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टाटा की इस कंपनी ने खटखटाया कोर्ट का दरवाजा, मार्च में मिस्त्री के खिलाफ मिली थी जीत

टाटा स्टील ने ब्रिटेन में ब्रिटिश भारतीय संजीव गुप्ता की अगुवाई वाले जीएफजी एलायंस के खिलाफ अदालत में मामला दर्ज कराया है।

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Ratan Tata, Tata Steel: टाटा समूह की बड़ी इस्पात कंपनी टाटा स्टील ने जीएफजी एलायंस के खिलाफ कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

जानकारी के मुताबिक टाटा स्टील ने ब्रिटेन में ब्रिटिश भारतीय संजीव गुप्ता की अगुवाई वाले जीएफजी एलायंस के खिलाफ अदालत में मामला दर्ज कराया है। कंपनी ने लिबर्टी स्टील नाम से कंपनी का संचालन करने वाली जीएफजी एलायंस पर 2017 में अधिग्रहण से जुड़े मामले में भुगतान से चूक करने का आरोप लगाया है।

आपको बता दें कि लिबर्टी स्टील ने टाटा की विशेष प्रकार के इस्पात बनाने वाले कारोबार का अधिग्रहण किया था। इस कारोबार में योर्कशायर, लैंकाशायर और वेस्ट मिडलैंड्स में 1,700 कर्मचारी काम करते थे। टाटा स्टील ने करीब 10 करोड़ डॉलर के सौदे के मई 2017 में पूरा होने की घोषणा की थी। समाचार पत्र ‘द डेली टेलीग्राफ’ की रिपोर्ट के अनुसार अब यह बात सामने आई है कि इस सौदे में भुगतान नहीं किया गया।

इसको देखते हुए टाटा ने लिबर्टी स्पेशलिटी स्टील, लिबर्टी हाउस ग्रुप पीटीई और स्पेशलिटी स्टील यूके (सभी जीएफजी एलायंस से संबद्ध) के खिलाफ अदालती कार्यवाही शुरू की है। (ये पढ़ें-कर्ज देती थी अनिल अंबानी की ये दो कंपनियां, फिर कारोबार समेटने की आ गई नौबत)

जीएफजी एलायंस ने मुकदमे के बारे में कुछ भी कहने से मना कर दिया। एलायंस को हमेशा समर्थन देने वाली ग्रीनसील कैपिटल के धाराशायी होने के बाद से वह काफी दबाव में है। (ये पढ़ें-अडानी संभाल रहे हैं अंबानी का कारोबार)

हालांकि उसने कर्ज को लेकर जारी प्रयासों के बारे में जानकारी दी। जीएफजी एलायंस के प्रवक्ता ने कहा, ‘‘हमारे ज्यादातर बड़े कारोबार अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। कोविड-19 के कारण हमारे कुछ कारोबार पर प्रतिकूल असर पड़ा है। ग्रीनसील कैपिटल के धाराशायी होने से हमारे यूके कारोबार को लेकर कार्यशील पूंजी के समर्थन पर असर पड़ा है। हम नये वित्त पोषण के लिये प्रयास कर रहे हैं।’’

मार्च में मिस्त्री के खिलाफ मिली थी जीत: आपको बता दें कि मार्च महीने में ही टाटा समूह ने सुप्रीम कोर्ट में एक बड़ी जीत हासिल की है। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट में टाटा समूह और साइरस मिस्त्री के बीच करीब 5 सालों से कानूनी जंग चल रही थी। इस लड़ाई की शुरुआत साल 2016 में हुई जब साइरस मिस्त्री को चेयरमैन पद से हटा दिया गया। इसके बाद साइरस मिस्त्री ने चुनौती दी। हालांकि, लंबे इंतजार के बाद टाटा समूह के पक्ष में फैसला आया है।

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