Retail Inflation: जून में देश में खुदरा महंगाई बढ़कर 4.38% पर पहुंच गई, जो मई में 3.93% थी। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) के सोमवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, यह दर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के 4.2% के अनुमान से भी अधिक रही।
महंगाई में यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से खाद्य वस्तुओं, पर्सनल केयर उत्पादों और ज्वेलरी की कीमतों में तेजी के कारण दर्ज की गई। जून में साल-दर-साल फूड इन्फ्लेशन 5.32 प्रतिशत रही। ग्रामीण इलाकों में फूड इन्फ्लेशन 5.45 प्रतिशत थी, जबकि शहरी इलाकों में यह 5.09 प्रतिशत थी।
समाचार एजेंसी ANI के अनुसार, सब्जियां और ज्वेलरी महंगी हो गईं। टमाटर की महंगाई दर 31.92 प्रतिशत थी। अदरक की कीमतों में 50.41 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। चांदी की ज्वेलरी 133.21 प्रतिशत महंगी हुई। सोना/हीरा/प्लैटिनम ज्वेलरी की कीमतों में 36.82 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।
कुछ चीजें सस्ती भी हुईं। आलू की कीमतों में 20.34 प्रतिशत की गिरावट आई। मटर की कीमतों में 9.67 प्रतिशत की कमी आई। जीरे की कीमतों में 3.75 प्रतिशत की गिरावट आई।
कुल मिलाकर, शहरों की तुलना में गांवों में CPI ज्यादा थी। ग्रामीण महंगाई 4.74 प्रतिशत थी। शहरी महंगाई 3.92 प्रतिशत थी।
समाचार एजेंसी ANI के अनुसार, हाउसिंग महंगाई 2.10 प्रतिशत पर कम रही। रेस्तरां जैसी सेवाओं की कीमतों में भी बढ़ोतरी हुई। “रेस्तरां और आवास सेवाओं” की महंगाई दर 6.91 प्रतिशत थी। पर्सनल केयर की चीजों में 16.72 प्रतिशत की बड़ी बढ़ोतरी देखी गई।
बास्केट के अन्य हिस्सों में मिली-जुली स्थिति रही। पर्सनल केयर, सामाजिक सुरक्षा और अन्य सामान व सेवाओं में 16.72 प्रतिशत की बड़ी बढ़ोतरी देखी गई।
ट्रांसपोर्ट महंगाई 4.31 प्रतिशत थी। कपड़े और जूते-चप्पल की कीमतों में 3.23 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। बड़े राज्यों में, तेलंगाना में सबसे ज्यादा महंगाई दर 6.36 प्रतिशत दर्ज की गई। इसके बाद आंध्र प्रदेश और पुडुचेरी का नंबर था, जहाँ महंगाई दर 5.39 प्रतिशत रही।
कर्नाटक में यह 4.80 प्रतिशत और मध्य प्रदेश में 5.09 प्रतिशत थी। मिज़ोरम (1.63 प्रतिशत) और त्रिपुरा (1.65 प्रतिशत) जैसे राज्यों में कीमतों का दबाव काफी कम रहा।
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भारत के विदेशी व्यापार में जून 2026 के दौरान बढ़ोतरी दर्ज की गई। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, जून में भारत का एक्सपोर्ट (निर्यात) 15.5% बढ़कर 40.41 अरब डॉलर पर पहुंच गया। वहीं, इंपोर्ट (आयात) 31% की तेज बढ़ोतरी के साथ 70.84 अरब डॉलर हो गया। आयात में निर्यात के मुकाबले ज्यादा वृद्धि होने से देश का ट्रेड डेफिसिट (व्यापार घाटा) बढ़कर 30.43 अरब डॉलर हो गया। यहां पढ़ें पूरी खबर…
