भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने गुरुवार को टाटा संस को अपर-लेयर नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC-UL) की सूची में शामिल कर लिया है। हालांकि, केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट किया है कि इस फैसले का टाटा संस की NBFC पंजीकरण (डी-रजिस्ट्रेशन) रद्द करने की लंबित अर्जी पर कोई असर नहीं पड़ेगा। RBI ने कहा कि कंपनी के आवेदन की समीक्षा अभी जारी है।

अन्य 16 बड़ी कंपनियां भी लिस्ट में शामिल

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, आरबीआई ने गुरुवार को वित्त वर्ष 2026-27 के लिए टाटा संस समेत 17 बड़ी नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (NBFCs) की अपर-लेयर सूची जारी की।

इस सूची में टाटा संस के अलावा बजाज फाइनेंस, श्रीराम फाइनेंस, टाटा कैपिटल समेत कई प्रमुख NBFCs को शामिल किया गया है।

चार सरकारी एनबीएफसी भी सूची में

आरबीआई की ओर से जारी अपर-लेयर एनबीएफसी की सूची में चार सरकारी कंपनियां भी शामिल हैं। इनमें शामिल हैं:

– एनबीएफसी
– पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन (पीएफसी)
– इंडियन रेलवे फाइनेंस कॉरपोरेशन (आईआरएफसी)
– हाउसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (हु़डको)

इसके अलावा बजाज फाइनेंस लिमिटेड, श्रीराम फाइनेंस और टाटा कैपिटल जैसी निजी क्षेत्र की बड़ी एनबीएफसी भी इस सूची का हिस्सा हैं।

क्या होता है अपर-लेयर एनबीएफसी?

आरबीआई के ‘स्केल बेस्ड रेगुलेशन’ फ्रेमवर्क के तहत NBFCs को चार श्रेणियों में बांटा गया है-

– बेस लेयर (NBFC-BL)
– मिडिल लेयर (NBFC-ML)
– अपर लेयर (NBFC-UL)
– टॉप लेयर (NBFC-TL)

अपर-लेयर में उन बड़ी और प्रणालीगत रूप से महत्वपूर्ण NBFCs को रखा जाता है, जिनकी गतिविधियों का वित्तीय प्रणाली पर अधिक प्रभाव पड़ सकता है। इन कंपनियों पर सामान्य NBFCs की तुलना में अधिक सख्त नियामकीय नियम लागू होते हैं।

अपर-लेयर NBFCs पर क्या नियम लागू होते हैं?

RBI के नियमों के अनुसार, अपर-लेयर श्रेणी में शामिल NBFCs को कम से कम पांच वर्षों तक कड़े नियामकीय मानकों का पालन करना होता है। इसके अलावा, ऐसी कंपनियों को पहचान किए जाने के तीन वर्षों के भीतर अपने शेयरों को किसी मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंज पर सूचीबद्ध (लिस्ट) कराना होता है।

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एअर इंडिया ने अपने नए मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) और प्रबंध निदेशक (MD) के रूप में Ethiopian Airlines के पूर्व प्रमुख टेवोल्डे गेब्रेमारियम की नियुक्ति की है।

एअर इंडिया के मुताबिक, यह नियुक्ति दुनिया भर में उम्मीदवारों की तलाश के बाद की गई है। इसके लिए बोर्ड की एक विशेष समिति बनाई गई थी, जिसने कंपनी के अंदर और बाहर दोनों तरह के उम्मीदवारों का मूल्यांकन किया। यहां पढ़ें पूरी खबर…