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पीएम किसान योजना: तमिलनाडु के सीएम बोले, किसानों को खुद रजिस्ट्रेशन करने की सुविधा देने से हुआ घोटाला

सीएम ने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से हाल ही में सेल्फ रजिस्ट्रेशन का फीचर लॉन्च किया गया था ताकि प्रक्रिया आसान हो सके, लेकिन इसका फायदा उठाते हुए धोखाधड़ी के मामले सामने आए हैं।

pm kisan samman nidhi yojanaतमिलनाडु के सीएम ने पीएम किसान स्कीम में घोटाले के लिए नए फीचर को बताया वजह

पीएम किसान सम्मान निधि स्कीम में 110 करोड़ रुपये के घोटाले को लेकर राज्य के सीएम के. पलनिसामी ने कहा है कि इसकी वजह ‘self-registration facility’ दिया जाना है। सीएम ने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से हाल ही में सेल्फ रजिस्ट्रेशन का फीचर लॉन्च किया गया था ताकि प्रक्रिया आसान हो सके, लेकिन इसका फायदा उठाते हुए धोखाधड़ी के मामले सामने आए हैं। सूबे में 5 लाख से ज्यादा संदिग्ध लाभार्थी सामने आए हैं, जो गलत जानकारियां देकर इस स्कीम के तहत लाभ ले रहे थे। पीएम किसान सम्मान निधि स्कीम के तहत किसानों को साल में 6,000 रुपये की रकम तीन किस्तों में दी जाती है।

अब इस मामले की जांच सीबीसीआईडी को सौंपी गई। अब तक 80 सरकारी अधिकारियों को इस घोटाले के सामने आने के बाद हटाया जा चुका है और 34 अधिकारी सस्पेंड हुए हैं। यही नहीं 18 लोगों को घोटाले के आरोप में अरेस्ट भी किया गया है। राज्य के कृषि सचिव गगनदीप सिंह बेदी ने कहा कि अचानक ही लाभार्थियों की संख्या में इजाफा दर्ज किया गया था, जिसके चलते जांच का फैसला लिया गया। आरोप है कि धोखेबाजों ने अधिकारियों के लॉगइन और पासवर्ड डिटेल्स हासिल कर लिए थे। इसके बाद 5 लाख लोगों की गलत एंट्री की गई और उनके नाम से पैसे ऐंठ लिए गए।

बेदी ने कहा कि इससे पहले डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर की ओर से पीएम किसान स्कीम के आवेदनों को मंजूरी दी जाती थी। इससे पहले भूमि के दस्तावेज, राशन कार्ड आदि की जांच की जाती थी। लेकिन केंद्र सरकार ने प्रक्रिया को आसान करने के लिए सेल्फ रजिस्ट्रेशन का विकल्प मुहैया करा दिया था। इसी का लाभ उठाते हुए धोखेबाजों ने घोटाले को अंजाम दिया है।

असम में मिले हैं 9 लाख अपात्र लाभार्थी: बता दें कि पूर्वोत्तर राज्य असम में भी पीएम किसान स्कीम के तहत 9 लाख अपात्र लाभार्थियों का मामला सामने आया है। खुद राज्य के कृषि मंत्री अतुल बोरा ने इस महीने की शुरुआत में विधानसभा में यह जानकारी दी थी। हेराफेरी के संदेह पर इस साल मई में ही कृषि मंत्रालय ने लाभार्थियों की पेमेंट रोक दी थी और राज्य सरकार को आदेश दिया था कि वह संभावित घोटाले की जांच करे। इसके बाद राज्य के सीएम सर्वानंद सोनोवाल ने जांच का आदेश दिया था, जिसमें यह जानकारी सामने आई थी।

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