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‘बचपन से कैश या क्रेडिट कार्ड कभी साथ नहीं रखा’ पढ़ें और क्या बोले मुकेश अंबानी

अपने सिद्धांतो के साथ टारगेट पर फोकस करेंगे तो टारेगट पर पहुंचने में आसानी होगी।

मुकेश अंबानी अपनी पत्नी नीता अंबानी के साथ। (फाइल फोटो)

रिलायंस इंडस्ट्रीज के चैयरमैन मुकेश अंबानी ने इस बात का खुलासा किया है कि उन्होंने बचपन से लेकर आज तक कभी अपने साथ कैश या क्रेडिट कार्ड नहीं रखा है। एक कार्यक्रम में मुकेश अंबानी ने बताया कि इस काम के लिए उनके साथ कोई न कोई रहता है। मुकेश अंबानी ने मार्केट में जियो की मजबूत पकड़ को लेकर कहा कि अगर आप अपने टारगेट पर फोकस करेंगे तो सफलता जरूर मिलेगी। अपने सिद्धांतो के साथ टारगेट पर फोकस करेंगे तो टारेगट पर पहुंचने में आसानी होगी।

डेटा का इस्तेमाल किसानों के लिए भी हो सकता है। ये डेटा नया तेल ही नहीं है, ये देश की मिट्टी की भी सेवा में उपयोग में लाया जा सकता है। डिजिटल टेक्नोलॉजी का शिक्षा के क्षेत्र में भी बड़ा इस्तेमाल हो सकता है। सबके लिए शिक्षा इससे संभव हो सकती है। 17वीं शताब्दी में भारत और चीन दुनिया के सबसे विकसित देश थे। 300 साल तक दुनिया में पश्चिमी देशों का दबदबा रहा। आज दुनिया के विकास की कमान एक बार फिर भारत और चीन के हाथों में है।

चौथी औद्योगिक क्रांति अब हमारे सामने है। इस डिजिटल क्रांति की नींव कनेक्टिविटी, कंप्यूटिंग, डेटा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस हैं। भारत को चौथी औद्योगिक क्रांति की 3 बातें समझनी होंगी। अब विकास-लीनियर से एक्सपोनेंशियल और अभाव से सम्पन्नता की ओर बढ़ेगा। इसकी बुनियाद में होगी इंटेलिजेंस सर्विसेज। आनेवाले सालों में मशीन इंटेलिजेंस, मानव इंटेलिजेंस की तुलना में तेजी से बढ़ेगी। इसका मतलब ये होगा कि ‘इंटेलिजेंट सर्विसेज’ से हमें बहुत फायदा होगा।

विदेशी इनवेस्टरों के लिए मेरा सीधा संदेश है कि भारत के विकास का हिस्सा बनिए, भारत में निवेश कीजिए, भारत के पार्टनर बनें, भारत के साथ आगे बढ़िए। स्वास्थ्य के क्षेत्र में भारत कई कमियों को डिजिटल टेक्नोलॉजी के जरिए दूर कर सकता है। देश में जो जहां हो, उसे बेहतरीन डॉक्टरों और सेवाओं का लाभ कभी भी मिल सकेगा। भारत, डिजिटल टेक्नोलॉजी के जरिए ऐसा अलग और किफायती हेल्थकेयर सिस्टम बना सकता है जो दुनिया के लिए एक मॉडल होगा।

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