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तापीय बिजली परियोजनाओं में 2.50 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश संकट का सामना कर रहा है।

Author नई दिल्ली | February 11, 2019 10:13 AM
तापीय बिजली परियोजनाओं में 2.50 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश संकट का सामना कर रहा है।

तापीय बिजली परियोजनाओं में 2.50 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश संकट का सामना कर रहा है। इस समस्या के समयबद्ध तरीके से निपटाने के लिए उपचारात्मक कार्रवाई की तत्काल जरूरत है। एसोचैम-ग्रांट थॉर्नटन ने अपनी संयुक्त रिपोर्ट में यह बात कही। इन तापीय बिजली परिसंपत्तियों में घरेलू कोयला, आयातित कोयला और गैस आधारित परियोजनाएं शामिल हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि देश का बिजली क्षेत्र इन दिनों सबसे ज्यादा संकट से गुजरने वाले क्षेत्रों में से एक है। बिजली क्षेत्र की कंपनियों को दिये गये करीब एक लाख करोड़ रुपये के ऋण एनपीए हो गये हैं या फिर पुनर्गठित किये गये हैं।

एसोचैम-ग्रांट थॉर्नटन ने ”भारतीय तापीय बिलजी क्षेत्र में संकटग्रस्त संपत्तियां” शीर्षक से जारी रिपोर्ट में कहा, “हालिया अनुमान के मुताबिक, करीब 66,000 मेगावाट क्षमता की परियोजनाएं विभिन्न चरणों में वित्तीय संकट का सामना कर रही हैं। इसमें 54,800 मेगावाट की कोयला आधारित बिजली परियोजनाएं, 6,830 मेगावाट की गैस आधारित और 4,570 मेगावाट की जल विद्युत परियोजनाएं शामिल हैं।

इन परिसंपत्तियों में ऋणदाताओं का करीब तीन लाख करोड़ रुपये फंसा हुआ है, जो कि खतरे की घंटी है।” इसमें कहा गया कि इन तापीय परियोजनाओं को नियमित ईंधन आपूर्ति समझौते का अभाव, बिजली खरीद समझौते की कमी, इक्विटी और कार्यशील पूंजी में निवेश करने में प्रवर्तकों के नाकाम रहने तथा नियामकीय बाधाओं जैसी दिक्कतों का भी सामना करना पड़ रहा है। रिपोर्ट में कहा गया कि इन संकटग्रस्त बिजली संपत्तियों के लिए सर्वव्यापी समाधान नहीं है। इनके लिए बहु-आयामी रणनीति अपनाने की जरूरत है।

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