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रतन टाटा से हार नहीं ​मानेंगे मिस्त्री, सुप्रीम कोर्ट में फिर लगाई गुहार, ये है पूरा मामला

मिस्त्री की समीक्षा याचिका में कहा गया है कि फैसला कंपनी अधिनियम 2013 और संविधान के विपरीत है।

ratan tata cyrus mistry शापूरजी पलोनजी समूह ने अब समीक्षा याचिका दायर की है (Photo- Indian Express )

बीते मार्च महीने में ही टाटा ग्रुप और शापूरजी पलोनजी समूह के बीच की कानूनी लड़ाई पर फैसला आ गया था। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने टाटा ग्रुप के पक्ष में फैसला सुनाया है।

हालांकि, शापूरजी पलोनजी समूह ने अब समीक्षा याचिका दायर की है। इसके मुताबिक शापूरजी पलोनजी समूह चाहता है कि सुप्रीम कोर्ट अपने फैसले की समीक्षा करे। आपको यहां बता दें कि शापूरजी पलोनजी समूह और टाटा ग्रुप के इस विवाद के केंद्र में साइरस मिस्त्री हैं। साइरस मिस्त्री को साल 2016 में टाटा संस के चेयरमैन पद से हटा दिया गया था। इसके बाद से ही दोनों समूहों के बीच कानूनी लड़ाई की शुरुआत हुई थी।

समीक्षा याचिका में क्या कहा गया है: इस समूह का कहना है कि सु्प्रीम कोर्ट के फैसले की समीक्षा की आवश्यकता है। मिस्त्री की समीक्षा याचिका में कहा गया है कि फैसला कंपनी अधिनियम 2013 और संविधान के विपरीत है। क्योंकि इसमें साइरस मिस्त्री को समूह के चेयरमैन पद से हटाने के लिए टाटा समूह द्वारा कंपनी के खुद के संविधान के उल्लंघन का उचित बताया गया है। इस प्रकार कुल मिलाकर यह फैसला अपने आप में विरोधाभासी है।

मिस्त्री समूह द्वारा दायर समीक्षा याचिका में फैसले में हुई गलतियों को ठीक करने का आग्रह किया गया है। इसमें कहा गया है कि यदि इनपर ध्यान नहीं दिया गया तो यह अन्य अल्पांश शेयरधारकों के अधिकारों पर भी प्रभाव डालेगा और यह उन्हें कंपनी कानून के तहत मिली उनकी सुरक्षा को समाप्त कर देगा।

कोर्ट का फैसला: बीते 26 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने टाटा समूह और शापूरजी पलोनजी समूह के बीच के विवाद पर अहम फैसला दिया था। कोर्ट ने शापूरजी समूह के साइरस मिस्त्री को चेयरमैन पद से हटाए जाने के टाटा समूह के फैसले को सही ठहराया था। यह फैसला तत्कालीन मुख्य न्यायधीश एस ए बोबडे की अध्यक्षता वाली तीन न्याायधीशों की पीठ ने दिया था। (ये पढ़ें-इस कंपनी को हो गया 500 करोड़ का बड़ा नुकसान, मुकेश अंबानी ने लगाया है दांव)

दरअसल, साइरस मिस्त्री को 28 दिसंबर, 2012 को टाटा का चेयरमैन बनाया गया था, लेकिन 2016 में पद से हटा दिया गया था। अचानक चेयरमैन पद से हटाए जाने के बाद मिस्त्री ने कानूनी लड़ाई लड़ने का फैसला लिया। फिलहाल, टाटा समूह की कमान एन चंद्रशेखरन के हाथों में है। एन चंद्रशेखरन को रतन टाटा का करीबी माना जाता है। ग्रुप के वह पहले गैर पारसी चेयरमैन हैं।

रिश्तेदार हैं रतन टाटा और साइरस मिस्त्री: मीडिया की लाइमलाइट से दूर रहने वाले साइरस मिस्त्री भारतीय मूल के चर्चित खरबपति पलोनजी शापूरजी के सबसे छोटे बेटे हैं। पलोनजी शापूरजी के दो बेटे- शापूर और साइरस मिस्‍त्री, दो बेटियां- लैला और अल्‍लू हैं। (ये पढ़ें-मुकेश अंबानी से ज्यादा है इन दो भाइयों की सैलरी, रिलायंस में मिली है बड़ी जिम्मेदारी)

पलोनजी शापूरजी की बेटी अल्‍लू की शादी नोएल टाटा से हुई है, जो रतन टाटा के सौतेले भाई हैं। इस लिहाज से रतन टाटा और साइरस मिस्त्री भी रिश्तेदार हुए।

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