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RBI Monetary Policy 2017: रेपो रेट जारी, आरबीआई ने नहीं घटाई ब्याज दरें

RBI Monetary Policy December 2017 Repo Rate: रिजर्व बैंक के मुताबिक वित्त वर्ष 2018 में देश की जीडीपी 6.7 प्रतिशत की दर से बढ़ सकती है।

भारतीय रिजर्व बैंक (फोटो सोर्सः इंडियन एक्सप्रेस)

RBI Monetary Policy December 2017: भारतीय रिजर्व बैंक की मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी ने नीतिगत दरों में कोई बदलाव नहीं किया है। फिलहाल रेपो रेट 6 फीसदी पर स्थिर है। आरबीआई ने जीडीपी ग्रोथ की अनुमानित दर का अपना पिछला अनुमान 6.7% ही कायम रखा। रिजर्व बैंक के मुताबिक वित्त वर्ष 2018 में देश की जीडीपी 6.7 प्रतिशत की दर से बढ़ सकती है। रिजर्व बैंक ने तीसरी तिमाही में महंगाई दर 4.3 से 4.7 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है। रिवर्स रेपो रेट भी 5.75 प्रतिशत जबकि सीआरआर 4 प्रतिशत और एसएलआर 19.5% पर कायम रखा है। समिति में शामिल प्रॉफेसर रविंद्र ढोलकिया ने इस बार भी 0.25 प्रतिशत की कटौती की वकालत की, लेकिन बाकी 5 सदस्यों ने कटौती पर सहमति व्यक्त नहीं की। रिजर्व बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल ने कहा है कि बैंक अकाउंट को आधार से लिंक करने का काम इस साल के आखिर तक खत्म कर लिया जाएगा। पीओएस का उपयोग काफी बढ़ गया है।

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अगस्त में घटी थी ब्याज दरें
रिजर्व बैंक ने 2 अगस्‍त को हुई मॉनीटरी पॉलिसी कमेटी की बैठक में रेपो रेट 0.25 फीसदी कम किया गया था। इस कटौती के बाद रेपो रेट 6 फीसदी पर आ गया था। इसके बाद रिजर्व बैंक ने अक्‍टूबर में हुई एमपीसी की मीटिंग में पॉलिसी रेट में कोई बदलाव नहीं किया था। इसके लिए रिजर्व बैंक ने महंगाई बढ़ने का हवाला दिया था।

अगर रिजर्व बैंक ब्याज दरें कम करता है तो आम आदमी, बिजनेस मैन से लेकर इंडस्ट्री सबको फायदा मिलता है। आम लोगों के लिए पर्सनल लोन, होम लोन, कार लोन और बिजनेस लोन सस्‍ता होगा वहीं इकोनॉमिक एक्टिविटी बढ़ने से मांग बढेंगी और इंडस्‍ट्री को भी इसका फायदा मिलेगा। इसके अलावा इंडस्‍ट्री को भी कम लागत में फंड मिलेगा।

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