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रतन टाटा से कोर्ट में हार चुके हैं साइरस मिस्त्री, दोनों में है ये पारिवारिक रिश्ता

पलोनजी शापूरजी की बेटी अल्‍लू की शादी नोएल टाटा से हुई है, जो रतन टाटा के सौतेले भाई हैं।

cyrus mistry,ratan tataरतन टाटा और साइरस मिस्त्री के बीच पारिवारिक रिश्ता भी है (Photo-Indian Express )

बीते मार्च महीने में कारोबार जगत के लिहाज से सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाया। इस फैसले के साथ ही रतन टाटा के टाटा ग्रुप और मिस्त्री परिवार के साइरस मिस्त्री के बीच का लंबा विवाद भी थम गया। हालांकि, बहुत कम लोग जानते हैं कि रतन टाटा और साइरस मिस्त्री के बीच पारिवारिक रिश्ता भी है। आइए जानते हैं, कैसे एक दूसरे के रिश्तेदार हैं रतन टाटा और साइरस मिस्त्री..

ये है पलोनजी मिस्‍त्री का परिवार: मीडिया की लाइमलाइट से दूर रहने वाले साइरस मिस्त्री कोई साधारण नाम नहीं हैं। वह भारतीय मूल के चर्चित खरबपति पलोनजी शापूरजी मिस्‍त्री के सबसे छोटे बेटे हैं। पलोनजी शापूरजी के दो बेटे- शापूर और साइरस मिस्‍त्री हैं। वहीं दो बेटियां- लैला और अल्‍लू हैं। पलोनजी शापूरजी की बेटी अल्‍लू की शादी नोएल टाटा से हुई है, जो रतन टाटा के सौतेले भाई हैं। (ये पढ़ें-अडानी संभाल रहे हैं अंबानी का कारोबार)

इस लिहाज से रतन टाटा और साइरस मिस्त्री भी रिश्तेदार हुए। पलोनजी मिस्‍त्री ने आयरिश महिला से शादी की और बाद में आयरलैंड के नागरिक हो गए। हालांकि, उनका अधिकतर समय मुंबई में बीतता है।आपको बता दें कि पलोनजी मिस्‍त्री ग्रुप का कारोबार कपड़े से लेकर रियल एस्टेट, हॉस्पिटेलिटी और बिजनेस ऑटोमेशन तक फैला हुआ है।

कोर्ट में चल रहा था विवादः रतन टाटा और साइरस मिस्त्री के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने रतन टाटा के पक्ष में फैसला सुनाया है। दरअसल, साइरस मिस्त्री को 28 दिसंबर, 2012 को टाटा का चेयरमैन बनाया गया था। मिस्त्री ने छठे चेयरमैन के तौर पर ग्रुप में कार्यभार संभाला था, लेकिन 2016 में मिस्त्री को पद से हटा दिया गया था।

अचानक चेयरमैन पद से हटाए जाने के बाद मिस्त्री ने टाटा संस और रतन टाटा के खिलाफ राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) में गए थे। एनसीएलटी की मुंबई बेंच ने साइरस मिस्त्री को हटाने के खिलाफ दायर याचिकाओं को खारिज कर दिया था। (ये पढ़ें-कर्ज देती थी अनिल अंबानी की ये दो कंपनियां, फिर कारोबार समेटने की आ गई नौबत)

इसके बाद मामला राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) में पहुंचा और फैसला साइरस मिस्त्री के पक्ष में आया। वहीं, टाटा ग्रुप ने इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

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