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बंटवारे के बाद बढ़ता गया मुकेश अंबानी का रसूख, जानें कैसे बड़े भाई से पिछड़ते गए अनिल अंबानी

अनिल अंबानी को उस वक्त बड़ा झटका लगा, जब साल 2015 में रिलायंस की नेवल एंड इंजीनियरिंग लिमिटेड के शेयरों में जबरदस्त गिरावट देखने को मिली।

मुकेश अंबानी जहां दुनिया के टॉप बिजनेसमैन में गिने जाते हैं, वहीं अनिल अंबानी बुरे दौर से गुजर रहे हैं। (express photo)

देश के सबसे मशहूर उद्योगपतियों में शुमार धीरू भाई अंबानी का साल 2002 में निधन हो गया था। इसके बाद अंबानी परिवार में टूट की खबरें अखबारों की सुर्खियां बने थे। दरअसल धीरूभाई अंबानी अपने पीछे कोई वसीयत नहीं छोड़ गए थे, जिसके चलते अंबानी परिवार में बंटवारा हुआ। उस बंटवारे को कई साल का वक्त बीत चुका है और आज के हालात की बात करें तो मुकेश अंबानी जहां ना सिर्फ भारत बल्कि एशिया के सबसे अमीर बिजनेसमैन हैं और लगातार सफलता की सीढ़ियां चढ़ रहे हैं और उनकी संपत्ति 43.1 बिलियन डॉलर आंकी गई है। वहीं दूसरी तरफ अनिल अंबानी आज खराब दौर से गुजर रहे हैं और उनकी संपत्ति घटकर सिर्फ 1.5 बिलियन डॉलर रह गई है। ऐसे में ये सवाल उठना स्वभाविक है कि मुकेश अंबानी ने ऐसा क्या किया कि वह तेजी से ऊंचाईयों को छू रहे हैं। वहीं अनिल अंबानी का ग्राफ लगातार नीचे ही गिरता जा रहा है। इकॉनोमिक टाइम्स ने अपने एक लेख में दोनों भाईयों के करियर ग्राफ का एक विश्लेषण दिया है, जिसके आधार पर कुछ बातें निकलकर सामने आयी हैं। जो कि निम्न हैं।

मुकेश अंबानी की सफलता का कारण: अंबानी परिवार का जब बंटवारा हुआ तो मुकेश अंबानी के हिस्से में रिलायंस इंडस्ट्री के कमाई का मुख्य स्तंभ पेट्रोकेमिकल और ऑयल रिफाइनिंग का बिजनेस आया। हालांकि जिस वक्त मुकेश अंबानी के हिस्से में यह व्यवसाय आया, उस वक्त अन्तरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें 60 बैरल प्रति डॉलर तक पहुंच चुकी थी। ऐसे में आशंका थी कि पेट्रोकेमिकल बिजनेस में मार्जिन घट सकता है। लेकिन मुकेश अंबानी ने अपनी काबलियत से पेट्रोकेमिकल और रिफाइनरी बिजनेस को नई ऊंचाईयों पर पहुंचाया। हालात ये है कि रिलायंस की कुल कमाई का 90 प्रतिशत हिस्सा आज भी पेट्रोकेमिकल के बिजनेस से आता है। अभी हाल ही में मुकेश अंबानी ने जियो के रुप में टेलीकम्यूनिकेशन के क्षेत्र में प्रवेश किया है और अपनी आक्रामक रणनीति के दम पर यहां भी अपना वर्चस्व साबित कर दिया है। मुकेश अंबानी ने जियो में 34 बिलियन डॉलर का निवेश किया है और सिर्फ दो साल के वक्त में 2 करोड़ 70 लाख यूजर्स को अपने साथ जोड़ लिया है। मुकेश अंबानी ने भारत में इंटरनेट और मोबाइल फोन के बाजार को इतनी तेजी से बूम किया है कि सरकार की कैशलेस इकॉनोमी की परिकल्पना को पंख लगा दिए हैं। अब मुकेश अंबानी ई-कॉमर्स बाजार पर भी अपनी नजरें गड़ाए हुए हैं और जल्द ही इस दिशा में बड़ा ऐलान कर सकते हैं।

अनिल अंबानी के मुश्किल में फंसने का कारण!: बंटवारे में अनिल अंबानी के हिस्से में रिलायंस कम्यूनिकेशन, रिलायंस पॉवर जैसी इंडस्ट्री आयी थीं। भारत जैसे उभरते और बड़े बाजार में कम्यूनिकेशन और पॉवर काफी संभावनाओँ वाली इंडस्ट्री मानी जाती है। इसके बावजूद अनिल अंबानी उम्मीदों के अनुरुप इसका फायदा नहीं उठा सके। बता दें कि बंटवारे के वक्त दोनों भाईयों के बीच इस बात पर सहमति बनी थी कि दोनों एक दूसरे के व्यवसायों में प्रतिद्वंदिता पेश नहीं करेंगे। इसके चलते मुकेश अंबानी टेलीकम्यूनिकेशन के फील्ड से दूर ही रहे। लेकिन साल 2010 में बनी सहमति के बाद मुकेश अंबानी जियो के रुप में अब इस फील्ड में उतर आए हैं और उन्होंने इस बात की झलक दिखाई है कि कहीं ना कहीं अनिल अंबानी चूक गए।

अनिल अंबानी को उस वक्त बड़ा झटका लगा, जब साल 2015 में रिलायंस की नेवल एंड इंजीनियरिंग लिमिटेड के शेयरों में जबरदस्त गिरावट देखने को मिली। दरअसल अनिल अंबानी की योजना भारतीय रक्षा क्षेत्र का बड़ा खिलाड़ी बनने की थी, लेकिन रिलायंस नेवल एंड इंजीनियरिंग लिमिटेड के शेयरों में 75 प्रतिशत की गिरावट से उनकी यह योजना को बड़ा झटका लगा। अभी बीते दिनों भारत और फ्रांस के बीच हुई राफेल फाइटर जेट की डील में भी अनिल अंबानी की कंपनी को साझेदार बनाए जाने पर सवाल उठ रहे हैं। जिससे अनिल अंबानी की मुश्किलों में इजाफा ही हुआ है। अनिल अंबानी के स्वामित्व वाली रिलायंस पॉवर के शेयर भी गिरे। विशेषज्ञों का मानना है कि अनिल अंबानी ने कर्ज से छुटकारा पाने के लिए अपनी कई प्रॉपर्टी बेच दीं। इसका असर ये हुआ कि रिलायंस में शेयरधारकों का विश्वास डगमगा गया और इसका खामियाजा कंपनी को अपने शेयरों में गिरावट के रुप में भुगतना पड़ा। इसे अनिल अंबानी की बदकिस्मती ही कहेंगे कि जब उनकी कंपनी कर्ज के बोझ तले दबी थी, उसी वक्त कई बड़े लेनदार बैंकों का पैसा लेकर फरार हो गए। जिसके चलते बैंकों ने अपने कर्ज के लिए कंपनियों पर दबाव बढ़ा दिया और उद्योगपतियों पर कर्ज चुकाने के लिए अपनी प्रॉपर्टी बेचने का दबाव बढ़ गया। इससे भी अनिल अंबानी की परेशानियों में इजाफा हुआ।

बहरहाल अनिल अंबानी संकट से उबरने के लिए काफी कोशिश कर रहे हैं और रक्षा क्षेत्र के साथ ही इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में असीम संभावनाओं को देखते हुए इस तरफ अपना ध्यान आकर्षित कर रहे हैं।

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