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भारत और ईरान के बीच गैस फील्‍ड को लेकर ठनी, भारतीय कंपनियों ने तेल आयात में कटौती का किया फैसला

भारतीय तेल कंपनियों ने नेशनल ईरानी तेल कंपनी के प्रतिनिधियों को बताया है कि वे 2.40 बैरल प्रति दिन में 20 प्रतिशत कटौती कर 1.90 बैरल प्रति दिन निर्यात करेंगे।

Author नई दिल्‍ली | Updated: April 1, 2017 9:39 PM
चीन के बाद भारत, ईरान का दूसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है।

भारतीय तेल कंपनियां ईरान से तेल आयात में कटौती करेगी। इसके तहत साल 2017-18 में ईरान से तेल आयात में करीब 20 प्रतिशत की कटौती की जाएगी। इस मामले से जुड़े सूत्रों ने बताया कि एक गैस फील्‍ड को भारतीय कंपनी को नहीं दिए जाने के विरोध में यह फैसला लिया गया है। भारतीय कंपनी ओएनजीसी फरजाद बी गैस फील्‍ड को विकसित करना चाहता है लेकिन ईरान ने अभी तक कोई छूट नहीं दी है। चीन के बाद भारत, ईरान का दूसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है। भारत ने ईरान पर परमाणु कार्यक्रम के चलते प्रतिबंधों के बावजूद उससे संबंध बनाए रखे थे। हालांकि प्रतिबंध हटने के बाद से ईरान और भारत के संबंधों में तनाव आया है। ईरान ने अब अपने तेल और गैस की बेहतर कीमत के लिए थोड़ी आक्रामक रूख अपना रखा है।

ईरान के रवैये से नाराज भारतीय तेल मंत्रालय ने कंपनियों से ईरान से तेल आयात में कमी करने को कहा है। सूत्रों ने बताया, ”हम धीरे-धीरे कटौती कर रहे हैं और यदि फरजाद बी गैस फील्‍ड मामले में सुधार नहीं हुआ तो और कटौती करेंगे।” भारतीय तेल कंपनियों ने नेशनल ईरानी तेल कंपनी के प्रतिनिधियों को बताया है कि वे 2.40 बैरल प्रति दिन में 20 प्रतिशत कटौती कर 1.90 बैरल प्रति दिन निर्यात करेंगे। इंडियन ऑइल और मंगलोर रिफाइनरी व पेट्रोकैमिकल्‍स लगभग 20 हजार बैरल प्रति दिन की कटौती करेंगे। भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्‍तान पेट्रोलियम दोनों मिलकर 10 हजार बैरल प्रति दिन की कटौती करेंगे। अधिकारियों ने बताया इस पर ईरानी कंपनी ने धमकी दी है कि वह तेल कीमतों पर दी जाने वाली छूट को 80 प्रतिशत से 60 प्रतिशत कर देगी।

भारतीय कंपनियों ने इस साल फरवरी में ईरान से 5,42,400 बैरल प्रति दिन तेल आयात किया था जो कि हाल के सालों में सर्वाधिक है। ईरान से तेल कटौती में आयात से भारतीय तेल कंपनियों के सामने सस्‍ते तेल की कमी हो सकती हैं। हालांकि भारतीय कंपनियों का कहना है कि इससे कोई असर नहीं पड़ेगा। क्‍यों कि हल्‍के तेल की जरुरत है जो कि बाजार में काफी उपलब्‍ध है। अमेरिका में हल्‍के तेल के उत्‍पादन में बढ़ोत्‍तरी के चलते इसकी कीमतों में कमी देखने को मिली है।

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