पीएम किसान सम्मान निधि योजना: खेती न करने वाले लोग भी ले सकते हैं फायदा, जानें- क्या है नियम

इस स्कीम के तहत भले ही सरकारी नौकरी करने वाले लोगों को लाभ नहीं मिल सकता है, लेकिन चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी या मल्टी टास्क स्टाफ के तौर पर जुड़े लोग इसके तहत रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं।

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पीएम किसान सम्मान निधि योजना की शुरुआत सरकार ने देश के किसानों को सीधे नकद लाभ देने के लिए शुरू की थी ताकि वे अपनी जरूरतों को बिना किसी कर्ज के ही पूरा कर सकें। इसके तहत सरकार की ओर से 6,000 रुपये सालाना की रकम 2,000 रुपये की तीन किस्तों में हर 4 महीने पर दी जाती है। इसके दायरे में सरकारी नौकरियां करने वाले, जन प्रतिनिधि, इनकम टैक्स के दायरे में आने वाले लोग शामिल नहीं हैं। हालांकि ऐसे भी तमाम लोग हैं, जो अपनी खेती योग्य भूमि पर भले ही खेती न कर रहे हों, लेकिन उन्हें भी इस स्कीम का फायदा मिल सकता है। जानें, कैसे…

डी क्लास नौकरी वालों को मिलता है फायदा: इस स्कीम के तहत भले ही सरकारी नौकरी करने वाले लोगों को लाभ नहीं मिल सकता है, लेकिन चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी या मल्टी टास्क स्टाफ के तौर पर जुड़े लोग इसके तहत रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं। भले ही वह अपनी खेती योग्य भूमि पर कृषि कार्य में संलग्न हों या नहीं। हालांकि इसके लिए यह जरूरी है कि उन्हें अपनी खेती की जमीन का इस्तेमाल न बदला हो, जैसे मकान-दुकान बनाना या अन्य कोई व्यवसायिक गतिविधि। कृषि भूमि का लैंड यूज बदलने वाले लोगों को इस स्कीम का लाभ नहीं मिलेगा।

जमीन बंजर छोड़ने पर भी नहीं मिलेगा लाभ: यदि आवेदक किसान अपनी कृषि योग्य भूमि पर खेती नहीं करता है यानी उसे बंजर छोड़ दिया जाता है, तब भी इस स्कीम का लाभ नहीं मिलेगा। हालांकि यहां एक बात गौरतलब है कि खेती वाली भूमि चाहे गांव में हो या फिर शहरी क्षेत्र में दोनों को ही स्कीम में कवर किया जाएगा।

लाभार्थी किसान की मृत्यु पर क्या होगा: यहां एक सवाल का जवाब भी जरूरी होगा कि यदि किसी लाभार्थी किसान की मृत्यु हो जाती है तो क्या उसके परिवार वालों को लाभ मिलेगा। इसका जवाब यह है कि यदि उसकी जमीन परिवार वालों के नाम पर ट्रांसफऱ होती है तो उन्हें यह लाभ मिलेगा। यदि वह जमीन किसी और को बेच दी जाती है तो संबंधित व्यक्ति को स्कीम का लाभ मिलेगा, जिसके नाम पर वह जमीन होगी।

फरवरी 2019 में लॉन्च हुई थी स्कीम: गौरतलब है कि नरेंद्र मोदी सरकार ने फरवरी, 2019 में इस स्कीम को लॉन्च किया था। सरकार की ओर से इस तर्क के साथ स्कीम को लॉन्च किया गया था कि कर्ज की माफी करना स्थायी समाधान नहीं है। इस स्कीम से किसानों को दीर्घकाल के लिए राहत मिलेगी और वे कर्ज के कुचक्र से बच सकेंगे।

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