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पीएनबी घोटाला: नीरव मोदी पर ईडी ने दर्ज किया मनी लॉन्ड्रिंग का केस, लुक आउट नोटिस की मांग

मोदी पर बैंकों को 280.70 करोड़ रुपये का चूना लगाने का आरोप है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की प्राथमिकी के आधार पर यह केस दर्ज किया गया है।
फोर्ब्स इंडिया की 2016 में आई भारत के सबसे धनी लोगों की लिस्ट में नीरव मोदी का नाम भी था।

पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) में 10,000 हजार करोड़ रुपये (1.8 अरब डॉलर) के महाघोटाले के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने डायमंड कारोबारी नीरव मोदी एवं अन्य के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज कर लिया है। मोदी पर बैंकों को 280.70 करोड़ रुपये का चूना लगाने का आरोप है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की प्राथमिकी के आधार पर यह केस दर्ज किया गया है। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि इस महीने की शुरुआत में दर्ज हुई सीबीआई प्राथमिकी के आधार पर यह मामला काला धन रोधक अधिनियम (पीएमएलए) के तहत दर्ज हुआ है। ऐसा माना जा रहा है कि ईडी ने नीरव मोदी एवं अन्य के खिलाफ पीएनबी की शिकायत का भी संज्ञान लिया है। पीएनबी ने सीबीआई से लुकआउट नोटिस जारी करने की भी मांग की है।

उन्होंने कहा कि एजेंसी इस बात की जांच करेगी कि क्या बैंक की धोखाधड़ी की गई राशि की हेरा-फेरी की गयी थी और अवैध संपत्ति बनाने के लिए आरोपियों ने इस तरीके का बार-बार इस्तेमाल किया था। सीबीआई ने इस संबंध में नीरव मोदी, उनके भाई, उनकी पत्नी और कारोबारी भागीदार के खिलाफ मामला दर्ज किया है।

इसके अलावा जांच एजेंसी मोदी, उनके भाई निशाल, पत्नी एमी और मेहुल चीनूभाई चौकसी के आवास पर छापेमारी भी की है। ये सभी डायमंड्स आर यूएस, सोलर एक्सपोर्ट्स और स्टेलर डायमंड्स में भागीदार हैं। दो बैंक अधिकारियों गोकुलनाथ शेट्टी (अब सेवानिवृत्त), मनोज खारत के आवास पर भी छापेमारी की गई है। नीरव मोदी फोर्ब्स की भारतीय अमीरों की सूची में भी शामिल रहे हैं।

PNB का आरोप है कि गोकुल शेट्टी और मनोज खरट ने निर्धारित प्रक्रिया को पूरा किए बगैर ही हांगकांग स्थित इलाहाबाद बैंक और एक्सिस बैंक के लिए आठ एलओयू जारी कर दिए थे। इसका कुल मूल्य 4.42 करोड़ डॉलर (280.70 करोड़ रुपये) था। हैरत की बात है कि आरोपी अधिकारियों ने कथित तौर पर इसकी एंट्री भी नहीं की थी। विभागीय छानबीन के बाद बैंक ने सीबीआई को शिकायत देकर मामले की छानबीन करने को कहा था। आरोप है कि करोड़ों रुपये मूल्य के आठ एलओयू जारी करने के लिए न तो दस्तावेज मुहैया कराए गए थे और न ही संबंधित अधिकारियों से इसकी मंजूरी ली गई थी।

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