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अभी सस्ता नहीं होगा कर्ज

मुंबई। त्योहारों से पहले सस्ते कर्ज की उम्मीद लगाए बैठे उपभोक्ताओं और उद्योग जगत को निराश करते हुए भारतीय रिजर्व बैंक ने मंगलवार को फिर नीतिगत ब्याज दरों में बदलाव नहीं किया। बैंक ने कहा कि मुद्रास्फीति के अपेक्षित स्तर तक आने से पहले वह कर्ज सस्ता करने का कदम नहीं उठाएगा। केंद्रीय बैंक ने […]

Author October 1, 2014 8:31 AM

मुंबई। त्योहारों से पहले सस्ते कर्ज की उम्मीद लगाए बैठे उपभोक्ताओं और उद्योग जगत को निराश करते हुए भारतीय रिजर्व बैंक ने मंगलवार को फिर नीतिगत ब्याज दरों में बदलाव नहीं किया। बैंक ने कहा कि मुद्रास्फीति के अपेक्षित स्तर तक आने से पहले वह कर्ज सस्ता करने का कदम नहीं उठाएगा। केंद्रीय बैंक ने लगातार चौथी बार नीतिगत ब्याज दरों को अपरिवर्तित रखा है। इस समय रिजर्व बैंक की अल्पकालिक कर्ज दर (रेपो) आठ फीसद और आरक्षित नकदी अनुपात(सीआरआर) चार फीसद पर है। सांविधिक नकदी अनुपात (एसएलआर) 22 फीसद है। केंद्रीय बैंक के इस कदम के बाद बैंकों ने निकट भविष्य में जमाओं व कर्ज पर ब्याज दरों में कमी की संभावना से इनकार कर दिया।

रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन ने यहां केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति की समीक्षा जारी करते हुए उम्मीद जताई कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक पर आधारित मुद्रास्फीति नरम होकर जनवरी, 2016 तक छह फीसद के स्वीकार्य स्तर तक आ जाएगी। इसके साथ ही उन्होंने मौजूदा वित्त वर्ष में जीडीपी वृद्धि दर 5.5 फीसद रहने के अनुमान को कायम रखा है।

नीतिगत ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किए जाने से उपभोक्ताओं को इस त्योहारी सीजन में कोई राहत नहीं मिलेगी। इसके साथ ही केंद्रीय बैंक ने ‘अपने ग्राहक को जानो ’ (केवाईसी) नियमों में ढील देते हुए बैंक खाता खोलने के लिए दस्तावेजों के स्व-सत्यापन की अनुमति दे दी है। राजन ने कहा कि केंद्रीय बैंक ‘जानबूझ कर कर्ज न चुकाने वालों’ की परिभाषा को संशोधित करने की प्रक्रिया में है ताकि चूककर्ता कंपनियों के निदेशकों को भी इसके दायरे में लाया जा सके। उसने घपलों पर काबू पाने के लिए केंद्रीय धोखाधड़ी रजिस्ट्री की स्थापना की घोषणा की है।

केंद्रीय बैंक की नीति पर वित्तीय सेवा सचिव जीएस संधू ने कहा कि रिजर्व बैंक बाजार की जरूरतों को समझता है और सही समय पर ब्याज दर में कटौती करेगा। उन्होंने कहा- रिजर्व बैंक मामले को पूरी तरह समझता है। यह बाजार की अपेक्षाओं व जरूरतों को समझता है इसलिए वे नीतिगत दरों में कटौती पर सही समय पर फैसला करेंगे।

उद्योग जगत का कहना है कि रिजर्व बैंक ने ब्याज दर घटाने का अवसर गंवा दिया, जबकि थोक मूल्य सूचकांक (डब्लूपीआइ) आधारित मुद्रास्फीति पांच साल के निचले स्तर 3.74 फीसद पर है और कच्चे तेल के दाम घटकर 94 डॉलर प्रति बैरल पर आ गए हैं।
एसबीआइ की अध्यक्ष अरुंधति भट्टाचार्य ने कहा कि यथास्थिति बनाए रखने का भारतीय रिजर्व बैंक का कदम बाजार अपेक्षाओं के अनुरूप है। नीति संबंधी बयान यह दोहराता है कि रेपो दर में किसी भी तरह का समायोजन भविष्य के आंकड़ों पर निर्भर करेगा। बैंक अॉफ इंडिया की प्रमुख वीआर अय्यर ने कहा कि दरों में कटौती की कोई गुंजाइश नहीं है। उन्होंने कहा कि नीतिगत ब्याज दरों के मामले में रिजर्व बैंक के कदम के मद्देनजर हम निकट भविष्य में ब्याज दरों में कोई बदलाव की उम्मीद नहीं कर रहे।

जमा दरों के बारे में आइसीआइसीआइ बैंक की प्रबंध निदेशक चंदा कोचर ने कहा कि उनका बैंक जमा दरों में बदलाव के बारे में एक साल तक इंतजार नहीं करता और वे गतिशील आधार पर उस पर नजर रखते हैं। उन्होंने कहा, ‘यह सवाल केवल बैंकों में दरों से नहीं है, बल्कि अपनी नकदी की स्थिति के साथ रिण उठाव से भी जुड़ा है। मुझे लगता है कि हर कोई इसमें संतुलन करता रहता है। फिलहाल तत्काल बदलाव की कोई गुंजाइश नहीं है।’ एचडीएफसी बैंक के प्रबंध निदेशक आदित्य पुरी ने कहा कि कर्ज व जमा दरें रिण मांग पर निर्भर करती हैं जिसमें फिलहाल मजबूत वृद्धि नहीं हो रही है। अगर कर्ज की मांग बढ़ती है तो आप जमा दरों में कमी देखेंगे।’

 

 

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