

इंजन और इंजन ऑयल समेत कई प्रकार के कारोबार करने वाले देश के सबसे पुराने कारोबारी समूह में विरासत को लेकर भाइयों में जंग शुरू हो गई है। किर्लोस्कर ब्रदर्स लिमिटेड (केबीएल) से जुड़े संजय किर्लोस्कर ने अपने भाइयो अतुल और राहुल किर्लोस्कर पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

संजय किर्लोस्कर ने सेबी को पत्र भेजकर आरोप लगाया है कि अतुल और राहुल किर्लोस्कर के नेतृत्व वाली चार कंपनियां केबीएल की 130 साल पुरानी विरासत को छीन रही हैं और निवेशकों को गुमराह कर रही हैं। हालांकि, अतुल और राहुल किर्लोस्कर के नेतृत्व वाली कंपनियों ने संजय किर्लोस्कर के आरोपों का खंडन किया है।

केबीएल की विरासत को छीनने का प्रयास: संजय ने सेबी को लिखे पत्र में कहा है कि किर्लोस्कर ऑयल इंजंस लिमिटेड (केओईएल), किर्लोस्कर इंडस्ट्रीज लिमिटेड (केआईएल), किर्लोस्कर न्यूमैटिक कंपनी लिमिटेड (केपीसीएल) और किर्लोस्कर फेरस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (केएफआईएल) केबीएल की विरासत को छीनने और दबाने का प्रयास कर रही हैं। पत्र में आरोप लगाया गया है कि यह कंपनियां केबीएल को अपनी विरासत दिखाने की कोशिश कर रही हैं।

अतुल-राहुल ला रहे हैं अपने कारोबारों में नयापन: अतुल और राहुल अपने नेतृत्व वाली कंपनियों में नयापन ला रहे हैं। इसके लिए इन्होंने किर्लोस्कर लिमिटलेस नाम दिया है। पत्र में कहा गया है कि केबीएल 130 साल पुरानी विरासत है। केओईएल ने केबीएल की इस विरासत को छीनने का प्रयास कर रही है। केओईएल केवल 12 साल पुरानी है। यही नहीं केआईएल, आर्का फिनकैप, केपीसीएल, केएफआईएल और किर्लोस्कर चिलर्स प्राइवेट लिमिटेड (केसीपीएल) की विरासत भी 130 साल से कम पुरानी है।

किर्लोस्कर इंडस्ट्रीज के पास नहीं ट्रेडमार्क लाइसेंस: पत्र में कहा गया है कि किर्लोस्कर इंडस्ट्रीज के पास किर्लोस्कर के ट्रेडमार्क और कॉपीराइट का लाइसेंस नहीं है। इसके अलावा किर्लोस्कर प्रॉपराइटरी लिमिटेड (केपीएल) इसका शेयरहोल्डर भी नहीं है। केपीएल में परिवार के सभी सदस्यों की बराबर हिस्सेदारी है। केपीएल के गठन सितंबर 2009 में बंटवारे के समय डीड ऑफ फैमिली सैटलमेंट (डीएफएस) के जरिए हुई थी। यह कंपनी ट्रेडमार्क को दूसरी कंपनियों को नहीं दे सकती है।

सेबी से कार्रवाई की मांग: केबीएल ने कहा है कि इन कंपनियों ने सेबी रेगुलेशंस 2015 के रेगुलेशन 30 का उल्लंघन किया है। केबीएल ने इन सभी कंपनियों पर आवश्यक कार्रवाई करने और जुर्माना लगाने की गुहार लगाई है।

1998 में हुई थी किर्लोस्कर ग्रुप की स्थापना:  किर्लोस्कर ग्रुप की स्थापना 1988 में लक्ष्मनराव किर्लोस्कर और किर्लोस्कर भाइयों ने की थी। यह ग्रुप वाटर सप्लाई प्रोजेक्ट, ऑयल एंड गैस और पावर प्लांट्स के लिए इंडस्ट्रियल पंप की मैन्युफैक्चरिंग करती है।

सुप्रीम कोर्ट ने दी मध्यस्थता की सलाह: किर्लोस्कर परिवार के बीच लंबे समय से संपत्ति विवाद चल रहा है। केबीएल के संजय किर्लोस्कर की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि इस पारिवारिक विवाद का हल करने के लिए मध्यस्थता सबसे अच्छा उपाय है। कोर्ट का कहना है कि किर्लोस्कर एक प्रतिष्ठित परिवार है। अगर वे चाहें तो मध्यस्थता के लिए जज की नियुक्ति की जा सकती है।

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