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भारत को बदलाव की चुनौतियों से निपटना है तो रत्ती-रत्ती आगे बढ़ने से काम नहीं चलेगा: नरेंद्र मोदी

प्रधानमंत्री ने कहा कि बदलाव की आवश्यकता आंतरिक वजहों से भी आवश्यक है। आज युवा पीढ़ी की आकांक्षाएं इतनी ऊंची हो गई हैं कि कोई सरकार अतीत में अटकी नहीं रह सकती है।

Author नई दिल्ली | August 26, 2016 2:38 PM
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। (पीटीआई फाइल फोटो)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के तीव्र परिवर्तन के बारे में विचार प्रकट करते हुए शुक्रवार (26 अगस्त) को कहा कि इसके लिए देश को कानूनों में बदलाव, अनावश्यक औपचारिकताओं को समाप्त करने और प्रक्रियाओं को तीव्र करने की आवश्यकता है क्यों कि ‘केवल रत्ती-रत्ती प्रगति’ से काम नहीं चलेगा। मोदी ने नीति आयोग की ओर से यहां आयोजित ‘भारत परिवर्तन’ विषय पर पहला व्याख्यान देते हुए कहा, ‘यदि भारत को परिवर्तन की चुनौतियों से निपटना है तो केवल रत्ती-रत्ती आगे बढने से काम नहीं चलेगा। आवश्यकता कायाकल्प की है। इसलिए भारत में मेरा विचार है कि यहां रत्ती-रत्ती प्रगति नहीं बल्कि तीव्र परिवर्तन हो।’

राज-काज में बदलाव के जरिए परिवर्तन लाने की जरूरत पर जोर देते हुए मोदी ने कहा कि यह काम 19वीं सदी की प्रशासनिक प्रणाली के साथ नहीं हो सकता। उन्होंने कहा, ‘राज-काज बदलाव मानसिकता में बदलाव के बिना नहीं हो सकता और मानसिकता में बदलाव तब तक नहीं होगा जब तक की विचार परिवर्तनकारी न हों।’ मोदी ने कहा, ‘हमें कानूनों में बदलाव करना है, अनावश्यक औपचारिकातओं को समाप्त करना है, प्रक्रियाओं को तेज करना है और प्रौद्योगिकी अपनानी है। हम 19वीं सदी की प्रशासनिक प्रणाली के साथ 21वीं सदी में आगे नहीं बढ़ सकते।’

श्रोताओं में मोदा का पूरा मंत्रिमंडल उपस्थित था। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह बदलाव वाह्य और आंतरिक दोनों कारणों से होना चाहिए। उन्होंने कहा कि हर देश के अपने अनुभव, संसाधन और ताकत होती है। उन्होंने कहा, ‘हो सकता है, तीस साल पहले देशों की दृष्टि केवल अपने अंदर तक ही सीमित रहती हो और वे अपने समाधान अपने अंदर से ही ढूंढते रहे हों। पर आज देश परस्पर निर्भर पर एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। आज कोई देश अपने को दूसरों से अलग रख कर विकास नहीं कर सकता। हर देश को अपने काम को वैश्विक कसौटियों पर कसना होता नहीं, किसी ने ऐसा नहीं किया तो वह पीछे छूट जाएगा।’

प्रधानमंत्री ने कहा कि बदलाव की आवश्यकता आंतरिक वजहों से भी आवश्यक है। आज युवा पीढ़ी की आकांक्षाएं इतनी ऊंची हो गई हैं कि कोई सरकार अतीत में अटकी नहीं रह सकती है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि प्रशासनिक मानसिकताओं में समान्यत: कोई बुनियादी बदलाव तभी आता है जब कि अचानक कोई झटका लगे या संकट खड़ा हो जाए। उन्होंने कहा, भारत में एक मजबूत लोकतांत्रिक राजव्यवस्था है। इसके बीच कायाकल्प करने वाले बदलाव लागने के लिए विशेष प्रयासर करने होंगे। उन्होंने कहा, ‘व्यक्तिगत तौर पर हम किताबों या लेखों से नए विचार प्राप्त कर सकते हैं। किताबें हमारे मस्तिष्क का दरवाजा खोलती हैं। पर जब तक हम सब मिल कर विचार मंथन नहीं करते, वे विचार व्यक्तियों के मस्तिष्क में ही सीमित रहते हैं।’

मोदी ने कहा कि एक ऐसा समय था जबकि माना जाता था कि विकास पूंजी और श्रम की उपलब्धता पर निर्भर करता है, पर आज यह संस्थानों और विचारों की गुणवत्ता भी उतना ही महत्वपूर्ण हो गई है। प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले साल नेशनल इंस्टिट्यूट फॉर ट्रांसफार्मिग इंडिया आयोग (नीति आयोग) नाम से एक नई संस्था खड़ी की गई। नीति की स्थापना प्रमाणों पर आधारित शोध करने वाली एक संस्था के रूप में की गयी है जो भारत के कायाकल्प के लिए राहें सुझा सके। उन्होंने कहा कि नीति का काम यह भी है कि वह देश विदेश के विशेषज्ञों के साथ सहयोग कर बाहर से प्राप्त विचारों को भी सरकार की प्रमुख नीतियों के साथ जोड़वा सके।

मोदी ने कहा कि इस संस्था को बाकी दुनिया विश्व, वाह्य विशेषज्ञों और नीतियों को लागू करने वालों आदि के साथ भारत सरकार के संपर्क सूत्र की भी भूमिका निभानी है। साथ ही इसे एक ऐसे उपकरण के रूप में काम करने है जिसके माध्यम से बाहरी विचारों को देश की नीतियों में समायोजित किया जा सके। मोदी ने कहा कि नए सुझाव सुन और समझ तो लिए जाते हैं पर उन पर काम नहीं होता क्योंकि यह काम किसी एक व्यक्ति के वश का नहीं होता। ‘यदि हम साथ बैठें तो हमारे अंदर इन विचारों क्रियान्वित करने की एक सामूहिक शक्ति होगी।’

उन्होंने कहा, ‘हमें सामूहिक तौर पर अपने अपने मस्तिष्क के द्वार खोलने, उसमें नई, वैश्विक सोच को जगह देने की जरूरत है। ऐसा करने के लिए हमें व्यक्तिगत की जगह सामूहिक रूप से नए विचार ग्रहण करने होंगे। इसके लिए हमें मिलकर प्रयास करने की जरूरत है।’ केंद्र और राज्य सरकारों की लंबी प्रशासनिक परंपरा है जिसमें ऐतिहासिक रूप से देशी और विदेशी विचार शामिल हैं।

उन्होंने कहा, ‘इस प्रशासनिक परंपरा कई तरीके से भारत के लिए अच्छे काम की रही है। सबसे बढ़ कर इसने वैभवपूर्ण विविधता वाले इस देश में लोकतंत्र, संघीय व्यवस्था, एकता और अखंडता की रक्षा की है। यह कोई छोटी उपलब्धियां नहीं हैं। फिर भी हम अब एक ऐसे दौर में रहते हैं जाहां बदलाव ही निरंतर है, और हम परिवर्तनशील हैं।’ प्रधानमंत्री ने कहा कि सत्ता संभालने के बाद से वे बैंकरों, पुलिस अधिकारियों और सरकारी सचिवों के साथ खुल कर विचार विमर्श करते रहे हैं और इससे निकले किसी भी तरह के विचार को नीतियों में शामिल किया जा रहा है।

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