ताज़ा खबर
 

कोरोना की मार: पेयजल मिशन, मिड डे मील समेत कई योजनाओं पर रुक सकता है काम, फंडिंग के चलते अधर में भविष्य

कई राज्यों ने केंद्र सरकार से मांग की है कि उनकी ओर से रकम डाले बगैर भी आवंटित हिस्से का इस्तेमाल करने की अनुमति दी जाए। हालांकि वित्त मंत्रालय की ओर से नियमों से अलग हटकर इस तरह की मंजूरी मिल पाना मुश्किल है।

gram sadak yojanaकोरोना के चलते इन कम हो सकती है इन सरकारी योजनाओं की फंडिंग

कोरोना के संकट के चलते एक तरफ देश में अर्थव्यवस्था चरमरा गई है तो अब दूसरी तरफ सरकारी योजनाओं पर भी ब्रेक लगने की आशंका पैदा हो गई है। दरअसल केंद्र सरकार की फंडिंग वाली सेंट्रल स्पॉन्सर्ड स्कीमों के तहत 6:4 का अनुपात तय किया गया है। इसके तहत केंद्र सरकार 60 फीसदी हिस्सा देती है, जबकि राज्य सरकारें 40 फीसदी रकम अपनी ओर से खर्च करती हैं। कोरोना के संकट के चलते राज्यों की स्थिति खराब है और कई राज्यों का कहना है कि उनकी स्थिति इन योजनाओं की फंडिंग करने की नहीं है। इसके चलते प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, स्वच्छ भारत अभियान, राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल मिशन, नेशनल हेल्थ मिशन, नेशनल एजुकेशन मिशन, इंटीग्रेटेड चाइल्स डिवेलपमेंट सर्विस, मिड डे मील योजना, स्मार्ट सिटी योजना और पीएम ग्राम सड़क योजना जैसी स्कीमों का काम ठप हो सकता है।

नियम के मुताबिक सेंट्रल स्पॉन्सर्ड स्कीमों के तहत केंद्र सरकार की ओर से भेजे गए पैसों को राज्यों की ओर से तब तक इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है, जब तक वे अपना हिस्सा उसमें नहीं डालते। कई राज्यों ने केंद्र सरकार से मांग की है कि उनकी ओर से रकम डाले बगैर भी आवंटित हिस्से का इस्तेमाल करने की अनुमति दी जाए। हालांकि वित्त मंत्रालय की ओर से नियमों से अलग हटकर इस तरह की मंजूरी मिल पाना मुश्किल है।

व्यय सचिव टीवी सोमनाथन ने कहा कि राज्यों की ओर से खर्च में ढीलाई की मांग पर अब तक कोई फैसला नहीं लिया गया है। हालांकि राज्यों की ओर से यदि केंद्र सरकार की ओर से जारी फंड को खर्च नहीं किया गया तो फिर अगली किस्तों को जारी नहीं किया जाएगा। दरअसल लॉकडाउन की वजह से राज्य सरकारों का टैक्स कलेक्शन 80 फीसदी तक कम हो गया है। मई में भी यही हालात बने हुए हैं।

राज्यों ने केंद्र से मांगी 100 पर्सेंट फंडिंग: एक राज्य के अधिकारी ने कहा कि केंद्र सरकार को सेंट्रल स्पॉन्सर्ड स्कीम में अपनी ओर से ही 100 फीसदी फंडिंग करने की व्यवस्था करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकारों को अपने संसाधनों का इस्तेमाल कोरोना के संकट से निपटने के लिए करना पड़ रहा है। ऐसे में केंद्र सरकार को अब अन्य योजनाओं के लिए मदद करनी चाहिए। हालांकि पूर्वोत्तर के सभी राज्यों और तीन हिमालयी प्रदेशों के लिए यह समस्या नहीं है क्योंकि यहां केंद्र सरकार की ओर से इन स्कीमों के तहत 90 फीसदी हिस्सा खर्च किया जाता है, जबकि राज्यों की ओर से महज 10 फीसदी हिस्सा ही खर्च होता है।

क्‍लिक करें Corona Virus, COVID-19 और Lockdown से जुड़ी खबरों के लिए और जानें लॉकडाउन 4.0 की गाइडलाइंस

Hindi News के लिए हमारे साथ फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन, टेलीग्राम पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News AppOnline game में रुचि है तो यहां क्‍लिक कर सकते हैं।

Next Stories
1 येस बैंक में सालों से चल रहा था बड़ा घोटाला- पूर्व एमडी ने बताए कई राज, राणा कपूर ने आपत्तियों को खारिज कर बांटे थे लोन
2 लॉकडाउन में देश का हर चौथा आदमी बेरोजगार, गांवों में काम की है ज्‍यादा किल्लत, जानें- क्यों बढ़ता जा रहा संकट
3 पीएम किसान योजना के तहत सालाना 6,000 रुपये के अलावा मिलते हैं ये 3 फायदे, जानें- कैसे ले सकते हैं लाभ
यह पढ़ा क्या?
X