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नबंवर में खुदरा मुद्रास्फीति की दर बढ़कर 5.54% पहुंची, तीन साल के सबसे उच्च स्तर को छूआ

महंगाई दर ने बीते तीन साल के सबसे उच्च स्तर को छूआ है। महंगाई दर के बढ़ने के पीछे खाने पीने की चीजों के दाम का बढ़ना मुख्य वजहों में से एक माना जा रहा है।

(प्रतीकात्मक तस्वीर)

सुस्त अर्थव्यवस्था की मार झेल रहे देशवासियों को लगातार महंगाई की मार पड़ रही है। गुरुवार (12 दिसंबर) को जारी किए गए आंकड़ों में खुदरा मुद्रास्फीति की दर अक्टूबर महीने के मुकाबले बढ़ गई। सरकार की तरफ से दी गई जानकारी में मुद्रास्फीति की दर नवंबर महीने में 5.54 फीसदी दर्ज की गई है जो कि अक्टूबर में 4.62 फीसदी थी। सितंबर महीने में खुदरा महंगाई दर 3.99 फीसदी थी।

मुद्रास्फीति की दर ने बीते तीन साल के सबसे उच्च स्तर को छूआ है। महंगाई दर के बढ़ने के पीछे खाने-पीने की चीजों के दाम का बढ़ना मुख्य वजहों में से एक माना जा रहा है। मांस-मछली, सब्जियों और दालों के दाम बढ़ने से खुदरा मुद्रास्फीति में यह उछाल आया है। जिसके चलते लोगों को नवंबर के महीने में महंगाई की मार और ज्यादा झेलनी पड़ी है। खुदरा वस्तुओं में मुद्रास्फीति बढ़ने से आम लोगों को खाने-पीने की वस्तुओं पर अधिक खर्च करना पड़ता है। स्वाभाविक ही इससे न सिर्फ लोगों की जेबों, बल्कि बाजार पर भी प्रतिकूल असर पड़ता है।

गौरतलब है कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने चालू वित्त वर्ष की दूसरी छमाही के लिए अपने मुद्रास्फीति के अनुमान को बढ़ाकर 5.1- 4.7 फीसदी किया है। मुख्य रूप से प्याज और टमाटर जैसी सब्जियों की कीमतों में उछाल को देखते हुए केंद्रीय बैंक ने मुद्रास्फीति का अनुमान बढ़ाया है। आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा है कि इन सभी स्थितियों को ध्यान में रखते हुए सरकार को एक निर्णायक मौद्रिक नीति अपनाने की जरूरत है।

इसके अलावा अक्टूबर में औद्योगिक उत्पादन 3.4 प्रतिशत घटा है। जबकि एक साल पहले इसी महीने में औद्योगिक उत्पादन 8.4 प्रतिशत बढ़ा था। इस गिरावट की मुख्य वजह पॉवर माइनिंग और मैन्यूफैक्चर सेक्टर का खराब प्रदर्शन बताई जा रही है। मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर में सुस्ती की वजह से अन्य सेक्टर पर भी इसका प्रभाव पड़ रहा है।

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