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बीजेपी शासित यूपी और मध्य प्रदेश में श्रम कानूनों में ढील के खिलाफ उतरा RSS से जुड़ा संगठन भारतीय मजदूर संघ

भारतीय मजदूर संघ के नेता बृजेश उपाध्याय ने कहा कि राज्य सरकारें यह नहीं बता पाई हैं कि आखिर श्रम कानून कैसे आर्थिक गतिविधियों में बाधक हैं और आखिर किन परिस्थितियों के चलते श्रम कानूनों को स्थगित करना पड़ रहा है।

labour law

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ भारतीय मजूदर संघ ने राज्य सरकार की ओर से श्रम कानूनों में ढील दिए जाने का विरोध किया है। बीजेपी शासित उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में श्रम कानून बदले जाने का विरोध करते हुए बीएमएस ने अपनी स्टेट यूनिट्स को विरोध करने को कहा है। यही नहीं भारतीय मजदूर संघ ने राज्यों की अपनी यूनिट से कहा है कि वे मुख्यमंत्रियों को इस संबंध में ज्ञापन सौंपें और इनके श्रम कानूनों में एकतरफा बदलाव न करने की अपील करें। बीजेपी शासित यूपी और मध्य प्रदेश ने श्रम कानूनों में ढील का प्रस्ताव रखा है, जिसका विरोधी दलों के साथ ट्रेड यूनियनों ने विरोध किया है।

मजदूर संघ के अध्यक्ष बृजेश उपाध्याय ने सोमवार को राज्यों की यूनिट से कहा कि वे मुख्यमंत्रियों से कहें कि श्रम कानूनों में किसी भी तरह के बदलाव को लेकर ट्रेड यूनियनों को भी भरोसे में रखा जाए। बृजेश उपाध्याय ने कहा, ‘श्रम कानूनों को स्थगित करने की बजाय यह श्रमिकों की समस्याओं को तत्काल हल करने का है। जिन्हें कोरोना से निपटने के लिए लागू लॉकडाउन के चलते अपनी नौकरियों, आजीविका के संकट से गुजरना पड़ रहा है।’

उपाध्याय ने कहा कि राज्य सरकारें यह नहीं बता पाई हैं कि आखिर श्रम कानून कैसे आर्थिक गतिविधियों में बाधक हैं और आखिर किन परिस्थितियों के चलते श्रम कानूनों को स्थगित करना पड़ रहा है। दरअसल पिछले सप्ताह ही उत्तर प्रदेश सरकार ने तीन नियमों को छोड़कर सभी श्रम कानूनों को तीन साल के लिए स्थगित करने का फैसला लिया था। इस अध्यादेश में करार के साथ नौकरी करने वाले लोगों को हटाने, नौकरी के दौरान हादसे का शिकार होने और समय पर वेतन देने जैसे तीन नियमों को छोड़कर अन्य सभी श्रम कानूनों को तीन वर्ष के लिए स्थगित कर दिया गया है।

मजदूरों के बीच काम करने वाले आरएसएस के संगठन ने पिछले ही दिनों सरकार को यह चेतावनी दी थी कि भारत चीन के मॉडल पर श्रम कानूनों के मामले में आगे नहीं बढ़ सकता। बीएमएस ने कहा था कि भारत में लोकतंत्र है और यहां के हालात की तुलना चीन जैसे साम्यवादी तानाशाही देश से नहीं की जा सकती है।

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