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बड़ा हुआ मुकेश अंबानी का साम्राज्य, 5.60 लाख करोड़ रुपए के पार पहुंची परिवार की दौलत

एशिया के सबसे दौलतमंद कारोबारी मुकेश अंबानी के परिवार का साम्राज्य भी बड़ा हो चुका है। यही वजह है कि अंबानी परिवार की संपत्ति एशिया के दूसरे बड़े दौलतमंद शख्स की फैमिली से ज्यादा हो गई है।

Reliance Industries, Asia richest family, Mukesh Ambani,अंबानी परिवार की संपत्ति 76 बिलियन डॉलर के पार (फोटो: PTI)

दुनिया के टॉप अमीरों में शामिल रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी के परिवार को बड़ी उपलब्धि मिली है। दरअसल, ब्लूमबर्ग बिलेनियर इंडेक्स ने बताया है कि मुकेश अंबानी के परिवार की संपत्ति एशिया के दूसरे बड़े दौलतमंद शख्स की फैमिली से डबल हो गई है।

आपको यहां बता दें कि एशिया के अमीरों की सूची में मुकेश अंबानी परिवार शीर्ष पर है । ब्लूमबर्ग बिलेनियर इंडेक्स के मुताबिक मुकेश अंबानी की संपत्ति करीब 76 बिलियन डॉलर (5.60 लाख करोड़ रुपए ) है जबकि हांगकांग स्थिति रियल एस्टेट सेक्टर की कंपनी सन हांगकाई प्रॉपर्टीज के मालिक कॉक फैमिली की संपत्ति 33 बिलियन डॉलर है।

यह एशिया का दूसरा दौलतमंद परिवार है। अंबानी परिवार और कॉक फैमिली के बीच संपत्ति का अंतर दोगुना से भी ज्यादा का है। अहम बात ये है कि मुकेश अंबानी परिवार की संपत्ति कोरोना काल में बढ़ी है। इस संपत्ति के बढ़ने की सबसे बड़ी वजह रिलायंस रिटेल और रिलायंस जियो में निवेश का मिला है।

मिस्त्री परिवार भी टॉप 10 में: भारत की ओर से शापूरजी पालोनजी समूह को संभालने वाला मिस्त्री परिवार भी टॉप 10 दौलतमंत फैमिली में शामिल है। इस परिवार के पास 22 बिलियन डॉलर की संपत्ति है। आपको बता दें कि ये समूह रियल एस्टेट समेत कई सेक्टर में सक्रिय है।

चीन के अरबपति शामिल क्यों नहीं: दरअसल, पहली पीढ़ी की संपत्ति को शामिल कर सूची को तैयार किया गया है। यही कारण है कि इस सूची में चीन से कोई परिवार नहीं है। आपको बता दें कि चीन के अधिकतर युवाओं ने अपने कारोबार की शुरुआत की और बढ़ाया। मसलन, अलीबाबा ग्रुप के अरबपति फाउंडर जैक मा जैसे कारोबारी व्यक्तिगत तौर पर अमीरों की सूची में शामिल तो हैं लेकिन परिवार के स्तर पर अन्य कोई नहीं है। वहीं, भारत का अंबानी या मिस्त्री परिवार कई दशक से कारोबार जगत में सक्रिय है।

 

अंबानी बना रहे फ्यूचर का प्लान: बीते दिनों ये खबर आई थी कि मुकेश अंबानी एक फैमिली कौंसिल बनाने जा रहे हैं। इसका मकसद अपने कारोबार को अगली पीढ़ी तक आसानी से ट्रांसफर करना है। अतीत को देखते हुए मुकेश अंबानी ये फैसला ले सकते हैं। आपको बता दें कि साल 2002 में धीरूभाई अंबानी की मौत के बाद रिलायंस की विरासत को लेकर मुकेश अंबानी और अनिल अंबानी में जंग छिड़ गई थी। तमाम विवादों के बाद दोनों भाइयों में बंटवारा हुआ।

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