नोटबंदी के पांच साल बाद फिर लोगों के हाथ में लौटा कैश, मार्केट में नकदी रिकॉर्ड स्तर पर

पिछले साल कोरोना महामारी की वजह से लॉकडाउन लगाए जाने के बाद से ही लोगों के पास नकदी बढ़ने लगी। क्योंकि लोगों ने लॉकडाउन की वजह से नकदी जमा करना शुरू कर दिया ताकि उन्हें अपने जरूरत के सामान को खरीदने के लिए परेशानी का सामना न करना पड़े।

तस्वीर का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है। (फोटोः एएनआई)

नोटबंदी को पांच साल पूरे हो चुके हैं। इसके बाद लोगों के बीच नकदी का चलन घटा था और डिजिटल ट्रांजेक्शन बढ़ने लगे थे। लेकिन इस साल त्योहारी समय में बाजार में नकदी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुकी है। पिछले महीने की 8 तारीख को समाप्त हुए पखवाड़े पर नकदी 28.30 लाख करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर रही जो 2016 में हुए नोटबंदी से भी करीब 57.48 प्रतिशत तक बढ़ गई। 8 नवंबर 2016 को हुए नोटबंदी से चार दिन पहले नकदी का स्तर 17.97 लाख करोड़ पर था।

नोटबंदी के बाद बाजार की नकदी में कमी आई थी। 25 नवंबर 2016 को नकदी का स्तर 9.11 लाख करोड़ पर था। रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार 23 अक्टूबर 2020 को समाप्त हुए पखवाड़े तक जनता के पास नकदी में करीब 15,582 करोड़ नकदी की वृद्धि हुई। साल दर साल इसमें करीब 8.5 प्रतिशत और 2.21 लाख करोड़ की बढ़ोतरी हुई। 

8 नवंबर 2016 को नोटबंदी किए जाने के बाद बाजार में चल रहे 500 और 1,000 रुपये के नोट को वापस ले लिया गया था। उस दौरान बाजार में कुल 17.97 लाख करोड़ नकद चल रहे थे। लेकिन अगले साल जनवरी 2017 में नकदी सबसे कम स्तर पर आ गया था और यह घटकर 7.8 लाख करोड़ रुपए रह गया था। लेकिन अब फिर से नकदी तेजी से बढ़ने लगी है। डिजिटल भुगतान और कई जगहों पर कैश के उपयोग पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद भी नकदी बढ़ रही है।

पिछले साल कोरोना महामारी की वजह से लॉकडाउन लगाए जाने के बाद से ही लोगों के पास नकदी बढ़ने लगी। क्योंकि लोगों ने लॉकडाउन की वजह से नकदी जमा करना शुरू कर दिया ताकि उन्हें अपने जरूरत के सामान को खरीदने के लिए परेशानी का सामना न करना पड़े। इन्हीं वजहों से नकदी का स्तर काफी तेजी से बढ़ा।

भारतीय रिजर्व बैंक के अनुसार जनता के पास मुद्रा की गणना कुल सर्कुलेशन से बैंकों के पास मौजूद कैश की कटौती के बाद की जाती है। सर्कुलेशन का मतलब देश के भीतर चल रहे नकद या मुद्रा से है जो किसी भी तरह के लेनदेन के दौरान किया जाता है। हालांकि मुद्रा के बढ़ते सर्कुलेशन को लेकर विशेषज्ञ कहते हैं कि इसके बढ़ने वास्तविक स्थिति का पता नहीं चलता है। बल्कि करेंसी और जीडीपी के अनुपात पर ध्यान देने की जरूरत है जो नोटबंदी के बाद कम हो गई थी।

पिछले वित्त वर्ष में कैश और जीडीपी का अनुपात करीब 10 से 12 प्रतिशत तक था। लेकिन वित्त वर्ष 2025 में इसके 14 प्रतिशत तक बढ़ने की उम्मीद है। पिछले कुछ सालों में डिजिटल पेमेंट का प्रचलन बढ़ने के बाद भी यह अनुपात भी तेजी से बढ़ रहा है।

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