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सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक कर्मचारी हड़ताल पर, देश के करीब 80,000 शाखाओं पर असर

नौ बैंकों के कर्मचारियों और अधिकारियों के संघों के बैंकों के शीर्ष संगठन बैंक संघों का संयुक्त मंच (यूएफबीयू) ने हड़ताल करने का फैसला किया

Author नई दिल्ली | July 30, 2016 01:13 am
पटना में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के मुख्यालय में हड़ताल का नजारा।(PTI Photo)

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक कर्मचारियों की एक दिन की हड़ताल से शुक्रवार (29 जुलाई) को देशभर में करीब 80,000 बैंक शाखाओं में कामकाज प्रभावित हुआ। सहयोगी बैंकों का भारतीय स्टेट बैंक में विलय करने के प्रस्ताव के खिलाफ इस हड़ताल का आह्वान किया गया था। हालांकि, बैंक ग्राहकों को राहत देते हुए सभी बैंक शनिवार (30 जुलाई) को पूरे दिन काम करेंगे। इनमें निजी क्षेत्र के बैंक भी शामिल हैं जो हड़ताल में शामिल नहीं थे। नौ बैंकों की कर्मचारी और ऑफिसर्स यूनियनों के प्रमुख संगठन यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक्स यूनियंस (यूएफबीयू) ने हड़ताल का आह्वान किया था। हड़ताल से चेक समाशोधन, नकद जमा और निकासी तथा अन्य सेवाएं प्रभावित हुईं। यूएफबीयू 8 लाख बैंककर्मियों का प्रतिनिधित्व करता है।

हड़ताल पर एसबीआई की प्रमुख अरुंधति भट्टाचार्य ने कहा कि बैंक इस मुद्दे पर सभी अंशधारकों से सहमति बनाएगा। पांच सहयोगी बैंकों के स्टेट बैंक में विलय के प्रस्ताव पर उन्होंने कहा, ‘लोगों को समझना होगा कि यह बदलाव जरूरी है। पूर्व में भी कई मौकों पर हड़ताल हो चुकी है, लेकिन हमें लोगों को शिक्षित करना होगा और उनके साथ सहमति बनानी होगी।’ ऑल इंडिया बैंक एम्पलाइज एसोसिएशन (एआईबीईए) के महासचिव सी एच वेंकटचलम ने कहा कि 26 जुलाई को मुख्य श्रम आयुक्त के साथ सुलह सफाई बैठक से कोई सकारात्मक नतीजा नहीं निकला।

उन्होंने कहा कि यूनियनें अर्थपूर्ण विचार विमर्श को तैयार हैं लेकिन सरकार सिर्फ बैंकिंग सुधारों पर अपने मौजूदा नीतिगत फैसलों को सही ठहराने का प्रयास कर रही है। ऐसे में बैठक का कोई मतलब नहीं है। नेशनल ऑर्गेनाइजेशन आफ बैंक वर्कर्स के उपाध्यक्ष अश्विनी राणा ने कहा कि शनिवार (30 जुलाई) को बैंकों में सामान्य तरीके से कामकाज होगा। इससे पहले उद्योग मंडल एसोचैम ने कहा था कि हड़ताल से 12,000 से 15,000 करोड़ रुपए का लेनदेन प्रभावित होने का अनुमान है।

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