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जमाखोर अपनी दाल बाज़ार में निकाल दे वरना घाटे में रहेंगे, इस बार अच्छी पैदावार: राम विलास पासवान

पत्रकारों से बातचीत में राम विलास पासवान ने कहा कि एक समय था जब अरहर की दाल के दाम 200 रुपए किलो तक पहुंच गए थे अब 100 रुपए तक आ गए है।

Author कानपुर | September 8, 2016 5:07 PM
केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान (पीटीआई फाइल फोटो)

देश में अरहर दाल की इस बार भरपूर पैदावार होने का दावा करते हुए केंद्रीय मंत्री राम विलास पासवान ने गुरुवार (8 सितंबर) को कहा कि जो जमाखोर अरहर की दाल इस लालच में जमा किए रखे है कि एक बार फिर अरहर के दाम बढ़ेंगे वह इस मुगालते में न रहें और अपनी दाल बाजार में निकाल दें, क्योंकि फसल अच्छी होने के कारण इस बार उन्हें कुछ मिलने मिलने वाला नहीं है। उन्होंने पिछली बार अरहर समेत अन्य दालों के दाम बढ़ने का मुख्य कारण जमाखोरी बताया और इसके लिए राज्य सरकारों को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकारों ने दाल की जमाखोरी करने वालो के खिलाफ कठोर कार्रवाई नही की।

केंद्रीय उपभोक्ता मामलो के मंत्री पासवान गुरुवार को कानपुर के शर्करा संस्थान (शुगर इंस्टीटयूट) के दीक्षांत समारोह में शामिल होने आए थे। बाद में पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि एक समय था जब अरहर की दाल के दाम 200 रुपए किलो तक पहुंच गए थे अब 100 रुपए तक आ गए है। दाल के दाम बढ़ने का मुख्य कारण जमाखोरी थी, हमारे बार बार कहने के बावजूद राज्य सरकारों ने जमाखोरी के खिलाफ कठोर कार्रवाई नही की नतीजतन जनता को मंहगी दाल खरीदनी पड़ी।

उन्होंने कहा कि हम राज्य सरकारों को अरहर की दाल 66 रुपए किलो और उड़द की दाल 83 रुपए प्रति किलो देने को तैयार है, हमारे पास दाल का भंडार है जो राज्य सरकारें चाहे केंद्र से दाल खरीद सकती है। पासवान ने कहा कि इस बार दाल का फसर बंपर होने वाला है और जो जमाखोर है उन्हें कुछ मिलने वाला नही है। अगर जमाखोर यह सोच रहे है कि जो दाले उन्होंने जमा कर रखी है उसे वह आने वाले समय में मंहगे दामों में बेचेंगे तो इस मुगालते में न रहें और अपनी दालों को निकालकर बाजार में बेंच दे क्योंकि इस बार दाल की पैदावार बहुत अच्छी हुई है।

एक सवाल के जवाब में पासवान ने कहा कि देश में आलू, गेंहू, चावल, आलू, प्याज, चीनी, टमाटर किसी चीज की कमी नहीं है। लेकिन देश के सभी किसानों को उनकी फसलों का सही और समान मूल्य पूरे देश में नही मिल पाता है। इसका कारण पूरे देश में एपीएमसी एक्ट (एग्रीकल्चर प्रोडयूस मार्केट कमेटी) का एक समान स्तर पर लागू न होना है। हमारे देश के हर राज्य में अलग अलग एपीएमसी कानून है अगर इस कानून में संशोधन हो जाएं तो सभी जगह किसानों को उनकी फसलों का एक समान मूल्य मिलेगा और सभी जगह दाम भी सामान्य होंगे।

उनसे पूछा गया कि कि नासिक में प्याज एक रुपए किलो मंडियों में है जबकि देश में दुकानों में 20 रुपए किलो तक प्याज मिल रही है। इस पर पासवान ने कहा कि यह सभी जगह एपीएमसी कानून समान न होने के कारण हो रहा है। इससे पहले उन्होंने शर्करा संस्थान के छात्रों को दीक्षांत समारोह में संबोधित करते हुए कहा कि वह शिक्षा प्राप्त कर नई-नई कृषि की तकनीक विकसित करें ताकि उससे देश को लाभ मिल सकें। उन्होंने छात्रों को उपाधि और मेडल भी प्रदान किएं।

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