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सावधान: चेक बाउंस हुआ तो 20 फीसदी रकम अदालत में करना होगा जमा, संसद ने बनाया कानून

बैंक खाते में पैसा नहीं होने के बावजूद चैक जारी करने वालों को अब सतर्क हो जाना चाहिए क्योंकि संसद में गुरुवार को एक ऐसा विधेयक पारित किया गया जिसके प्रावधान के तहत चैक बाउंस के आरोपी को इसकी राशि का 20 प्रतिशत अदालत में अंतरिम मुआवजे के तौर पर जमा कराना होगा।

Author नई दिल्ली | July 27, 2018 1:50 PM
प्रतीकात्मक तस्वीर

बैंक खाते में पैसा नहीं होने के बावजूद चैक जारी करने वालों को अब सतर्क हो जाना चाहिए क्योंकि संसद में गुरुवार को एक ऐसा विधेयक पारित किया गया जिसके प्रावधान के तहत चैक बाउंस के आरोपी को इसकी राशि का 20 प्रतिशत अदालत में अंतरिम मुआवजे के तौर पर जमा कराना होगा। विधेयक में चैक बाउंस मामलों के दोषियों को दो साल तक की सजा का प्रावधन है। चैक बाउंस होने की स्थिति में चेक प्राप्तकर्ता को और अधिक राहत प्रदान करने वाला ‘परक्राम्य लिखत (संशोधन) विधेयक, 2017 (नेगोशियेबिल इंस्ट्रूमेंट अमेंडमेंट बिल) को आज राज्यसभा में चर्चा के बाद ध्वनिमत से मंजूरी दी गई जबकि लोकसभा इसे पहले ही पारित कर चुकी है।

विधेयक पर चर्चा का जवाब देते हुए वित्त राज्य मंत्री शिव प्रताप शुक्ल ने कहा कि समय-समय पर संबंधित कानून में संशोधन होता रहा है और जरूरत पड़ने पर आगे भी ऐसा होगा।
उन्होंने कहा कि इस संशोधन विधेयक में प्रावधान किया गया है कि चैक बाउंस होने की स्थिति में आरोपी की तरफ से पहले ही चेक पर अंकित राशि की 20 फीसदी रकम अदालत में जमा करानी होगी। अगर निचली अदालत में फैसला आरोपी के खिलाफ आता है और वह ऊपरी अदालत में अपील करता है तो उसे फिर से कुल राशि की 20 फीसदी रकम अदालत में जमा करानी होगी।

मंत्री ने उम्मीद जताई कि इस प्रावधान की वजह से चेक बाउंस के मामलों पर अंकुश लगेगा और अदालतों पर चेक बाउंस के मुकदमों का बोझ कम होगा। शुक्ल ने सदन को बताया कि मौजूदा समय में देश भर की निचली अदालतों में चेक बाउंस के करीब 16 लाख मुकदमें चल रहे हैं जबकि 32,000 मामले उच्च अदालतों तक गये हैं। इससे पहले विधेयक पेश करते हुए मंत्री ने कहा था कि चैक प्राप्तकर्ता को राहत देने के उद्देश्य से इस विधेयक में पर्याप्त उपाय किये गये हैं। इससे चैक की विश्वसनीयता और साख बढ़ेगी।

इससे पूर्व विधेयक पर हुई चर्चा में भाग लेते हुए कांग्रेस के मधुसूदन मिस्त्री सहित कई सदस्यों ने मौजूदा विधेयक को अधिक प्रभावी बनाने के लिए इसमें सजा के प्रावधान को दो से बढ़ाकर चार साल करने तथा अंतरिम मुआवजा की राशि को 20 प्रतिशत से बढ़ाकर 30 से 40 प्रतिशत करने की मांग की ताकि चेक की वित्तीय साख को मजबूत किया जा सके और गलत मंशा से चेक जारी करने वालों पर प्रभावी अंकुश लगे।

चर्चा में भाजपा के महेश पोद्दार, अशोक वाजपेयी, सपा के संजय सेठ, अन्नाद्रमुक के ए नवनीत कृष्णन, तृणमूल कांग्रेस के मनीष गुप्ता, जद-यू के रामचंद्र प्रसाद सिंह, माकपा के के श्यामाप्रसाद, इनेलो के रामकुमार कश्यप, वाईएसआर-कांग्रेस पार्टी के विजय साई रेड्डी, कांग्रेस के केसी राममूर्ति, बसपा के वीरस सिंह, भाकपा के विनय विश्वम, आप पार्टी के सुशील कुमार गुप्ता ने भी भाग लिया।

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