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RBI ने रेपो रेट में नहीं किया बदलाव लेकिन SLR में 0.5 प्रतिशत की कटौती, GDP वृद्धि का अनुमान भी घटाया

रिजर्व बैंक ने आम धारणा के मुताबिक प्रमुख नीतिगत दर में आज कोई बदलाव नहीं किया लेकिन राज्यों के बीच कृषि रिण माफी को लेकर जारी होड़ को देखते हुये राजकोषीय स्थिति बिगड़ने को लेकर चिंता जरूर जतायी।

Author मुंबई | June 7, 2017 8:23 PM
रिजर्व़ बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल (File Photo)

रिजर्व बैंक ने आम धारणा के मुताबिक प्रमुख नीतिगत दर में आज कोई बदलाव नहीं किया लेकिन राज्यों के बीच कृषि ऋण माफी को लेकर जारी होड़ को देखते हुये राजकोषीय स्थिति बिगड़ने को लेकर चिंता जरूर जतायी। केंद्रीय बैंक ने मौद्रिक नीति की द्वैमासिक समीक्षा में सांविधिक तरलता अनुपात (एसएलआर) 0.5 प्रतिशत घटाकर 20 प्रतिशत कर दिया। एसएलआर के तहत बैंकों को निर्धारित हिस्सा सरकारी प्रतिभूतियों में लगाना होता है। शीर्ष बैंक के इस कदम से बैंकों के पास कर्ज देने के लिये अधिक नकदी बचेगी।

रिजर्व बैंक ने चालू वित्त वर्ष के लिये आर्थिक वृद्धि के अनुमान को भी 7.4 प्रतिशत से घटाकर 7.3 प्रतिशत कर दिया है।  मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की यहां हुई पांचवीं बैठक में रेपो दर को 6.25 प्रतिशत तथा रिवर्स रेपो को 6 प्रतिशत पर बरकरार रखा गया। रेपो दर वह दर है जिस पर केंद्रीय बैंक बैंकों को अल्पावधि कर्ज देता जबकि रिवर्स रेपो के अंतर्गत आरबीआई बैंकों से अतिरिक्त नकदी को लेता है। रिजर्व बैंक ने वित्त वर्ष 2017-18 की दूसरी द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा में कहा, ‘‘एमपीसी का निर्णय मौद्रिक नीति के तटस्थ रूख के अनुरूप है। साथ ही यह कदम वृद्धि को समर्थन देने तथा मध्यम अवधि में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक :सीपीआई: मुद्रास्फीति के 2 प्रतिशत घट-बढ़ के साथ 4 प्रतिशत पर रखने के लक्ष्य के मुताबिक है।

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वहीं भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा अपनी आगामी मौद्रिक नीति समीक्षा में ब्याज दरों में कटौती की सिफारिश करते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि इस कटौती के लिए बिल्कुल सही समय है क्योंकि मुद्रास्फीति नियंत्रण में है और मॉनसून का पूर्वानुमान भी अच्छा है। जेटली ने सीएनबीसी टीवी 18 से कहा, लंबे समय से मुद्रास्फीति नियंत्रण में है। मॉनसून अच्छा होने की संभावना है। पेट्रोल और शेल गैस के बीच संतुलन को दर्शाता है कि तेल की कीमतें अधिक नहीं बढ़ेंगी। विकास और निवेश में बढ़ोतरी की जरूरत है। इन परिस्थितियों में कोई भी वित्त मंत्री चाहेगा कि दरों में कटौती हो।

रिजर्व बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल की अध्यक्षता वाली छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) प्रमुख ब्याज दरों पर निर्णय लेने के लिए 6-7 जून को बैठक करेगी। उन्होंने कहा, “लेकिन, हमें एमपीसी के निर्णय का इंतजार करना चाहिए। एमपीसी प्रयोग का यह पहला साल है। जेटली ने कहा कि सरकार का जोर निजी निवेश और बैंकिंग क्षेत्र के पुनरुत्थान पर है। तीन-चार साल की मंदी के बाद दुनिया में अर्थव्यवस्था के विकास का सकारात्मक संदेश मिल रहा है। उन्होंने कहा कि बैंकों द्वारा अतीत में अंधाधुंध उधार दिए जाने से फंसे हुए कर्ज की समस्या बढ़ी है।

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