चीनी एप्‍स के मार्केट पर स्‍वदेशी जागरण मंच ने जताई चिंता, प्रधानमंत्री तक जाएगा मामला

एसजेएम का तर्क है कि चीन स्थित ई-कॉमर्स साइट्स और शीन, अलीएक्सप्रेस और क्लब फैक्ट्री जैसे विक्रेता भारत के विदेशी व्यापार अधिनियम (विकास और विनियमन) के एक खंड का दुरुपयोग कर रहे हैं।

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आरएसएस सहयोगी शाखा पहले से ही वाणिज्य मंत्रालय को इस मुद्दे से अवगत करा चुकी है।

आरएसएस (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) की शाखा स्वदेशी जागरण मंच (एसजेएम) ने चीनी एप्स के नए ई-कॉमर्स मार्केट पर चिंता जताई है। स्वदेशी जागरण मंच की इंटरनल रिसर्च टीम ने यह आकलन किया है कि चीनी ई-कॉमर्स फर्म वर्तमान में भारतीय खरीदारों से रोजाना दो लाख से ज्यादा ऑर्डर लेती हैं और कूरियर और पोस्टल गिफ्ट शिपमेंट के माध्यम से सामान डिलीवर कर रही हैं। इससे कंपनियां भारतीय कानून के मुताबिक पेमेंट गेटवे, कस्टम ड्यूटीज और जीएसटी को दरकिनार कर रही हैं। जिससे भारत में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) व्यापार बाजार में बाधा आती है।

इकोनॉमिक टाइम्स के मुताबिक एसजेएम की मांग है कि चीन से भारत आने वाले सभी प्रॉडक्ट शिपमेंट को सीमा शुल्क के माध्यम से चैनलाइज्ड किया जाए। तब तक चीन से आने वाले सभी पोस्टल गिफ्ट शिपमेंट बंद कर दिए जाएंगे। जीएसटी नियमों का पालन नहीं करने वाले और अनरजिस्टर्ड चीनी ई-कॉमर्स एप्स को डाउनलोड करना भी प्रतिबंधित हो जाए और पेमेंट गेटवे बंद कर दिए जाएं। आरएसएस सहयोगी शाखा पहले से ही वाणिज्य मंत्रालय को इस मुद्दे से अवगत करा चुकी है और अब इसे प्रधानमंत्री के पास ले जाने की तैयारी कर रही है। ईटी के मुताबिक सरकार इस मुद्दे पर एक्शन के लिए विचार कर रही है।

एसजेएम के राष्ट्रीय सह-संयोजक अश्विनी महाजन ने बताया कि, “हमने इस मुद्दे पर वाणिज्य मंत्रालय में अधिकारियों से बात की है और वे इसके प्रति सहानुभूति रखते हैं। हमें लगता है कि इस मुद्दे के हालात की जांच करने के लिए सरकारी प्रयास की आवश्यकता है और इसलिए हम इसे पीएमओ और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के साथ-साथ वित्त मंत्रालय के पास ले जाएंगे।” एसजेएम का तर्क है कि चीन स्थित ई-कॉमर्स साइट्स और शीन, अलीएक्सप्रेस और क्लब फैक्ट्री जैसे विक्रेता, भारत के विदेशी व्यापार अधिनियम (विकास और विनियमन) के एक खंड का दुरुपयोग कर रहे हैं, जिसमें भारत में रहने वाले व्यक्तियों को विदेशों से 5,000 रुपये तक के उपहार पर सीमा शुल्क और दूसरे टैक्स की छूट है। छूट मुख्य रूप से एनआरआई द्वारा अपने घरवालों को भेजे गए कम मूल्य वाले उपहारों के उद्देश्य से है। एसजेएम ने कहा कि सीमा शुल्क ड्यूटीज को छोड़कर, इन पर कोई जीएसटी नहीं लगाया जा रहा है, ऐसे संकेत है कि मिडिल ईस्ट में रहने वाले एनआरआई कर्मचारी इन गिफ्ट शिपमेंट्स का दुरुपयोग कर रहे हैं।

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