ताज़ा खबर
 

जेल जाने से पहले क्लिंटन-ब्लेयर से ‘कारोबारी चर्चा’ के लिए विदेश जाना चाहते थे सहारा प्रमुख: SEBI

सहारा समूह के प्रमुख सुब्रत राय को 4 मार्च, 2014 को राष्ट्रीय राजधानी की तिहाड़ जेल में भेजा गया था और तब से वह जेल में हैं।

Author नई दिल्ली | April 11, 2016 01:27 am
सहारा समूह के प्रमुख सुब्रत राय (फाइल फोटो)

उच्चतम न्यायालय द्वारा जेल भेजे जाने से कुछ सप्ताह पहले संकटग्रस्त सहारा समूह के प्रमुख सुब्रत राय बिल क्लिंटन और टोनी ब्लेयर के साथ ‘कारोबारी चर्चा’ के लिए विदेश जाना चाहते थे। बाजार नियामक सेबी के वकील अरविंद दातार ने इस हाई प्रोफाइल मामले में यह खुलासा किया है। सेबी और सहारा के बीच लंबे समय से चल रही कानूनी लड़ाई को ‘दिलचस्प मामला’ करार देते हुए दातार ने यह भी कहा, ‘‘जैसा कि यह लाइन चलती है कि ‘पिक्चर अभी बाकी है’, हमें नहीं मालूम कि यह हमें कब और कहां ले जाएगा।’’

राय को 4 मार्च, 2014 को राष्ट्रीय राजधानी की तिहाड़ जेल में भेजा गया था और तब से वह जेल में हैं। यहां शुक्रवार (8 अप्रैल) शाम को ‘सहारा बनाम सेबी’ मामले पर एक व्याख्यान में प्रसिद्ध अधिवक्ता दातार ने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने मुंबई की एक प्रापर्टी से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान राय को देश नहीं छोड़ने को कहा था।

उन्होंने कहा, ‘‘जब उच्चतम न्यायालय ने उनसे (राय) पेश होने को कहा, राय ने एक आवेदन दायर कर कहा कि वह भारत छोड़ना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि वह कारोबारी चर्चा के लिए बिल क्लिंटन और टोनी ब्लेयर से मिलने के लिए भारत छोड़ना चाहते हैं। यह बात दस्तावेज पर है।’’

दातार ने कहा कि बाद में अदालत ने राय को पेश होने के लिए कहा और इसके बाद राय ने एक हलफनामा दायर कर कहा कि उनकी मां की तबीयत बहुत खराब है कि वह लखनऊ नहीं छोड़ सकते। विधि सेंटर फॉर लीगल पालिसी द्वारा यहां आयोजित व्याख्यान में दातार ने कहा, ‘‘मैंने कहा कि यदि वह बिल क्लिंटन से मिलने जा सकते हैं तो वह उच्चतम न्यायालय में भी आ सकते हैं।’’

सेबी की रिफंड प्रक्रिया की प्रगति के संबंध में दातार ने कहा कि जमाकर्ताओं की कुल संख्या 3 करोड़ है, लेकिन रिफंड के दावे केवल 5,000 जमाकर्ताओं द्वारा किए गए हैं। ‘‘सेबी द्वारा रिफंड की गई कुल रकम 55 करोड़ रुपए है।’’

राय की रिहाई के लिए जमानत राशि जुटाने के वास्ते उच्चतम न्यायालय ने सेबी को सहारा समूह की 87 ‘भारमुक्त’ संपत्तियों की बिक्री की प्रक्रिया शुरू करने को कहा है। इन संपत्तियों के स्वामित्व विलेख सेबी के पास हैं। दातार ने हालांकि कहा कि यह एक ‘थकाने वाला काम’ होगा। उन्होंने विजय माल्या के किंगफिशर हाउस भवन की नीलामी का उदाहरण देते हुए कहा कि इसमें बोलीकर्ताओं ने कोई रुचि नहीं दिखाई।

उन्होंने कहा, ‘‘मुझे इस बात की चिंता है कि 40,000 करोड़ रुपए मूल्य की कई संपत्तियां हैं। अब हमें बैनामा की जांच करनी होगी। हमें यह सब कराना होगा जोकि एक बोझिल काम है।’’

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App