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अनुपयोगी कानून निष्प्रभावी बनाने की योजना राज्यसभा में अटकी

जीएसटी विधेयक को पारित कराने के अलावा अप्रचलित कानूनों को निष्प्रभावी करने की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी योजना भी राज्यसभा में अटक गई ..

Author नई दिल्ली | Published on: December 27, 2015 11:04 PM
राज्यसभा की कार्यवाही। (पीटीआई फाइल फोटो)

जीएसटी विधेयक को पारित कराने के अलावा अप्रचलित कानूनों को निष्प्रभावी करने की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी योजना भी राज्यसभा में अटक गई । 1000 से अधिक अनुपयोगी कानूनों को निष्प्रभावी करने के प्रावधान वाले दो विधेयकों को शीतकालीन सत्र में संसद की मंजूरी नहीं मिल सकी। एक ओर 125 अनुपयोगी कानूनों को समाप्त करने वाले दो विधेयकों को संसद पारित कर चुकी है, वहीं कुल 1053 ऐसे कानूनों को निष्प्रभावी करने के प्रावधान वाले दो विधेयक बजट सत्र से राज्यसभा में लंबित हैं।

उच्च सदन में गतिरोध के बीच दोनों विधेयकों को चर्चा कराने और पारित कराने के लिए नहीं लिया जा सका। सरकार को अगले साल बजट सत्र में नए सिरे से इस पर आगे काम करना होगा, जो 21 फरवरी के आसपास शुरू होता है। प्रधानमंत्री ने कहा था कि अगर सरकार हर रोज एक पुराने कानून को समाप्त कर सके तो उन्हें खुशी होगी।

एक विधेयक 295 कानूनों को निष्प्रभावी करने वाला है, वहीं दूसरा लंबित विधेयक 758 ऐसे विनियोग अधिनियमों को रद्द करने वाला है जिनमें रेलवे (विनियोग) अधिनियम शामिल है। ये कानून अपनी प्रासंगिकता खो चुके हैं और कानून की किताबों में जगह घेर रहे हैं। विनियोग अधिनियम एक निश्चित समयावधि के उद्देश्य से बनाए जाते हैं और एक वित्तीय वर्ष के दौरान व्यय को अधिकृत करते हैं।

सक्षम शासन में अवरोध पैदा कर रहे अप्रचलित कानूनों को निष्प्रभावी करने के मोदी के एजंडा की तर्ज पर कानून मंत्रालय साल 2001 के बाद से पहली बार यह कवायद कर रहा है। साल 1950 से 2001 के बीच 100 से अधिक ऐसे कानूनों को समाप्त किया गया था। विधि आयोग ने पुराने कानूनों पर अपनी हालिया चार रिपोर्टों में क्रमश: 72, 113, 74 और 30 ऐसे कानूनों को समाप्त करने की सिफारिश की थी।

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