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रिज़र्व बैंक मौद्रिक नीति समीक्षा में अपना सकता है देखो और इंतज़ार करो का रुख़

चार अक्तूबर को होने वाली मौद्रिक नीति समीक्षा छह सदस्यीय एमपीसी के साथ-साथ गवर्नर उर्जित पटेल की पहली समीक्षा है।
Author मुंबई | October 2, 2016 16:15 pm
रिजर्व बैंक गवर्नर उर्जित पटेल।(फाइल फोटो)

हाल में गठित रिजर्व बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल की अध्यक्षता वाली मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) मंगलवार (4 अक्टूबर) को अपनी पहली मौद्रिक नीति समीक्षा में नीतिगत दर के मामले में यथास्थिति बनाये रख सकती है। समिति को मुद्रास्फीति से जुड़े और आंकड़ों का अभी इंतजार है। यह बात विशेषज्ञों ने कही है। चार अक्तूबर को होने वाली मौद्रिक नीति समीक्षा छह सदस्यीय एमपीसी के साथ-साथ गवर्नर पटेल की पहली समीक्षा है। बैंक ऑफ महाराष्ट्र के प्रबंध निदेशक तथा मुख्य कार्यपालक अधिकारी आर पी मराठे ने पीटीआई भाषा से कहा, ‘मुझे नहीं लगता कि रिजर्व बैंक नीतिगत दर में बदलाव करने जा रहा है क्योंकि थोक मूल्य सूचकांक और खुदरा मूल्य सूचकांक आधारित दोनों मुद्रास्फीति बहुत नरम नहीं हुई हैं।’

खुदरा मुद्रास्फीति अगस्त में पांच महीने के निम्न स्तर 5.05 प्रतिशत पर आ गयी लेकिन थोक मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई दर दो साल के उच्च स्तर 3.74 प्रतिशत रही। अगस्त में गिरावट से पहले दोनों खुदरा एवं थोक कीमत सूचकांक आधारित महंगाई दरों में लगातार वृद्धि हो रही थी। सरकार ने अगस्त में रिजर्व बैंक के साथ मौद्रिक नीति मसौदा समझौते के तहत अगले पांच साल के लिए दो प्रतिशत घट-बढ़ के साथ चार प्रतिशत महंगाई दर का लक्ष्य रखा। वह पटेल ही हैं जिन्होंने रिजर्व बैंक के लिए मुद्रास्फीति पर जोर देने की बातों पर बल दिया। उस समय वह पूर्व गवर्नर रघुराम राजन के डिप्टी थे। ऐसे में विश्लेषकों का कहना है कि इसकी संभावना कम ही है कि वह खासकर लक्षित मुद्रास्फीति के मसौदे के तहत कीमत वृद्धि को लेकर अपने रुख में कोई बदलाव लाएंगे।

यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक अरुण तिवारी ने कहा, ‘इसकी संभावना कम ही है कि रिजर्व बैंक इस समय नीतिगत दर में कटौती करे।’ नए गवर्नर से नीतिगत दर को लेकर उम्मीद के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, ‘पटेल गैर-निष्पादित परिसंपत्ति के समाधान से जुड़े कुछ और उपायों की घोषणा कर सकते हैं।’ रेटिंग एजेंसी क्रिसिल का भी मानना है कि मंगलवार को मौद्रिक नीति समीक्षा में नीतिगत दर में कोई कटौती नहीं होगी। उसके अनुसार, ‘रिजर्व बैंक कदम उठाने से पहले कुछ और समय इंतजार कर सकता है क्योंकि आने वाले समय में मुद्रास्फीति प्रवृत्ति बढ़ सकती है।’

क्रिसिल ने हाल में एक नोट में कहा कि उच्च प्रोटीन की वस्तुओं में मुद्रास्फीति लगातार 14 महीने दहाई अंक में रही है, इससे मुद्रास्फीति के बढ़ने का जोखिम है। इसके अलावा खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में सेवा क्षेत्र की मुद्रास्फीति से मुख्य मुद्रास्फीति (कोर इनफ्लेशन) ऊंची बनी हुई है। एक अन्य रेटिंग एजेंसी इंडिया रेटिंग्स ने कहा कि अगस्त में खुदरा मुद्रास्फीति में तीव्र गिरावट से नीतिगत दर में कटौती की उम्मीद बंधी है लेकिन रिजर्व बैंक का मार्च 2017 तक महंगाई दर को 5.0 प्रतिशत पर लाने का लक्ष्य है। एजेंसी ने कहा, ‘साथ ही पूर्व में खुदरा मुद्रास्फीति के रुख को देखते हुए अभी कुछ अनुमान लगाना जल्दबाजी होगी, मुद्रास्फीति मोर्चे पर खासकर खाद्य मुद्रास्फीति के मामले में लड़ाई अभी समाप्त नहीं हुई है।।’

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