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त्योहारों की दस्तक के साथ ही रिजर्व बैंक का ‘तोहफा’

आखिर रिजर्व बैंक ने बाजार को सुखद आश्चर्य में डालते हुए अपनी नीतिगत ब्याज दर (रेपो) में उम्मीद से ज्यादा 0.5 फीसद की कटौती कर दी। उसके इस कदम से त्योहारों का मौसम के शुरू होते ही आवास, वाहन और उद्योगों के कर्ज पर ब्याज दरें कम होने की संभावना मजबूत हुई है क्योंकि केंद्रीय बैंक की घोषणा के तुरंत बाद बैंकों ने कर्ज सस्ता करना शुरू कर दिया है।

नीतिगत दर 0.50 फीसद घटाई, मकान और वाहन कर्ज सस्ते होंगे (फोटो: प्रशांत नाडकर)

आखिर रिजर्व बैंक ने बाजार को सुखद आश्चर्य में डालते हुए अपनी नीतिगत ब्याज दर (रेपो) में उम्मीद से ज्यादा 0.5 फीसद की कटौती कर दी। उसके इस कदम से त्योहारों का मौसम के शुरू होते ही आवास, वाहन और उद्योगों के कर्ज पर ब्याज दरें कम होने की संभावना मजबूत हुई है क्योंकि केंद्रीय बैंक की घोषणा के तुरंत बाद बैंकों ने कर्ज सस्ता करना शुरू कर दिया है।

देश का सबसे बड़ा वाणिज्यिक बैंक भारतीय स्टेट बैंक अपनी आधार ब्याज दर 0.4 फीसद कम कर नीतिगत दर में कमी का लाभ ग्राहकों तक पहुंचाने वाले कुछ पहले बैंकों में शामिल हो गया है। सार्वजनिक क्षेत्र के आंध्र बैंक ने सबसे पहले ब्याज दरों में 0.25 फीसद कटौती की घोषणा की है। निजी क्षेत्र के प्रमुख बैंकों आइसीआइसीआइ बैंक और एक्सिस बैंक ने भी ब्याज दरों में कमी लाने का संकेत दिया है। अर्थव्यवस्था में मांग बढ़ाने और धीमी पड़ती वृद्धि को तेज करने के लिए सरकार और उद्योगों की तरफ से लगातार ब्याज दरों में कमी की मांग की जा रही थी।

रिजर्व बैंक गवर्नर रघुराम राजन ने कैलेंडर वर्ष 2015 में चौथी बार रेपो दर में कटौती की है। रेपो दर में आधा फीसद की कटौती पिछले साढेÞ तीन साल में सबसे बड़ी कटौती है। मुद्रास्फीति में लगातार गिरावट, कच्चे तेल के दाम सहित अनुकूल वैश्विक परिस्थितियों के बीच यह कदम उठाया गया है। रिजर्व बैंक के इस कदम से कर्ज लेने वालों को तो फायदा होगा लेकिन इससे जमा दरों में भी कमी आएगी। सरकार ने कहा है कि वह लघु जमा बचत योजनाओं पर ब्याज दरों की समीक्षा करेगी। पीपीएफ और डाकघर जमा योजनाओं की ब्याज दरों को भी बाजार के अनुरूप किया जाएगा।

रिजर्व बैंक की मंगलवार को जारी चालू वित्त वर्ष की चौथी द्वैमासिक मौद्रिक समीक्षा में रेपो को 0.50 फीसद घटाकर 6.75 फीसद कर दिया गया। इसके साथ ही रिवर्स रेपो दर घटकर 5.75 फीसद और सीमांत स्थाई सुविधा (एमएसएफ) दर 7.75 फीसद पर समायोजित होगी।

बैंकों के नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) और सांविधिक तरलता अनुपात (एसएलआर) में कोई बदलाव नहीं किया गया है। सीआरआर इस समय 4 फीसद और एसएलआर 21.5 फीसद है। राजन ने कहा कि अब मुद्रास्फीति को मार्च 2017 तक 5 फीसद के आसपास लाने पर ध्यान दिया जाएगा। राजन ने कहा कि रिजर्व बैंक मौद्रिक नीति समायोजन के संकेतों के प्रति सजग रहेगा क्योंकि यह मुद्रास्फीति को नीचे बनाए रखने के लिए जरूरी है। बहरहाल रिजर्व बैंक ने चालू वित्त वर्ष के लिए आर्थिक वृद्धि के अपने अनुमान को 7.6 फीसद से घटाकर 7.4 फीसद कर दिया है।

सरकार और उद्योगों ने रिजर्व बैंक के इस कदम का स्वागत किया है और बैंकों से इसका लाभ कर्ज लेने वालों को देने को कहा है, ताकि देश में निवेश और आर्थिक वृद्धि को बढ़ाया जा सके। उधर रिजर्व बैंक की मौद्रिक समीक्षा की घोषणा पर त्वरित कदम उठाते हुए स्टेट बैंक ने अपनी आधार दर 0.4 फीसद घटाकर 9.3 फीसद कर दी। इससे निम्न ब्याज दरों की दिशा में पहल और तेज हो गई। स्टेट बैंक की चेयरपर्सन अरुंधति भट्टाचार्य ने इस फैसले की घोषणा करते हुए कहा कि बैंक विभिन्न परिपक्वता अवधि की सावधि जमाओं पर भी ब्याज दर में 0.25 फीसद कटौती करेगा।

आइसीआइसीआइ बैंक की सीईओ चंदा कोछड़ ने कहा कि स्पष्ट तौर पर ब्याज दरें कम होंगी, आधार दर कम होगी। कटौती के बड़े हिस्से का लाभ आगे दिया जाएगा। जब मैं बड़े हिस्से की बात करती हूं तो इसका मतलब (रेपो दर कटौती का) आधे से ज्यादा होना चाहिए। रिजर्व बैंक इससे पहले जनवरी, मार्च और जून 2015 में तीन बार रेपो दर में 0.25 फीसद कटौती कर चुका है। मंगलवार को 0.50 फीसद कटौती वर्ष की चौथी कटौती है। कुल मिलाकर अब तक 1.25 फीसद कटौती हो चुकी है। इससे पहले अप्रैल 2012 में आधा फीसद कटौती की गई थी।

एक्सिस बैंक की प्रमुख शिखा शर्मा ने कहा कि पहले की गई 0.75 फीसद कटौती में से करीब आधे का लाभ कर्ज लेने वालों को दिया जा चुका है। इस आधे का लाभ भी जल्द दिया जाएगा। सरकार की लघु बचत योजनाओं पर 8.7 से लेकर 9.3 फीसद तक ब्याज है। इसे देखते हुए बैंक रिजर्व बैंक की कटौती का पूरा लाभ ग्राहकों तक पहुंचाने में हिचकिचा रहे हैं। वे अपनी जमा दरों को सरकारी बचत योजनाओं के करीब रखना चाहते हैं।

हालांकि आर्थिक मामलों के सचिव शक्तिकांत दास ने कहा है कि यह फैसला भी किया गया है कि सरकार लघु बचत योजनाओं पर ब्याज दर की समीक्षा करेगी। सचिव ने कहा कि सरकार लघु बचत योजनाओं के सभी पहलुओं की समीक्षा करेगी।

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