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टाटा-मिस्त्री विवाद: साइरस मिस्त्री को बड़ा झटका, चेयरमैन पद की लड़ाई में टाटा को मिली जीत

Tata Sons-Cyrus Mistry case: टाटा ग्रुप की कंपनी टाटा संस लिमिटेड और शापूरजी पलोनजी ग्रुप के साइरस मिस्त्री के मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुना दिया है।

ratan tata, Tata Sons-Cyrus Mistry caseसाइरस मिस्त्री, रतन टाटा (Photo-Indian Express )

Tata Sons-Cyrus Mistry case, Supreme Court Verdict: टाटा ग्रुप की कंपनी टाटा संस लिमिटेड और शापूरजी पलोनजी ग्रुप के साइरस मिस्त्री के मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले के तहत साइरस मिस्त्री को टाटा संस के चेयरमैन पद से हटाए जाने को सही माना है। वहीं, कोर्ट ने शेयर से जुड़े मामले पर कहा है कि टाटा और मिस्त्री दोनों ग्रुप इसे मिलकर सुलझाएं। टाटा संस प्राइवेट लिमिटेड और साइरस इन्वेस्टमेंट्स प्राइवेट लि. ने राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) के फैसले के खिलाफ क्रॉस अपील दायर की थी, जिसपर शीर्ष न्यायालय ने फैसला सुनाया है।

चीफ जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस एएस बोपन्ना और वी रामासुब्रमण्यम की बेंच ने इस फैसले को सुनाया है। आपको बता दें कि एनसीएलएटी ने अपने आदेश में 100 अरब डॉलर के टाटा समूह में साइरस मिस्त्री मिस्त्री को कार्यकारी चेयरमैन पद पर बहाल कर दिया था।

शापूरजी पालोनजी समूह ने कोर्ट में कही थी ये बात: शापूरजी पालोनजी (एसपी) समूह ने 17 दिसंबर को न्यायालय से कहा था कि अक्टूबर, 2016 को हुई बोर्ड की बैठक में मिस्त्री को टाटा संस के चेयरमैन पद से हटाना ‘खूनी खेल’ और ‘घात’ लगाकर किया गया हमला था। यह कंपनी संचालन के सिद्धान्तों के खिलाफ था।

वहीं टाटा समूह ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि इसमें कुछ भी गलत नहीं था और बोर्ड ने अपने अधिकार का इस्तेमाल करते हुए मिस्त्री को पद से हटाया था।

2016 से चल रहा विवाद: साइरस मिस्त्री और टाटा समूह के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा है। दरअसल, साइरस मिस्त्री को 28 दिसंबर, 2012 को टाटा का चेयरमैन बनाया गया था। मिस्त्री ने छठे चेयरमैन के तौर पर ग्रुप में कार्यभार संभाला था, लेकिन 2016 में मिस्त्री को पद से हटा दिया गया था। मिस्त्री को पद से हटाए जाने पर टाटा ग्रुप का कहना था कि ग्रुप के बेहतरी के लिए यह बदलाव जरूरी था।

अचानक चेयरमैन पद से हटाए जाने के बाद मिस्त्री ने टाटा संस और रतन टाटा के खिलाफ राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) में गए थे। एनसीएलटी की मुंबई बेंच ने साइरस मिस्त्री को हटाने के खिलाफ दायर याचिकाओं को खारिज कर दिया था।

इसके बाद मामला राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) में पहुंचा और फैसला साइरस मिस्त्री के पक्ष में आया। वहीं, टाटा ग्रुप ने इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। अब सुप्रीम कोर्ट ने रतन टाटा और टाटा समूह के ​पक्ष में फैसला सुनाया है।

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