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उड्डयन मंत्री ने दिए बड़े पैमाने पर निजीकरण के संकेत, कहा- सरकार को न एयरपोर्ट चलाने चाहिए और न एयरलाइंस

एयर इंडिया पर 50 हज़ार करोड़ से अधिक का क़र्ज़ है, जिसके बाद सरकार ने इसे बेचने का फैसला लिया था। एयर इंडिया की हिस्सेदारी बेचने की प्रक्रिया 27 जनवरी को शुरू की गई थी।

Author Edited By सुदीप अग्रहरि नई दिल्ली | Updated: August 31, 2020 11:38 AM
hardeep puri air indiaकेंद्रीय उड्डयन मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने की निजीकरण की वकालत

हवाई अड्डों के निजीकरण को लेकर चल रही बहस के बीच केंद्र सरकार ने संकेत दिया है कि आने वाले समय में इसमें और तेजी आएगी। केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने रविवार को कहा कि सरकार को एयरपोर्ट और एयरलाइंस नहीं चलानी चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने सरकारी विमानन कंपनी एयर इंडिया के इसी साल निजीकरण की उम्मीद भी जताई। पुरी की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है, जब केरल सरकार ने तिरुवनंतपुरम हवाई अड्डे के निजीकरण का विरोध किया है।

बता दे कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 19 अगस्त को तिरुवनंतपुरम हवाई अड्डे को सार्वजनिक निजी भागीदारी(पीपीपी) के तहत 50 साल तक के लिए अडानी इंटरप्राइजेज को लीज़ पर देने की मंजूरी दी थी। इस पर केरल के सीएम पिनराई विजयन ने ऐतराज जताते हुए पीएम नरेंद्र मोदी को खत लिखा था और लीज पर देने के लिए राज्य सरकार के प्रस्ताव को न स्वीकार करने पर नाराजगी भी जाहिर की। हरदीप सिंह पुरी ने नमो ऐप पर एक मीटिंग को संबोधित करते हुए कहा, ‘मैं आपको अपने दिल से यह कहना चाहता हूं कि सरकार को हवाई अड्डों का संचालन नहीं करना चाहिए और न ही हवाई जहाज चलाने चाहिए।’

केंद्र सरकार द्वारा संचालित एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के पास देश के 100 से ज्यादा हवाई अड्डों का मालिकाना हक है और वह उनका मेंटनेंस करता है। एयर इंडिया के निजीकरण पर पुरी ने कहा हमारे लिए एक चिंता का विषय हैं। हमें एक आकर्षक बोली का इंतजार है। उम्मीद है कि इस साल के अंत तक इस सरकारी कंपनी क निजीकरण हो सकेगा। फरवरी 2019 में केंद्र सरकार ने छह प्रमुख हवाई अड्डों लखनऊ, अहमदाबाद, जयपुर, मंगलुरु, तिरुवनंतपुरम और गुवाहाटी के निजीकरण का फैसला लिया था। बोली प्रक्रिया के बाद अडानी एंटरप्राइजेज ने इन सभी हवाईअड्डों के संचालन के अधिकारों को जीत लिया।

दो बार बढ़ चुकी एयर इंडिया के लिए बोली की तारीख: आपको बता दें कि एयर इंडिया पर 50 हज़ार करोड़ से अधिक का क़र्ज़ है, जिसके चलते सरकार ने इसे बेचने का फैसला लिया था। एयर इंडिया की हिस्सेदारी बेचने की प्रक्रिया 27 जनवरी को शुरू की गई थी। तब से इसकी बोली की आखिरी तारीख चार बार बढ़ाई जा चुकी हैं। पिछले मंगलवार को केंद्र सरकार ने एयर इंडिया की बोली की समयसीमा को दो महीने बढ़ाकर 30 अक्टूबर कर दिया था।

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