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RBI पर नियंत्रण चाहते हैं PM नरेंद्र मोदी? सरकार ने रिजर्व बैंक को 3 चिट्ठी लिख सेक्‍शन-7 की दी थी धमकी

सरकार चाहती है कि आरबीआई कुछ बैंकों को कर्ज देने के मामले में उदारता दिखाए। आरबीआई के पास भुगतान सिस्टम के मामले में जो नियामक तंत्र है उसे सरकार शायद वापस लेना चाहती है।

सरकार चाहती है कि आरबीआई कुछ बैंकों को कर्ज देने के मामले में उदारता दिखाए।

देश की अर्थव्यवस्था को चलाने का बड़ा जिम्मा भारतीय रिजर्व बैंक पर भी है। आरबीआई सांविधिक रूप से स्वतंत्र नहीं है, क्योंकि गवर्नर सरकार द्वारा नियुक्त किया जाता है, लेकिन बैंकिंग क्षेत्र को विनियमित करने में व्यापक स्वायत्तता है। भारत के आर्थिक विकास के उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए मुद्रास्फीति को 2 से 6 फीसदी के भीतर नियंत्रित करना जरूरी है। क्या पीएम मोदी के नेतृत्व वाली सरकार आरबीआई पर नियंत्रण चाह रही है? दरअसल केंद्र सरकार आरबीआई के रिजर्व से राजकोषीय घाटे को निधि में मदद करने के लिए बार-बार कॉल कर रही है। सरकार आरबीआई के 3.6 ट्रिलियन रुपये (48.73 अरब डॉलर) के पूंजीगत भंडार का शेयर को भी चाहती है। आरबीआई लगातार इस मांग के खिलाफ है। सरकार चाहती है कि आरबीआई बैंकिंग क्षेत्र को और अधिक ढील दे, जिससे कि प्रमुख वित्त पोषण कंपनी, इंफ्रास्ट्रक्चर लीजिंग एंड फाइनेंशियल सर्विसेज (आईएल एंड एफएस) से पीड़ित हैं उनकी हालत ठीक हो सके।

वित्त मंत्रालय आरबीआई को तीन पत्र भेज चुका है जिसमें आरबीआई कानून की धारा-7 को लागू करने की धमकी दे चुका है। बता दें कि अधिनियम की धारा सात के तहत केंद्र सरकार को यह विशेषाधिकार मिलता है कि वह सार्वजनिक हित के किसी भी मुद्दे पर रिजर्व बैंक को सीधे निर्देश दे सकती है। इस प्रक्रिया के दो चरण होते हैं। पहले चरण में सरकार रिजर्व बैंक के साथ मंत्रणा करती है और दूसरे चरण में निर्देश देती है। हालांकि, केंद्र सरकार ने आज तक रिजर्व बैंक कानून की इस धारा का कभी इस्तेमाल नहीं किया। एसोसिएशन के मुताबिक, सरकार के ऊपर एनपीए का बड़ा बोझ आ पड़ा है। पिछले चार साल में एनपीए तीन-चार गुना से ज्यादा हो गया है। मौजूदा समय में एनपीए करीब 12 लाख करोड़ रुपए है।

न्यूज एजेंसी के मुताबिक एक सरकारी अधिकारी ने कहा कि सरकार आरबीआई की स्वायत्तता का सम्मान करती है, लेकिन उसे भी अपनी ज़िम्मेदारी समझनी होगी। सरकार चाहती है कि आरबीआई कुछ बैंकों को कर्ज देने के मामले में उदारता दिखाए। आरबीआई के पास भुगतान सिस्टम के मामले में जो नियामक तंत्र है उसे सरकार शायद वापस लेना चाहती है। आरबीआई ने ऐसे 11 बैंकों को चिह्नित किया है जिनका एनपीए बहुत बढ़ गया है। इन बैंकों को आरबीआई ने कर्ज देने पर भी पाबंदी लगा दी है।

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