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PM Kisan Samman Nidhi Scheme: सिक्किम में सिर्फ 11 किसानों के खाते में पहुंचा पैसा, 11 हजार ने कराया था रजिस्ट्रेशन

PM Kisan Samman Nidhi Yojna: सरकार की ओर से 2018-19 में 20,000 करोड़ रुपये मुहैया कराए गए थे, जबकि 2019-20 में 75,000 करोड़ रुपये का बजट दिया गया था। इसमें से अब तक लाभार्थी किसानों के खातों में 50,522 करोड़ रुपये ट्रांसफर हो चुके हैं।

Author Edited By सूर्य प्रकाश नई दिल्ली | Published on: February 17, 2020 9:54 AM
सिक्किम के सिर्फ 11 किसानों तक ही पहुंची रकम (फोटो सोर्स: इंडियनए एक्सप्रेस)

PM Kisan Samman Nidhi Yojna: पूर्वोत्तर राज्य सिक्किम में महज 11 किसानों तक ही अब तक पीएम नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी स्कीम किसान सम्मान निधि का पैसा पहुंचा है। राज्य में इस स्कीम के तहत 11,000 किसानों ने अपना रजिस्ट्रेशन कराया था, लेकिन सिर्फ 11 किसानों को ही उनमें से अब तक लाभ मिला है। खुद केंद्र सरकार ने लोकसभा में यह जानकारी दी है। सरकार के आंकड़ों के मुताबिक इस स्कीम के सबसे ज्यादा लाभार्थी उत्तर प्रदेश में हैं। यूपी में कुल 1,87,35,405 किसानों के खाते में इस स्कीम का पैसा पहुंच चुका है। अब तक योजना के तहत सूबे में 2,30,03,675 किसानों ने पंजीकरण कराया है।

केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने लोकसभा में लिखित जवाब में बताया कि अब तक 9,60,73,451 किसानों ने स्कीम के तहत सफलतापूर्व रजिस्ट्रेश कराया है। इनमें से 8 करोड़ 40 लाख से ज्यादा किसानों तक पीएम किसान सम्मान निधि का पैसा पहुंच रहा है। तोमर ने बताया कि इस स्कीम के लिए सरकार की ओर से 2018-19 में 20,000 करोड़ रुपये मुहैया कराए गए थे, जबकि 2019-20 में 75,000 करोड़ रुपये का बजट दिया गया था।

इसमें से अब तक लाभार्थी किसानों के खातों में 50,522 करोड़ रुपये ट्रांसफर हो चुके हैं। किसानों के वेरिफिकेशन की प्रक्रिया के बारे में बताते हुए कृषि मंत्री ने कहा कि मंत्रालय को संबंधित राज्यों या केंद्र शासित प्रदेशों से लाभार्थियों की लैंड होल्डिंग, बैंक संबंधित डिटेल्स, आधार कार्ड नंबर आदि की जानकारी मिली. इन जानकारियों को पीएम किसान पोर्टल के द्वारा वेरिफाई किया गया। मंत्री ने बताया कि शुरुआत में अकाउंट को मान्यता पब्लिक फाइनेंस मैनेजमेंट सिस्टम (PFMS) के जरिए दी गई।

आधार वेरिफिकेशन के बिना रकम नहीं: केंद्रीय मंत्री ने संसद को बताया कि दिसंबर 2019 से ही लाभार्थियों के डेटा के आधार वेरिफिकेशन को भी अनिवार्य कर दिया गया है। अगर संबंधित एजेंसी को प्राप्त डिटेल्स में आधार से समानता नहीं मिलती है, तो संबंधित राज्यों या केंद्र शासित प्रदेशों को उन लाभार्थियों की जानकारी में सुधार या बदलाव करना होगा। तोमर ने बताया कि इस तरह मंत्रालय इस बात को सुनिश्चित करता है कि स्कीम के तहत फायदा लाभार्थियों को राज्यों या केंद्र शासित प्रदेशों की सरकारों से प्रमाणित होने के बाद ही मिले।

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