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UPI पेमेंट ट्रांसफर पर चुपचाप चार्ज वसूलने लगे प्राइवेट बैंक, मोदी सरकार ने कही थी फ्री होने की बात

कों ने कहा है कि 20 ट्रांजेक्शंस की लिमिट के बाद यह चार्ज इसलिए लगाया गया है ताकि छोटी ट्रांजेक्शंस कम हो सकें। बैंकर्स का कहना है कि ज्यादा ट्रांजेक्शंस से सिस्टम पर लोड बढ़ता है।

जानें, कैसे यूपीआई ट्रांसफर चार्ज वसूल रहे हैं निजी बैंक

कोरोना काल में बीते कुछ महीनों में ऑनलाइन ट्रांजेक्शंस में तेजी से इजाफा देखने को मिला है। खासतौर पर यूपीआई के जरिए ट्रांसफर और पेमेंट तेजी से इजाफा हुआ है, लेकिन इस पर प्राइवेट बैंकों ने चार्ज की वसूली शुरू कर दी है। टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिकप पर्सन-टू-पर्सन 20 यूपीआई पेमेंट्स के बाद निजी बैंक प्रति ट्रांजेक्शन 2.5 से लेकर 5 रुपये तक वसूल रहे हैं। लॉकडाउन के दौरान हर महीने करीब 8 पर्सेंट की दर से यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस के इस्तेमाल में इजाफा हो रहा है। अनुमानों के मुताबिक अगस्त महीने में यूपीआई ट्रांजेक्शंस 160 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती हैं, जबकि अप्रैल 2019 में यह आंकड़ा 80 करोड़ रुपये का ही था।

अपने इस कदम का बचाव करते हुए बैंकों ने कहा है कि 20 ट्रांजेक्शंस की लिमिट के बाद यह चार्ज इसलिए लगाया गया है ताकि छोटी ट्रांजेक्शंस कम हो सकें। बैंकर्स का कहना है कि ज्यादा ट्रांजेक्शंस से सिस्टम पर लोड बढ़ता है। ऐसे में बड़ी ट्रांजेक्शंस ही इसके जरिए होनी चाहिए। बता दें कि सरकार ने यूपीआई के जरिए पेमेंट के फ्री होने की बात कही थी। ऐसे में बैंकों का यह फैसला सरकार के आश्वासन से उलट है। रिपोर्ट के मुताबिक बैंक नियमों का अपने मुताबिक इस्तेमाल करते हुए यह कह रहे हैं कि पेमेंट्स पर कोई चार्ज नहीं लिया जाएगा, लेकिन ट्रांसफर पर फीस ली जाएगी।

जानकारों का कहना है कि अभी यूपीआई अपने शुरुआती दौर में है। ऐसे में यदि बैंकों की ओर से यूपीआई ट्रांसफर पर चार्ज की वसूली होती है तो फिर इसके इस्तेमाल को लेकर लोग हतोत्साहित होंगे और कैशलेस इकॉनमी बनाने के प्रयासों को इससे झटका लगेगा। गौरतलब है कि नोटबंदी के बाद से ही देश में कैशलेस ट्रांजेक्शंस में इजाफा देखने को मिला है। लेकिन कोरोना संकट के दौरान इसमें अप्रत्याशित तेजी आई है। कैश इकॉनमी माने जाने वाले भारत में पेमेंट को लेकर कल्चर बदला है और बड़े पैमाने पर लोग ऑनलाइन पेमेंट करने लगे हैं।

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