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रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड अब तेल नहीं सॉफ्टवेयर कंपनी, जानें- कैसे मुकेश अंबानी के लिए ‘नया तेल’ बना डेटा

जियो के मुताबिक आने वाले दिनों में लोगों की जरूरतों के मुताबिक वह एजुकेशन, हेल्थ और खेजी से जुड़ी जानकारियों को लोगों तक पहुंचाएगी। यही नहीं गांवों में अपनी मजबूत पहुंच के साथ ही कंपनी शहरी क्षेत्रो में लघु उद्योगों को अपनी पहुंच और ग्रोथ को बढ़ाना चाहती है।

mukesh ambaniरिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के मुखिया मुकेश अंबानी

रिलायंस जियो की लॉन्चिंग के वक्त मुकेश अंबानी ने कहा था कि भविष्य में डेटा दुनिया में नया ऑयल बनेगा। मुकेश अंबानी का वह बयान अब साकार होता दिख रहा है। ऑयल और गैस के कारोबार में अहम दखल रखने वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड अब खुद को मुख्य तौर पर सॉफ्टवेयर प्लैटफॉर्म के तौर पर ढालने की तैयारी में है। कंपनी की ओर से 20 मई को 53,125 करोड़ रुपये का राइट्स इश्यू जारी किए जाने हैं। उससे पहले कंपरनी ने कहा कि वह मेड इन इंडिया, मेड फॉर इंडिया और मेड बाय इंडिया है। कंपनी का मानना है कि वह भारत की डिजिटल ग्रोथ के साथ कदम आगे बढ़ाएगी और खुद को तेल एवं गैस की मुख्य कंपनी के बजाय सॉफ्टवेयर फर्म के तौर पर ढालेगी।

कंपनी ने अपनी प्रजेंटेशन में कहा है कि टेक्नॉलजी बिजनेस में रिलायंस इंडस्ट्रीज की ग्रोथ फ्यूचर का प्लान होगा, जिस पर कंपनी को आगे बढ़ना है। दरअसल कंपनी भारत के ग्रामीण इलाकों में मोबाइल डेटा के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल में अपने लिए भी अहम अवसर देख रही है। जियो के मुताबिक आने वाले दिनों में लोगों की जरूरतों के मुताबिक वह एजुकेशन, हेल्थ और खेजी से जुड़ी जानकारियों को लोगों तक पहुंचाएगी। यही नहीं गांवों में अपनी मजबूत पहुंच के साथ ही कंपनी शहरी क्षेत्रो में लघु उद्योगों को अपनी पहुंच और ग्रोथ को बढ़ाना चाहती है।

4 सप्ताह में जियो को मिले 4 ग्लोबल फ्रेंड: बता दें कि रिलायंस जियो को बीते 4 सप्ताह में फेसबुक समेत चार विदेशी कंपनियों से 67,000 करोड़ रुपय़े का निवेश प्राप्त हुआ है। इसमें भी सबसे ज्यादा निवेश फेसबुक की ओर से 43000 करोड़ रुपये का हुआ है। फेसबुक ने रिलायंस जियो में 10 फीसदी हिस्सेदारी के लिए यह रकम अदा की है। इसके अलावा जनरल अटलांटिक ने 6,598 करोड़ रुपये का निवेश किया है। दरअसल फेसबुक और रिलायंस जियो की डील की बात करें तो वॉट्सऐप के जरिए मुकेश अंबानी जियो मार्ट को देश के 40 करोड़ लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं, जो वॉट्सऐप के यूजर्स हैं।

जानें, फेसबुक की है क्या रणनीति: इसके अलावा फेसबुक इस डील के जरिए भारत के मार्केट में अपनी पैठ को बढ़ाने की तैयारी में है। फेसबुक वॉट्सऐप पेमेंट सर्विस शुरू करना चाहता है, जिसे भारत सरकार से अब तक मंजूरी नहीं मिल सकी है। इसकी वजह यह है कि पूरी तरह से विदेशी कंपनी भारत में बैंकिंग या पेमेंट्स सेवाओं को शुरू नहीं कर सकती है। ऐसे में फेसबुक ने इस मार्केट में एंट्री के लिए रिलायंस जियो का सहारा लेने का फैसला लिया है।

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