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10 हजार रुपए तक के ट्रांजैक्शंस की बदलने वाली है व्यवस्था? RBI ने दिया प्रीपेड कार्ड का प्रस्ताव

बता दें कि रिजर्व बैंक ने बृहस्पतिवार को जारी मौद्रिक नीति समीक्षा में नीतिगत दर रेपो को 5.15 प्रतिशत पर अपरिर्वितत रखा है।

Author नई दिल्ली | Updated: December 5, 2019 11:34 PM
rbiरिजर्व बैंक (फाइल फोटो)

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बृहस्पतिवार को एक प्रीपेड भुगतान कार्ड लाने का प्रस्ताव किया, जिसका इस्तेमाल 10,000 रुपये तक की माल और सेवाओं की खरीद के लिए किया जा सकेगा। चालू वित्त वर्ष की पांचवी द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा जारी करने बाद RBI ने कहा डिजिटल भुगतान को प्रोत्साहन देने में पूर्व भुगतान (प्रीपेड) प्रणालियों की अहम भूमिका है। नयी सेवा इस प्रणाली के उपयोग की सुविधा को और बढ़ाएगी।

बयान के मुताबिक, ‘‘एक नयी तरह की प्रीपेड भुगतान प्रणाली को पेश किया जाएगा। इसका उपयोग 10,000 रुपये तक की माल व सेवाओं की खरीद के लिए किया जा सकेगा।’’ उन्होंने कहा कि इस तरह की प्रीपेड प्रणाली को शुरू करना और फिर से उसमें पैसे भरने का काम केवल बैंक खातों के माध्यम से ही किया जा सकेगा। इसका उपयोग बिलों के भुगतान या दुकानदारों को भुगतान करने में किया जा सकेगा।

रिजर्व बैंक ने कहा कि इस संबंध में वह दिशानिर्देश 31 दिसंबर, 2019 को जारी करेगा। वर्तमान में देश में प्रीपेड भुगतान सेवा के तहत बैंक खाते या क्रेडिट कार्ड से प्रणाली में पैसे रखे जा सकते हैं। इनकी मासिक सीमा 50,000 रुपये है। अभी बैंकों और गैर-बैंकिंग इकाइयों को इस तरह के कार्ड जारी करने की अनुमति है। वर्तमान में देश में तीन तरह की प्रीपेड भुगतान प्रणालियां उपलब्ध हैं।

इसके अलावा रिजर्व बैंक ने अंतरराष्ट्रीय वित्त सेवा केंद्र की बैंकिंग इकाइयों (आईबीयू) को उनके कॉरपोरेट ग्राहकों के लिए विदेशी मुद्रा में लेनदेन वाले चालू खाते खोलने की भी अनुमति दे दी। इससे उन्हें परिचालन में मदद होगी। बता दें कि रिजर्व बैंक ने बृहस्पतिवार को जारी मौद्रिक नीति समीक्षा में नीतिगत दर रेपो को 5.15 प्रतिशत पर अपरिर्वितत रखा है। केंद्रीय बैंक ने साथ ही कहा है कि आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा देने के लिए वह भविष्य में अपने रुख को उदार बनाए रखेगा।

इसी बीच, रिजर्व बैंक ने लघु वित्त बैंकों (एसएफबी) को लाइसेंस के लिये ‘कभी भी’ (आन टैप) आवेदन करने की सुविधा को लेकर अंतिम दिशानिर्देश बृहस्पतिवार को जारी कर दिए। इसके तहत न्यूनतम आवश्यक पूंजी की सीमा को दोगुना कर 200 करोड़ रुपये किया गया है। रिजर्व बैंक ने बयान में कहा कि शहरी सहकारी बैंक, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी, सूक्ष्म वित्तीय संस्थान , स्थानीय क्षेत्रीय बैंक या भुगतान बैंक से परिर्वितत होकर परिचालन में आये निकायों के लिये 200 करोड़ रुपये की न्यूनतम आवश्यक पूंजी की शर्त लागू नहीं होगी।

रिजर्व बैंक ने कहा कि जिन भुगतान बैंकों ने परिचालन के पांच साल पूरे कर लिये हैं, नियामकीय जरूरतों को पूरा करने की स्थिति में वे भी लघु वित्त बैंक बनने के पात्र हैं। उसने कहा, ‘‘लघु वित्त बैंकों से जुड़े जोखिम को देखते उन्हें अपनी जोखिम भारांकित संपत्तियों पर निरंतर आधार पर न्यूनतम 15 प्रतिशत के बराबर पूंजी पर्याप्तता अनुपात रखना होगा।’’

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