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प्रोविडेंट फंड पर 1977-78 के बाद सबसे कम ब्याज मिलने का खतरा, EPFO ने रोके 2700 करोड़ रुपए

यदि ब्याज के 0.35 प्रतिशत हिस्से का भुगतान नहीं होता है तो 1977-78 के बाद यह पहला मौका होगा, जब ईपीएफओ पर इतना कम ब्याज मिलेगा। तब 8 पर्सेंट की दर से पीएफ पर ब्याज अदा किया गया था।

Author Translated By सूर्य प्रकाश नई दिल्ली | Updated: September 10, 2020 9:33 AM
provident fund42 सालों में पीएफ पर सबसे कम ब्याज मिलने का खतरा

देश भर के 6 करोड़ से ज्यादा पीएफ खाताधारकों को फाइनेशियल ईयर 2019-20 के लिए ब्याज की अदायगी दो हिस्सों में की जा सकती है। बुधवार को ईपीएफओ के ट्रस्टीज की बैठक में कोरोना संकट के चलते ब्याज की अदायगी दो हिस्सों में करने पर फैसला लिया गया। फिलहाल सभी खाताधारकों की जमा राशि पर 8.15 पर्सेंट सालाना ब्याज जारी करने का फैसला लिया गया है। इसके अलावा 0.35 पर्सेंट ब्याज 31 दिसंबर से पहले जारी किया जा सकता है। हालांकि यह इक्विटी इन्वेस्टमेंट से लिंक है। ऐसे में इसका भुगतान एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स के रिटर्न पर निर्भर करेगा। फिलहाल 8.5 पर्सेंट ब्याज ही बीते 7 सालों का सबसे कम स्तर पर है। यदि ब्याज के 0.35 प्रतिशत हिस्से का भुगतान नहीं होता है तो 1977-78 के बाद यह पहला मौका होगा, जब ईपीएफओ पर इतना कम ब्याज मिलेगा। तब 8 पर्सेंट की दर से पीएफ पर ब्याज अदा किया गया था।

ईपीएफओ की ओर से बुधवार को लिए गए फैसले से साफ है कि संस्था ब्याज की टुकड़ों में ही अदायगी कर सकती है, जो 58,000 करो़ड़ रुपये के करीब है। इसलिए ईपीएफओ ने 0.35 पर्सेंट ब्याज जो 2,700 करोड़ रुपये होता है को रोकने का फैसला लिया है। अब इस प्रस्ताव को वित्त मंत्रालय को मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। श्रम मंत्रालय के तहत आने वाले ईपीएफओ ने मार्च में ही 8.5 पर्सेंट ब्याज अदा करने की बात कही थी, लेकिन अब तक इस संबंध में वित्त मंत्रालय से मंजूरी नहीं ली गई थी। 5 मार्च को हुई ईपीएफओ की मीटिंग में 8.5 पर्सेंट ब्याज देने पर सहमति बनी थी, लेकिन तब ईटीएफ के रिटर्न के आधार पर 0.35 पर्सेंट हिस्से के भुगतान जैसी बात नहीं थी।

अब बुधवार को श्रम मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा, ‘कोरोना के चलते पैदा हुए विकट हालातों के बीच सेंट्रल बोर्ड ने 8.5 पर्सेंट ब्याज दर की सिफारिश केंद्र सरकार से की है। इसके तहत 8.15 पर्सेंट ब्याज कर्ज से होने वाली आय के जरिए अदा किया जाएगा। इसके अलावा बाकी बचे 0.35 पर्सेंट हिस्से को 31 दिसंबर तक 2020 तक अदा किया जाएगा, जो ईटीएफ के रिटर्न पर निर्भर करेगा।’

दरअसल चिंताएं इसलिए बढ़ गई हैं क्योंकि ईपीएफओ के 1 लाख करोड़ रुपये के इक्विटी इन्वेस्टमेंट पर -8.3 पर्सेंट रिटर्न मिला है। यही नहीं 2018-19 के लिए ईपीएफओ ने जब 8.65 पर्सेंट ब्याज अदा किया था, तब भी वित्त मंत्रालय ने इस पर सवाल उठाय़ा था और आईएल एंड एफएस और अन्य संस्थाओं में निवेश के फंसने की याद दिलाई थी।

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