RBI Monetary Policy Committee Meeting 2026: भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बुधवार को मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक के बाद रेपो दर का ऐलान कर दिया है। केंद्रीय बैंक ने नीतिगत दर को 5.25 प्रतिशत पर यथावत रखने का फैसला किया और अपने रुख को ‘तटस्थ’ बनाए रखा, जिससे संकेत मिलता है कि फिलहाल ब्याज दरों में तुरंत बदलाव की संभावना कम है।

रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं

आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने छह-सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (MPC) की 6 अप्रैल से शुरू तीन-दिवसीय बैठक में लिए गए इन निर्णयों की जानकारी देते हुए कहा, ”एमपीसी ने आम सहमति से रेपो दर को 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रखने का निर्णय किया है।” इसके साथ ही एमपीसी ने मौद्रिक नीति के मामले में ‘तटस्थ’ रुख को बनाये रखा है। इसका मतलब है कि केंद्रीय बैंक आर्थिक स्थिति के हिसाब से नीतिगत दर में समायोजन को लेकर लचीला बना रहेगा।

केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान को बढ़ाकर 7.6 प्रतिशत कर दिया है। वहीं चालू वित्त वर्ष 2026-27 में इसके 6.9 प्रतिशत रहने की संभावना जतायी गयी है। चालू वित्त वर्ष के लिए खुदरा महंगाई 4.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है।

फरवरी 2025 से अब तक 125 बेसिस पॉइंट की कटौती

आरबीआई फरवरी 2025 से अब तक नीतिगत रेपो दर में कुल 125 बेसिस पॉइंट की कटौती कर चुका है। रेपो दर में यह कमी अलग-अलग मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठकों में चरणबद्ध तरीके से की गई।

वित्त वर्ष 2027 के लिए महंगाई का अनुमान

  • वित्त वर्ष 2027: 4.6%
  • वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही: 4%
  • वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही: 4.4%
  • वित्त वर्ष 2027 की तीसरी तिमाही: 5.2%
  • वित्त वर्ष 2027 की चौथी तिमाही: 4.7%

वित्त वर्ष 2027 के लिए जीडीपी का अनुमान

वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही: 6.8% बनाम पहले का 6.9%
वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही: 6.7% बनाम 7.0% (पहले की वृद्धि दर)
वित्त वर्ष 2027 की तीसरी तिमाही: 7%
वित्त वर्ष 2027 की चौथी तिमाही: 7.2%

क्या है रेपो रेट?

रेपो रेट (Repo Rate) वह ब्याज दर होती है जिस पर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) जरूरत पड़ने पर बैंकों को अल्पकाल के लिए लोन देता है। अगर हम इसे आसान भाषा में समझें तो जब किसी बैंक को पैसों की कमी होती है, तो वह RBI से उधार लेता है। केंद्रीय बैंक जिस ब्याज दर पर यह पैसा देता है, उसी को रेपो रेट कहा जाता है।

आम लोगों पर कैसे पड़ता है इसका असर?

अगर रेपो रेट बढ़ता है तो फिर बैंकों के लिए पैसा महंगा होगा। जिससे होम लोन, कार लोन आदि महंगे हो सकते हैं। वही, रेपो रेट घटेगा तो बैंकों के लिए पैसा सस्ता होगा। जिससे लोन सस्ते हो सकते हैं।

रेपो रेट 5.25% पर बनाए रखना सही और संतुलित फैसला

भारतीय युवा शक्ति ट्रस्ट के फाउंडिंग और मैनेजिंग ट्रस्टी लक्ष्मी वेंकटरमण वेंकटेशन ने कहा, ‘RBI ने रेपो रेट को 5.25% पर बिना किसी बदलाव के बनाए रखने और पॉलिसी के रुख को ‘न्यूट्रल’ रखने का फैसला किया है। यह उन छोटे उद्यमियों को स्थिरता और अनुमान लगाने की क्षमता देता है जो बाजार की अनिश्चित स्थितियों का सामना कर रहे हैं। हालांकि, अगर रेट में और कटौती होती तो इससे गति और तेज हो जाती, लेकिन पिछले 14-16 महीनों में कुल मिलाकर लगभग 1.25% की ढील MSME सेक्टर को लगातार सहारा दे रही है। उन छोटे व्यवसायों के लिए जो 8-10% जितने कम मार्जिन पर काम करते हैं, उधार लेने की लागत में निश्चितता उतनी ही जरूरी है जितनी कि उसमें कमी।

स्थिर रेट का माहौल उद्यमियों को अपने कैश फ़्लो की योजना बनाने, इन्वेंट्री चक्रों को संभालने और विस्तार के बारे में सोच-समझकर फ़ैसले लेने में मदद करता है। RBI का आज का यह कदम समझदारी भरा है, क्योंकि यह मौजूदा वैश्विक बाहरी स्थितियों के अनुरूप है और साथ ही यह भी सुनिश्चित करता है कि अर्थव्यवस्था की विकास गति बनी रहे।’

प्रतीक ग्रुप के मैनेजिंग डायरेक्टर प्रतीक तिवारी का कहा, ‘RBI का रेपो रेट 5.25% पर बनाए रखना सही और संतुलित फैसला है, खासकर जब दुनिया में आर्थिक अनिश्चितता बनी हुई है। इससे घर खरीदने वालों का भरोसा बढ़ता है और होम लोन की शर्तें स्थिर रहती हैं। पहली बार घर खरीदने वाले और अपने रहने के लिए घर लेने वाले लोगों के लिए यह बहुत अहम है। अगर रेट कम होता तो लोन सस्ता हो सकता था, लेकिन अभी रेट स्थिर रहने से बैंकों और ग्राहकों दोनों को साफ समझ मिलती है और पहले लिए गए फैसलों का पूरा फायदा मिल पाता है।’

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