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कोरोना के संकट में सैलरी कट या नौकरी जाने पर परिवार को बताएं या नहीं? जानें, क्या और कैसे करना चाहिए

यदि आपके साथ भी ऐसा अप्रत्याशित संकट आ खड़ा हुआ है तो यह समय धीरज रखकर अपनी स्किल को मजबूत करने और भविष्य की प्लानिंग करने का है। हालांकि इस बीच यह सवाल भी उठता है कि क्या इस तरह के संकट के बारे में आपको अपने बच्चों से बताना चाहिए या नहीं।

job lossप्रतीकात्मक तस्वीर

कोरोना के इस संकट में ऐसे बहुत से लोग हैं, जिन्हें अचानक ही अपनी सैलरी में कटौती या फिर नौकरी जाने के संकट का सामना करना पड़ा है। यदि आपके साथ भी ऐसा अप्रत्याशित संकट आ खड़ा हुआ है तो यह समय धीरज रखकर अपनी स्किल को मजबूत करने और भविष्य की प्लानिंग करने का है। हालांकि इस बीच यह सवाल भी उठता है कि क्या इस तरह के संकट के बारे में आपको अपने बच्चों से बताना चाहिए या नहीं। आइए जानते हैं, इस संकट के बीच कैसे परिवार से करनी चाहिए बात…

बच्चों की मैच्योरिटी का रखें ख्याल: सैलरी कट या फिर जॉब लॉस के संकट के बारे में बच्चों को बताने से पहले यह जरूरी है कि आप यह जान लें कि बच्चों का मेच्योरिटी लेवल कितना है। यदि आपको 5 या 6 साल के हैं तो फिर ऐसा करने से बचना चाहिए। हालांकि 12 साल या फिर उससे अधिक आयु में आपको बच्चों से पूरी बात साझा करनी चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि इतनी आयु में बच्चे यह आसानी से समझते हैं कि घर में क्या चल रहा है। इसलिए यह जरूरी है कि आप तसल्ली से बात करते हुए बच्चों को इस संकट के बारे में बताएं।

बेफिक्र होकर करें बात: घर के मुखिया होने के नाते यह जरूरी है कि आप रिलैक्स मू़ड में रहें। यदि आप ऐसा नहीं करते हैं तो आप एक तरह से बच्चों को भी तनाव देंगे। इसलिए बच्चों से बात रखते हुए तसल्ली से बात करें और उन्हें बेहद सहजता के साथ समझाएं।

सैलरी कट का असर समझाएं: बच्चों को सैलरी कट के बारे में बताते हुए यह भी समझाएं कि इसका रोजमर्रा के जीवन पर कैसे असर पड़ सकता है। आपको यह बताते हुए बच्चों को खर्च करने की हैबिट में बदलाव करने के लिए भी प्रेरित करना चाहिए। इसके अलावा उदाहरण देते हुए उन्हें यह भी बताएं कि कैसे सैलरी कटने के चलते आपने खर्च का तरीका बदला है और कैसे अन्य लोग भी इसे अपना सकते हैं।

सहयोग की भी कर सकते हैं अपील: यदि बच्चों की वह आयु है कि वे कुछ हद तक सहयोग कर सकते हैं तो फिर उन्हें सिर्फ समस्या न बताएं। उन्हें यह भी बताएं कि यदि वे सहयोग करना चाहें तो कैसे कर सकते हैं। दरअसल बच्चे यह नहीं जानते कि वे कैसे आपकी मदद कर सकते हैं। इसलिए उन्हें यह बात समझाना जरूरी है कि वे कैसे हेल्प कर सकते हैं और उसका सबसे आसान तरीका क्या हो सकता है।

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