ताज़ा खबर
 

रतन टाटा के भरोसेमंद हैं चंद्रशेखरन, संभाल रहे टाटा समूह की सबसे बड़ी जिम्मेदारी

चंद्रशेखरन से पहले साइरस मिस्त्री चेयरमैन पद पर थे लेकिन कार्यकाल पूरा होने से पहले ही उन्हें इस पद से हटा दिया गया था।

एन चंद्रशेखरन को रतन टाटा का सबसे भरोसेमंद माना जाता है। (Photo-Indian Express )

2016 का साल रतन टाटा के टाटा समूह के लिए काफी हंगामेदार रहा। इस साल टाटा समूह ने विवाद की वजह से साइरस मिस्त्री को चेयरमैन पद से हटा दिया। वहीं, साइरस मिस्त्री की जगह नटराजन चन्द्रशेखरन को जिम्मेदारी दी गई। एन चंद्रशेखरन को रतन टाटा का सबसे भरोसेमंद माना जाता है। यही नहीं, टाटा ग्रुप के इतिहास में वे पहले गैर-पारसी चीफ भी हैं।

कौन है एन चंद्रशेखरनः टाटा समूह के साथ चंद्रशेखरन का साथ तीन दशक पुराना है। उन्होंने 1987 में टाटा के लिए काम शुरू किया। 100 अरब डॉलर के उद्योग समूह के प्रमुख चंद्रशेखरन की प्राथमिक शिक्षा तमिल मीडियम स्कूल में हुई और वो अपने दो भाईयों के साथ मोहनूर नाम के गांव में स्कूल पैदल जाया करते थे। चंद्रशेखरन ने कोयंबटूर के इंस्टीच्यूट ऑफ टेक्नॉलाजी से स्नातक और त्रिची इंजीनयरिंग कालेज से पोस्ट ग्रेजुएट की पढ़ाई की है। चंद्रशेखरन की अगुवाई में टाटा समूह का कारोबार बढ़ रहा है।

साइरस मिस्त्री को पद से हटाया: चंद्रशेखरन से पहले साइरस मिस्त्री चेयरमैन पद पर थे लेकिन कार्यकाल पूरा होने से पहले ही उन्हें इस पद से हटा दिया गया था। अचानक चेयरमैन पद से हटाए जाने के बाद मिस्त्री ने टाटा संस और रतन टाटा के खिलाफ राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) में गए थे।

इसके बाद मामला राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) में पहुंचा और फैसला साइरस मिस्त्री के पक्ष में आया। टाटा समूह ने भी हार नहीं मानी और कोर्ट का दरवाजा खटखटा दिया। बीते महीने यानी मार्च में सुप्रीम कोर्ट ने एनसीएलएटी के फैसले को खारिज करते हुए कहा कि मिस्त्री को टाटा संस को चेयरमैन पद से हटाना कानूनी तौर पर सही है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर रतन टाटा ने स्वागत करते हुए कोर्ट का धन्यवाद किया। (ये पढ़ें-कर्ज देती थी अनिल अंबानी की ये दो कंपनियां, फिर कारोबार समेटने की आ गई नौबत)

कोरोना काल में टाटा समूह की स्थितिः कोरोना काल में विभिन्न क्षेत्रों की कंपनियों पर बड़ा असर पड़ा है। सबसे अधिक प्रभावित होटल, वाहन, विमानन और उपभोक्ता सामान क्षेत्र हुए हैं। इन सभी क्षेत्रों में टाटा समूह की मौजूदगी है। टाटा स्टील और जेएलआर सबसे अधिक प्रभावित हुई हैं। इसके अलावा टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) भी महामारी के प्रभाव से बच नहीं सकी है। (ये पढ़ें-अडानी संभाल रहे हैं अंबानी का कारोबार)

हालांकि, बीते साल एन चंद्रशेखरन ने बताया था कि टाटा संस की वित्तीय स्थिति काफी मजबूत है। कंपनी के पास समूह की कंपनियों और नई वृद्धि पहलों को समर्थन के लिए नकदी का पर्याप्त प्रवाह है। उन्होंने कहा कि अन्य कंपनियों की तरह टाटा समूह भी कोरोना वायरस की वजह से चुनौतियों और अवसरों दोनों का सामना कर रहा है।

Next Stories
1 बिकने वाली है डिफेंस में सक्रिय अनिल अंबानी की कंपनी, जानिए कौन लोग देख रहे हैं कारोबार
2 रतन टाटा ने लगाया इस कंपनी पर दांव, दो महीने के भीतर दूसरा बड़ा निवेश
3 COVID-19: गुजरात के इस रिफाइनरी में ऑक्सीजन बना रही रिलायंस, जानिए यहां की खास बातें
ये पढ़ा क्या?
X