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13 राज्‍यों में बिजली कंपनियों पर 5000 करोड़ रुपए का कर्ज, बिजली की खरीद और बिक्री पर रोक

पावर सिस्टम ऑपरेशन कॉरपोरेशन (POSOCO), बिजली मंत्रालय के तहत राष्ट्रीय ग्रिड ऑपरेटर ने 12 राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश (UT) को हाजिर बाजार में बिजली खरीदने और बेचने से रोक दिया है।

13 राज्‍यों में बिजली कंपनियों पर 5000 करोड़ रुपए का कर्ज, बिजली की खरीद और बिक्री पर रोक
13 राज्‍यों में बिजली कंपनियों पर 5000 करोड़ रुपए का कर्ज, बिजली की खरीद और बिक्री पर रोक (फाइल फोटो)

पावर सिस्टम ऑपरेशन कॉरपोरेशन (POSOCO), बिजली मंत्रालय के तहत राष्ट्रीय ग्रिड ऑपरेटर ने 12 राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश (UT) को हाजिर बाजार में बिजली खरीदने और बेचने से रोक दिया है, क्‍योंकि इन राज्‍यों में बिजली कंपनियों पर 5000 करोड़ रुपए का बकाया है। इसमें आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, तेलंगाना, कर्नाटक, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, जम्मू और कश्मीर, राजस्थान, मणिपुर और मिजोरम शामिल है।

इन डिस्कॉम पर कुल मिलाकर 5,000 करोड़ रुपए का कर्ज है, जो तेलंगाना में सबसे ज्यादा 1,380 करोड़ रुपए है। यह पहली बार है जब ग्रिड ऑपरेटर ने बिजली (विलंब भुगतान अधिभार और संबंधित मामले) नियम, 2022 को लागू किया है, ताकि डिस्कॉम को ऑप्‍शनल अल्पकालिक सोर्स से बिजली खरीदने की अनुमति नहीं दी जा सके।

बिजनेस स्‍टैंडर्स की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि डिस्कॉम हाजिर बाजार से अतिरिक्त बिजली नहीं खरीद पाएंगे, जबकि जेनकोस के साथ उनके दीर्घकालिक समझौतों से आपूर्ति जारी रहेगी। यदि डिफॉल्ट जारी रहता है तो लंबी अवधि की आपूर्ति को भी विनियमित किया जा सकता है।

नियम के अनुसार, डिस्कॉम के भुगतान अनुशासन से संबंधित हैं, जो भुगतान की देय तिथि के एक महीने के भीतर बकाया राशि पर देर से भुगतान अधिभार (एलपीएस) का भुगतान करने के लिए बाध्य हैं। डिफ़ॉल्ट के लगातार महीनों के लिए एलपीएस की दर में देरी के हर महीने के लिए 0.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी होगी। वहीं डिफॉल्ट के ढाई महीने से अधिक का बकाया चुकाने में और देरी करने पर दंड के प्रावधान लागू होंगे।

नियम कहते हैं कि “डिफ़ॉल्ट इकाई को अल्पकालिक बिजली आपूर्ति पूरी तरह से एलपीएस नियमों में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार विनियमित की जाएगी। अल्पकालिक बिजली आपूर्ति के नियमन के बाद लगातार चूक, या साढ़े तीन महीने के लिए भुगतान न करने में लगातार चूक के परिणामस्वरूप, दीर्घकालिक पहुंच और मध्यम अवधि के उपयोग के नियमन में 10 प्रतिशत की प्रगतिशील वृद्धि होगी।”

विशेषज्ञों के अनुसार, नए एलपीएस नियमों के तहत जुर्माने का प्रावधान अपने आप शुरू हो जाता है और डिस्कॉम को इसका पालन करना पड़ता है या और भी कड़े दंड का सामना करना पड सकता है। हाजिर बाजार से बिजली खरीद को विनियमित करने के कदम से बिजली एक्सचेंजों में कीमतों में कमी आएगी क्योंकि कम खरीदार होंगे।

इस साल मई में, बिजली मंत्रालय ने एक योजना अधिसूचित की, जो डिस्कॉम को 48 किस्‍तों में अपना बकाया भुगतान करने में सक्षम बनाएगी। अगर किस्त देने में देरी होती है तो सरचार्ज देना होगा।

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