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वाहन निर्माताओं को नितिन गडकरी ने हड़काया- इलेक्ट्रिक कार बनाइए, वर्ना चलवा देंगे गाड़ियों पर बुल्डोजर

वाहन निर्माताओं को कड़ी चेतावनी देते हुए गडकरी ने कहा कि जो सरकार का समर्थन कर रहे हैं वे फायदे में रहेंगे और जो ‘नोट छापने में लगे हैं’ उन्हें परेशानी होगी।

केन्द्रीय जल संसााधन, नदी विकास और गंगा पुनर्उद्धार मंत्री नितिन गडकरी। फोटो- पीटीआई

केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने सभी कार निर्माता कंपनियों को साल 2030 तक इलेक्ट्रिक कार की तरफ स्विच करने को कहा है। उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि सरकार हर हाल में तेल पर चलने वाली गाड़ियों से छुटकारा चाहती है। इसके लिए सरकार ने साल 2030 तक का वक्त निर्धारित किया है। इस दौरान अगर कंपनियों ने इलेक्ट्रिक कार का उत्पादन नहीं बढ़ाया तो तेल पीने वाली और धुआं उगलने वाली कारों पर बुल्डेजर चलवा दिया जाएगा। सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि प्रदूषण नियंत्रण और वाहन आयात पर लगाम लगाने के अपने प्रयासों के तहत वह इसके लिए कटिबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रिक वाहनों पर एक कैबिनेट नोट तैयार है जिसमें चार्जिंग स्टेशनों पर ध्यान दिया जाएगा।

गडकरी ने दिल्ली में आयोजित सियाम के सालाना सम्मेलन में कहा,‘ हमें वैकल्पिक ईंधन की ओर बढ़ना चाहिए… मैं यह करने जा रहा हूं, भले ही आपको यह पसंद हो या नहीं। मैं आपसे कहूंगा भी नहीं… मैं इन्हें (वाहनों को) ध्वस्त कर दूंगा। प्रदूषण के लिए, आयात के लिए मेरे विचार पूरी तरह स्पष्ट हैं। सरकार की आयात घटाने तथा प्रदूषण पर काबू पाने की स्पष्ट नीति है।’ वाहन निर्माताओं को कड़ी चेतावनी देते हुए गडकरी ने कहा कि जो सरकार का समर्थन कर रहे हैं वे फायदे में रहेंगे और जो ‘नोट छापने में लगे हैं’ उन्हें परेशानी होगी। उन्होंने कहा कि कंपनियां बाद में यह कहते हुए सरकार के पास नहीं आएं कि उनके पास ऐसे वाहनों का भंडार भरा पड़ा है जो वैकष्ल्पिक ईंधन पर नहीं चलते हैं।

उन्होंने कहा, ‘हम पहले ही कैबिनेट नोट तैयार करने की प्रक्रिया में हैं जहां हम चार्जिंग स्टेशनों की योजना बनाएंगे। यह अंतिम चरण में है और इसे यथाशीघ्र अंतिम रूप दिया जाएगा।’ इसके साथ ही उन्होंने कहा कि सरकार जल्द ही इलेक्ट्रिक वाहनों पर नीति लाएगी। किसी तरह के ढुलमुल रवैये के प्रति आगाह करते हुए मंत्री ने कहा कि भविष्य पेट्रोल व डीजल का नहीं है बल्कि वैकल्पिक ईंधन का है। उन्होंने कहा, ‘मैं आप कार निर्माताओं से विनम्र आग्रह करता हूं कि शोध करें। पहले जब मैंने आपको इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए कहा तो आपने कहा कि बैटरी महंगी है। अब बैटरियों की लागत 40 प्रतिशत कम हो गई है। अगर आप अब शुरू करते हैं तो बड़े पैमाने पर उत्पादन पर लागत और कम होगी। शुरुआती दिक्कतें तो हर कहीं होती हैं।’

मंत्री ने स्पष्ट कहा कि इलेक्ट्रिक कारें, बसें, टैक्सियां व बाइक ही भविष्य हैं और भारत को इस दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि आयात व प्रदूषण दोहरी समस्या हैं क्योंकि भारत का आयात बिल सात लाख करोड़ रुपये सालाना है जो कि अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा बोझ है। गडकरी ने कहा, ‘अब सरकार ने दूसरी पीढी के एथनोल के लिए 15 उद्योग शुरू करने का फैसला किया है। एथनोल का उत्पादन गेहूं व चावल के डंठलों, बांस, गन्ने की खोई आदि से किया जा सकता है। वैकल्पिक ईंधन महत्वपूर्ण विकल्प, लागत प्रभावी तथा प्रदूषण मुक्त है।’

इसके साथ ही उन्होंने कहा कि जीएसटी की वजह से अटकी वाहनों को खत्म करने की प्रस्तावित स्क्रेपिंग नीति का मुद्दा भी जल्द सुलझा लिया जाएगा। इस बारे में एक नोट तैयार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार की 2000 ड्राइविंग स्कूल खोलने की योजना है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कौशल विकास के सपने को बड़ी सफलता में उद्योग के सहयोग का आह्वान किया।

भारतीय वाहन विनिर्माताओं के संगठन सियाम के निवर्तमान अध्यक्ष विनोद दसारी ने आयात व प्रदूषण घटाने के लिए सरकार के कदमों की सराहना की और कहा कि उद्योग इसका पूरा समर्थन करता है। उन्होंने कहा, ‘हम तो पहले ही बीएस-चार से सीधे बीएस-छह तक केवल तीन साल में जा रहे हैं। यह दुनिया में कहीं भी सबसे कम समयावधि है। लेकिन हम टिकाउ नीति की मांग कर रहे हैं जो कि एक बार तय होने के बाद बदले नहीं जाएं।’ उन्होंने कहा कि सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि जब हम बीएस-छह मानकों को अपनाएं तो उसके अनुरूप ईंधन उपलब्ध हो। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि अगर सरकार कोई नीति बनाती है तो वह अदालत जैसी बाहरी एजेंसियों के संलिप्त होने पर भी उनका बचाव करे।

दसारी ने सुझाव दिया कि अगर सरकार प्रदूषण घटाना चाहती है तो उसे अधिक प्रदूषण फैलाने वाले पुराने वाहनों को प्रतिबंधित करना चाहिए बजाय इसके लिए नये वाहनों को निशाना बनाया जाए। वहीं टीवीएस कंपनी के चेयरमैन व प्रबंध निदेशक वेणु श्रीनिवासन ने भी यही राय रखते हुए कहा कि वाहन क्षेत्र की वृद्धि को बल देने के लिए टिकाऊ सरकारी नीतियां तथा विश्वविद्यालयों में मजबूत प्रौद्योगिकीय माहौल बहुत मायने रखता है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में वृद्धि के भारी अवसर हैं और उद्योग को कुशल श्रम, अनुसंधान तथा बुनियादी ढांचे जैसे मुद्दों पर सरकार के साथ मिलकर काम करना चाहिए।

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