मुकेश अंबानी का यह सपना रह गया अधूरा, कोशिश करके भी नहीं बना पाए ‘द बैंक ऑफ अंबानी’

मुकेश अंबानी करीब 10 साल पहले देश का सबसे बड़ा निजी बैंक शुरू करने की तैयारी कर रहे थे। इसके लिए एक अमेरिकी कंपनी के साथ मिलकर ज्वायंट वेंचर भी बना लिया गया था।

Mukesh Ambani Anil Ambani
मुकेश अंबानी भारत का सबसे बड़ा प्राइवेट बैंक बनाना चाहते थे। (PTI Photo)

सबसे अमीर भारतीय व्यक्ति मुकेश अंबानी (Mukesh Ambani) का कारोबार तेल से लेकर रिटेल (Oil to Retail) तक कई क्षेत्रों में पसरा हुआ है। हालांकि इतना पैसा होने के बाद भी उनका एक सपना अधूरा ही रह गया। मुकेश अंबानी कभी देश का सबसे बड़ा प्राइवेट बैंक ‘द बैंक ऑफ अंबानी (The Bank Of Ambani)’ शुरू करने की तैयारियां कर रहे थे। कई कारणों से ये तैयारियां परवान नहीं चढ़ पाईं।

बैंक शुरू करने के लिए बन चुका था ज्वायंट वेंचर

मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज (Reliance Industries) ने करीब एक दशक पहले अमेरिका के डीई शॉ ग्रुप (DE Shaw Group) के साथ मिलकर एक ज्वायंट वेंचर (JV) बनाया था। यह ज्वायंट वेंचर तक ‘द बैंक ऑफ अंबानी’ लांच करने की पूरी तैयारी कर चुका था। इसके लिए डीई शॉ ग्रुप निवेश के अलावा टेक्नोलॉजी देने के लिए तैयार था।

लंबे समय तक RBI के पास लटका रहा अंबानी का प्रस्ताव

अंबानी का यह प्रस्ताव रिजर्व बैंक (RBI) के पास लंबे समय तब अटका रहा। रिजर्व बैंक को यह लग रहा था कि अंबानी का प्रस्तावित बैंक देश के तत्कालीन पांच निजी बैंकों के लिए अस्तित्व का संकट खड़ा कर सकता है। 2011 के शुरुआती महीनों में ऐसा लग रहा था कि रिजर्व बैंक कभी भी अंबानी के इस प्रस्ताव को मंजूरी दे सकता है। हालांकि बाद में रिजर्व बैंक ने इस प्रस्ताव पर निर्णय को अनिश्चित काल के लिए टाल दिया।

Anil Ambani को जिम्मेदार मानते हैं कई लोग

वह मुकेश अंबानी और अनिल अंबानी (Anil Ambani) के बीच चल रही पुरानी लड़ाई का चरम दौर था। बिजनेस इनसाइडर की एक खबर की मानें तो कई लोग मुकेश अंबानी के बैंक को मंजूरी नही मिल पाने का कारण अनिल अंबानी को मानते हैं। अनिल अंबानी उस समय पहले से ही रिलायंस कैपिटल (Reliance Capital) के जरिए फाइनेंशियल सेक्टर में कारोबार कर रहे थे। यदि मुकेश अंबानी के बैंक को मंजूरी मिली होती, तो फाइनेंशियल सेक्टर दोनों भाइयों की आमने-सामने की लड़ाई का गवाह बन सकता था।

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SBI के साथ मिलकर शुरू किया Jio Payment Bank

मुकेश अंबानी का यह सपना तो पूरा नहीं हो पाया, लेकिन बैंकिंग क्षेत्र में उतरने में उन्हें तब कामयाबी मिली, जब रिजर्व बैंक ने देश में पेमेंट बैंक को मंजूरी दी। रिजर्व बैंक ने 2015 में कुछ पेमेंट बैंक को मंजूरी दी, जिनमें मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस जियो का भी नाम शामिल था। इसके बाद जियो पेमेंट बैंक (Jio Payment Bank) ने अप्रैल 2018 में कारोबार शुरू कर दिया। इसमें रिलायंस इंडस्ट्रीज की 70 प्रतिशत और भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की 30 प्रतिशत हिस्सेदारी है।

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