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नए भूमि अधिग्रहण अध्यादेश को राष्ट्रपति की मंजूरी

भूमि अधिग्रहण अध्यादेश की समय सीमा समाप्त होने से एक दिन पहले सरकार ने शुक्रवार को इसे फिर से जारी कर दिया। इस अध्यादेश के बदले संबंधित विधेयक को राज्यसभा में विपक्ष के कड़े विरोध के कारण पारित नहीं करा पाने के कारण सरकार ने अध्यादेश को फिर से जारी किया। सरकारी सूत्रों ने बताया […]

Author April 4, 2015 8:48 AM
राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने केंद्रीय मंत्रिमंडल की ओर से 31 मार्च को की गई सिफारिश के अनुरूप अध्यादेश पर हस्ताक्षर कर दिए। (फ़ोटो-पीटीआई)

भूमि अधिग्रहण अध्यादेश की समय सीमा समाप्त होने से एक दिन पहले सरकार ने शुक्रवार को इसे फिर से जारी कर दिया। इस अध्यादेश के बदले संबंधित विधेयक को राज्यसभा में विपक्ष के कड़े विरोध के कारण पारित नहीं करा पाने के कारण सरकार ने अध्यादेश को फिर से जारी किया।

सरकारी सूत्रों ने बताया कि केंद्रीय मंत्रिमंडल की ओर से 31 मार्च को की गई सिफारिश के अनुरूप राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने अध्यादेश पर हस्ताक्षर कर दिए। पूर्व में जारी अध्यादेश की अवधि शनिवार को समाप्त होने जा रही थी, क्योंकि संसद के बजट सत्र में इसके बदले लाए जाने वाले विधेयक को संसद की मंजूरी नहीं मिल पाई है।

नरेंद्र मोदी सरकार की ओर से लाया गया यह 11वां अध्यादेश है। इसमें उन नौ संशोधनों को समाहित किया गया है जो पिछले महीने लोकसभा में पारित संबंधित विधेयक में शामिल हैं। यह विधेयक राज्यसभा से पारित नहीं हो पाया है जहां राजग गठबंधन के पास इसे पारित कराने लायक संख्या का अभाव है। संबंधित अध्यादेश पहली बार दिसंबर में जारी किया गया था।

विपक्ष राजग सरकार की ओर से लाए गए नए भूमि अधिग्रहण विधेयक के विरोध में एकजुट है। वह इसे पारित कराने में सरकार को कोई रियायत देने की बजाए अपना रुख और कड़ा करता नजर आ रहा है। सोनिया गांधी के नेतृत्व में विपक्षी दल मांग कर रहे हैं कि यूपीए शासन के समय पारित मूल भूमि अधिग्रहण विधेयक को ही पारित कराया जाए। अध्यादेश को दोबारा जारी करने का रास्ता साफ करने के लिए सरकार ने पिछले हफ्ते राज्यसभा का सत्रावसान कराया था।

संविधान में प्रावधान है कि कोई अध्यादेश जारी करने के लिए संसद के किसी एक सदन का सत्रावसान होना चाहिए। 23 फरवरी से शुरू हुए संसद के बजट सत्र का इन दिनों एक महीने का अवकाश चल रहा है। संसद की अंतर सत्र अवधि के दौरान सरकार भूमि अधिग्रहण सहित छह अध्यादेश लाई थी। सरकार इनमें से पांच की जगह लेने वाले विधेयकों को संसद से पारित कराने में सफल रही लेकिन भूमि अधिग्रहण विधेयक को लेकर उसे ऐसी सफलता नहीं मिल पाई।

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