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रेलवे बोर्ड ने सभी जोनल अधिकारियों को दिए निर्देश ट्रेनों के आने और जाने की दें सही जानकारी

पटरियों की खस्ता हालत, मालगाड़ियों को प्राथमिकता देने की कोशिश और कोहरे सहित कई अन्य कारणों के चलते ट्रेनों की आवाजाही केवल कोहरे के समय ही नहीं, बल्कि पूरे साल कई-कई घंटे तक प्रभावित होती रही है और अधिकारी कार्रवाई के डर से ट्रेनों के समय को लेकर गलत जानकारी देते रहते हैं।

Author नई दिल्ली | January 1, 2018 3:37 AM
नेशनल कंज्यूमर कमीशन का फैसला यात्रियों के लिए राहत भरा है। (प्रतीकात्मक)

नए साल पर रेलवे बोर्ड ने तमाम जोनल अधिकारियों को ताकीद की है कि वे रेलगाड़ियों की लेटलतीफी न छुपाएं, तभी रेलवे में सुधार व लोगों की धारणा में बदलाव लाया सकेगा। एक जनवरी से लागू इस आदेश में कहा गया है कि ट्रेनों के आने-जाने के बारे में सही जानकारी दी जाए, ताकि समयबद्धता को लेकर आ रही दिक्कतों व उनके वास्तविक कारणों को समझा जा सके और उसे दुरुस्त करने के समुचित उपाय किए जा सकें। आदेश में यह भी कहा गया है कि नए साल में जोन स्तर पर ट्रेनों की समयबद्धता का मूल्यांकन फीसद के हिसाब से नहीं, बल्कि गे्रडिंग के हिसाब से होगा। रेल यात्री ट्रेनों की लेटलतीफी से ही नहीं, बल्कि इसके बारे में दी जाने वाली गलत जानकारियों से ज्यादा हलकान होते हैं। उच्चस्तरीय सूत्रों के मुताबिक रेलवे के अधिकारी समय की पाबंदी दिखाने की होड़ में या देरी के लिए जवाब देने से बचने और अन्य कारणों से ट्रेनों के आने-जाने के बारे में गलत जानकारी देते रहे हैं। पटरियों की खस्ता हालत, मालगाड़ियों को प्राथमिकता देने की कोशिश और कोहरे सहित कई अन्य कारणों के चलते ट्रेनों की आवाजाही केवल कोहरे के समय ही नहीं, बल्कि पूरे साल कई-कई घंटे तक प्रभावित होती रही है और अधिकारी कार्रवाई के डर से ट्रेनों के समय को लेकर गलत जानकारी देते रहते हैं। जहां रेलवे लाइनों पर ट्रेनों का भारी दबाव है, वहीं व्यापारियों के माल को जल्दी पहुंचाने का अघोषित दबाव भी है। सूत्र बताते हैं कि मालगाड़ियों को प्राथमिकता देने की कोशिश में यात्री ट्रेनों को रोका जाता है और इसे छुपाने के लिए भी गाड़ियों के आने-जाने की गलत जानकारी दी जाती है।

इसके अलावा समय की पाबंदी दिखाने की होड़ के कारण ही जैसे ही ट्रेन सर्किल में दाखिल होती है उसे रिकॉर्ड में दिखा दिया जाता है कि वह पहुंच गई। इसे 139 पर भी अपलोड कर दिया जाता है और यात्रियों क ो लेने या छोड़ने वाले लोग इसी हिसाब से स्टेशन पहुंच जाते हैं। जबकि सर्किल में आने से लेकर प्लेटफॉर्म तक पहुंचने में ट्रेन को 45 मिनट या उससे भी ज्यादा वक्त लग जाता है। लिहाजा जहां स्टेशनों पर प्रतीक्षा समय बढ़ जाता है वहीं प्लेटफॉर्मों पर भीड़ भी बढ़ जाती है। ट्रेनों के बारे में दी जा रही गलत सूचनाओं को लेकर बोर्ड क ो शिकायतें भी मिली हैं। बोर्ड ने इसे गंभीरता से लेते हुए सख्त आदेश जारी किया है कि ट्रेनें कितनी भी देरी से क्यों न चल रही हों, उनकी सही जानकारी दी जाए। रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष अश्विनी लोहानी ने कहा है कि ट्रेनों की लेटतलीफी ही नहीं बल्कि समय को लेकर दी जा रही गलत जानकारी से भी रेलवे की साख गिर रही है। समयबद्धता की गलत जानकारी देने को लेकर रेलवे बोर्ड ने जोनल अधिकारियों को फटकार लगाई है।

रेलवे ने उत्तर रेलवे व मध्य रेलवे सहित सभी 16 जोनों के महाप्रबंधकों को 27 दिसंबर को जारी एक आदेश में कहा है कि सुधार की दिशा में पहल करने के लिए सबसे जरूरी है कि ट्रेनों के पहुंचने व चलने के बारे में सही जानकारी दी जाए। लोहानी ने कहा है कि बिना किसी डर या हिचक के बताया जाए कि ट्रेनें कब आ-जा रही हैं। तभी असल दिक्कतों की पड़ताल हो सकेगी और उसे ठीक किया जा सकेगा। साथ ही बोर्ड ने यह भी कहा है कि समयबद्धता को प्रोत्साहित करने के लिए ट्रेनों के फीसद के हिसाब से जोनों का मूल्यांकन नहीं होगा, बल्कि इसके लिए ग्रेडिंग प्रणाली लागू होगी, लेकिन इसके लिए जरूरी है कि समय को लेकर दी गई जानकारी सही हो।

 

 

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