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पीएम नरेंद्र मोदी ने लॉन्च किया ‘पारदर्शी कराधान-ईमानदार का सम्मान’ प्लेटफॉर्म, बोले- राष्ट्रनिर्माण में ईमानदार टैक्सपेयर्स की बड़ी भूमिका

पीएम मोदी ने कहा कि देश का ईमानदार टैक्सपेयर राष्ट्रनिर्माण में बहुत बड़ी भूमिका निभाता है। जब देश के ईमानदार टैक्सपेयर का जीवन आसान बनता है, वो आगे बढ़ता है, तो देश का भी विकास होता है, देश भी आगे बढ़ता है।

pm narendra modiपीएम नरेंद्र मोदी ने लॉन्च किया पारदर्शी कराधान-ईमानदार का सम्मान प्लेटफॉर्म

पीएम नरेंद्र मोदी ने ईमानदार टैक्सपेयर्स के सम्मान के लिए ‘पारदर्शी कराधान-ईमानदार का सम्मान’ प्लेटफॉर्म को लॉन्च किया है। ‘Transparent Taxation– Honoring The Honest’ प्लेटफॉर्म की लॉन्चिंग करत हुए पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि इसके जरिए फेसलेस असेसमेंट होगा। इसके अलावा फेसलेस अपनी और टैक्सपेयर्स चार्टर भी तैयार किया जा सकेगा।

पीएम मोदी ने कहा कि फेसलेस असेसमेंट और टैक्सपेयर्स चार्टर की आज से शुरुआत हो रही है। इसके अलावा 25 सितंबर से फेसलेस अपील की सुविधा भी उपलब्ध होगी। उन्होंने कहा कि देश का ईमानदार टैक्सपेयर राष्ट्रनिर्माण में बहुत बड़ी भूमिका निभाता है। जब देश के ईमानदार टैक्सपेयर का जीवन आसान बनता है, वो आगे बढ़ता है, तो देश का भी विकास होता है, देश भी आगे बढ़ता है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि एक समय था, जब टैक्सेशन की व्यवस्था में तमाम सुधारों की बात की जाती थी। कई बार जटिलता और दबाव में फैसले लिए गए और उन्हें सुधार कहा गया। इसके चलते जरूरी लक्ष्य हासिल नहीं किए जा सकते। अब यह सोच और काम करने का तरीका दोनों ही बदल गए हैं।  उन्होंने कहा कि देश में बीते 6 सालों में टैक्स प्रशासन से जुड़े कई अहम सुधार हुए हैं। हमने जटिलताओं को कम किया है और पारदर्शिता में इजाफा किया है। इससे टैक्सपेयर्स का भरोसा व्यवस्था में बढ़ा है।

कोर्ट के बाहर ही केस सुलझाने की कोशिश: टैक्स सिस्टम में सुधारों का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि हमने व्यवस्था तो तेज, चिंतामुक्त और फेसलेस बनाने के लिए प्रयास शुरू किए हैं। पीएम मोदी ने कहा कि अब हाईकोर्ट में 1 करोड़ रुपए तक के और सुप्रीम कोर्ट में 2 करोड़ रुपए तक के केस की सीमा तय की गई है। ‘विवाद से विश्वास’ जैसी योजना से कोशिश ये है कि ज्यादातर मामले कोर्ट से बाहर ही सुलझ जाएं।

ITR फाइल करने वालों की संख्या 2.5 करोड़ बढ़ी: उन्होंने कहा कि वर्ष 2012-13 में जितने टैक्स रिटर्न्स होते थे, उसमें से 0.94 परसेंट की स्क्रूटनी होती थी। वर्ष 2018-19 में ये आंकड़ा घटकर 0.26 परसेंट पर आ गया है। यानि केस की स्क्रूटनी, करीब-करीब 4 गुना कम हुई है। स्क्रूटनी का 4 गुना कम होना, अपने आप में बता रहा है कि बदलाव कितना व्यापक है। इन सारे प्रयासों के बीच बीते 6-7 साल में इनकम टैक्स रिटर्न भरने वालों की संख्या में करीब ढाई करोड़ की वृद्धि हुई है। लेकिन ये भी सही है कि 130 करोड़ के देश में ये अभी भी बहुत कम है। इतने बड़े देश में सिर्फ डेढ़ करोड़ साथी ही इनकम टैक्स जमा करते हैं।

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