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आरकॉम-एयरसेल में विलय की तैयारी, बनेगी दूसरी सबसे बड़ी मोबाइल कंपनी

अनिल अंबानी की अगुवाई वाली रिलायंस कम्युनिकेशंस (आरकॉम) मोबाइल अपने मोबाइल कारोबार का खुद से छोटी प्रतिद्वंद्वी कंपनी एयरसेल के साथ विलय करने के लिए बातचीत कर रही है..

Author नई दिल्ली | Updated: December 23, 2015 6:04 AM
रिलायंस कम्यूनिकेशन।

अनिल अंबानी की अगुवाई वाली रिलायंस कम्युनिकेशंस (आरकॉम) मोबाइल अपने मोबाइल कारोबार का खुद से छोटी प्रतिद्वंद्वी कंपनी एयरसेल के साथ विलय करने के लिए बातचीत कर रही है। इससे संख्या के हिसाब से देश की दूसरी सबसे बड़ी मोबाइल कंपनी अस्तित्व में आएगी। रिलायंस कम्युनिकेशंस ने कहा, ‘‘आरकॉम एयरसेल की बहुलांश हिस्सा रखने वाली मैक्सिस कम्युनिकेशंस तथा एक अन्य शेयरधारक सिंद्या सिक्योरिटीज एंड इन्वेस्टमेंट्स के साथ गैर बाध्यकारी लेकिन विशिष्ट बातचीत कर रही है। संभावित विलय पर विचार के लिये 90 दिन की विशिष्ट अवधि पर सहमति हुई है।’’

आरकॉम देश की चौथी सबसे बड़ी मोबाइल ऑपरेटर है और उसके ग्राहकों की संख्या 11 करोड़ है। इसी तरह एयरसेल पांचवीं सबसे बड़ी मोबाइल ऑपरेटर है जिसके ग्राहकों की संख्या 8.4 करोड़ है। आरकॉम इससे पहले सिस्तेमा श्याम टेलीसर्विसेज के भारतीय मोबाइल टेलीफोनी कारोबार के विलय की प्रक्रिया में है जो एमटीएस ब्रांड के तहत कारोबार करती है। इन दोनों विलय के बाद आरकाम के उपभोक्ताओं की संख्या लगभग दोगुना यानी 20 करोड़ हो जाएगी। सिस्तेमा के ग्राहकों की संख्या 83.6 लाख है।

अपने टावर व फाइबर आप्टिक ढांचागत परिसंपत्तियों पर कपंनी ने इसी महीने कहा था कि वह इनकी बिक्री के लिए निजी इक्विटी कंपनियों टिलमैन ग्लोबल होल्डिंग्स तथा टीजीजी एशिया इंक के साथ बात कर रही है। इन कारोबार की बिक्री जनवरी मध्य तक हो सकती है।

सूत्रों ने बताया कि आरकॉम के नेतृत्व में बनने वाली नई कंपनी के तहत – आरकॉम, एमटीएस और एयरसेल – इन तीनों के मोबाइल कारोबार का मिला कर परिचालन करने का प्रस्ताव है। नई कंपनी पूरी तरह से इक्विटी सौदे के जरिए तैयार की जाएगी जिसमें आरकॉम के शेयरधारकों को प्रत्येक शेयर पर नयी कंपनी के तीन शेयर मिलने की उम्मीद है।

सूत्रों ने बताया कि मोबाइल टावरों की बिक्री का सौदा पूरा होने के बाद आरकॉम का रिण 10,000 करोड़ रुपए से नीचे आ जाएगा। इस रिण को नई कंपनी को हस्तांतरित किया जाएगा। इस तरह कंपनी रिण मुक्त हो जाएगी। सूत्रों ने कहा, ‘‘आरकॉम ने अपने उपक्रम व्यवसाय पर ध्यान देने में रुचि जताई है। इस नये उपक्रम के ब्रांड और अन्य ब्योरे बाद में तय किए जाएंगे और इनका परिचालन आरकॉम, एयरसेल और एमटीएस के संसाधनों के उपयोग के जरिए किया जाएगा।’’

आरकॉम, एयरसेल और एमटीएस वायरलेस कारोबार के एक साथ होने से समूचे दूरसंचार उद्योग को मिले स्पेक्ट्रम का 19.3 प्रतिशत हिस्सा इनके पास होगा। यह किसी भी एक कंपनी को मिले स्पेक्ट्रम का सबसे बड़ा हिस्सा होगा। इन तीनों के विलय से बनने वाली नई कंपनी के पास सभी आवंटित बैंड में स्पेक्ट्रम होगा। यह 800 मेगाहर्ट्ज, 900 मेगाहर्ट्ज, 1800 मेगाहर्ट्ज, 2100 मेगाहर्ट्ज और 2300 मेगाहर्ट्ज में होगा जो कि 2जी, 3जी और 4जी सेवाओं के लिये उपयुक्त है।

गार्टनर रिसर्च के निदेशक अमरेश नंदन ने कहा, ‘‘एमटीएस और एयरसेल के विलय के बाद रिलायंस कम्युनिकेशंस एक बड़ी इकाई हो जाएगी जिसके उपभोक्ताओं की संख्या करीब 20 करोड़ होगी। इसके अलावा स्पेक्ट्रम के एकीकरण के बाद वह दीर्घावधि की कारोबारी रणनीति बना सकेगी।’’ उन्होंने कहा कि इससे आरकॉम मोबाइल ब्रॉडबैंड पर हाई एंड सेवाओं तथा कारोबार केंद्रित मोबिलिटी साल्यूशंस को लक्ष्य कर सकेगी।

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