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प्रधानमंत्री आवास योजना: 2020 से पहले एक करोड़ घर देने की तैयारी में मोदी सरकार

21 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के शहरी क्षेत्र खुले में शौच मुक्त घोषित किए जा चुके हैं। इनमें अंडमान एवं निकोबार, दादर एवं नागर हवेली, चंडीगढ़, आंध्र प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, हरियाणा और झारखंड शामिल हैं।

Author December 30, 2018 7:33 PM
मंत्रालय ने 2017 में ‘स्वच्छ सर्वेक्षण’ की भी शुरुआत की, जिसका उद्देश्य शहरों के बीच स्वच्छता की प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना है।

केंद्रीय शहरी एवं आवास मंत्रालय ने वर्ष 2018 में कई योजनाओं की शुरुआत की। इसी क्रम में अब एक करोड़ घरों के निर्माण को मंजूरी देने की तैयारी है। यह घर ‘प्रधानमंत्री आवास योजना’ (शहरी क्षेत्र) के तहत बनाए जाएंगे, ताकि ‘2022 तक सबके लिए घर’ कार्यक्रम को पूरा किया जा सके। प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत 2020 से पहले एक करोड़ घरों के निर्माण को मंजूरी देने की योजना बनाई। मंत्रालय ने कई प्रमुख कार्यक्रमों और योजनाओं का तेजी से क्रियान्वयन अनिवार्य कर दिया है। इसमें स्वच्छ भारत मिशन, प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी क्षेत्र), स्मार्ट सिटी, राष्ट्रीय धरोहर शहर योजना, अटल अभियान के तहत शहरी परिवहन कायाकल्प योजना आदि शामिल हैं।

मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अप्रैल 2018 से अब तक 1,612 शहर खुले में शौच मुक्त घोषित किया जा चुके हैं, जबकि स्वच्छ भारत मिशन के तहत 4,124 शहरों को शामिल किया गया है। अधिकारी के अनुसार 62 लाख घरों में एवं 5 लाख सार्वजनिक शौचालयों का निर्माण पूरा हो चुका है या लगभग होने को है। 21 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के शहरी क्षेत्र खुले में शौच मुक्त घोषित किए जा चुके हैं। इनमें अंडमान एवं निकोबार, दादर एवं नागर हवेली, चंडीगढ़, आंध्र प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, हरियाणा और झारखंड शामिल हैं।

इनमें से 35.67 लाख घर निर्माण के विभिन्न चरणों में हैं, जिनमें से 12.45 लाख घर पहले ही पूरे हो चुके हैं। सरकार ने 2020 तक एक करोड़ घरों को से मंजूरी देने का काम किया है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि 2022 तक सभी के लिए आवास प्रदान करने के लिए निर्माण गतिविधियों को पूरा किया जाए। सरकार के अनुमान के मुताबिक, इसमें कुल निवेश 3,56,397 करोड़ रुपये का है। 1,00,275 करोड़ रुपये की स्वीकृत केंद्रीय सहायता में से राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को पहले ही 33,455 करोड़ रुपये की राशि जारी की जा चुकी है।

मंत्रालय ने 2017 में ‘स्वच्छ सर्वेक्षण’ की भी शुरुआत की, जिसका उद्देश्य शहरों के बीच स्वच्छता की प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना है। इंदौर शहर लगातार दो वर्ष देश में पहले नंबर पर रहा। इसका तीसरा चरण 4 जनवरी से 10 मार्च तक संपन्न किाय गया जिसमें देशके 4,203 शहर शामिल किए गए। स्वच्छ सर्वेक्षण 2019 की शुरुआत 13 अगस्त 2018 को की गई, जो 4 जनवरी 2019 को परा होगा।

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