अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत समेत 54 देशों पर 12.5% अतिरिक्त टैरिफ लगाने का ऐलान किया था। अमेरिका के व्यापार विभाग की जांच के बाद यह फैसला लिया गया। इस मुद्दे पर भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने फाइनेंशियल एक्सप्रेस से बातचीत करते हुए अपनी राय रखी है।
उन्होंने कहा कि भारत को फिलहाल सेक्शन 301 से घबराने की कोई जरूरत नहीं है और सरकार इससे निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है। जानकारी के लिए बता दें कि सेक्शन 301 अमेरिका के 1974 के ट्रेड एक्ट का एक महत्वपूर्ण प्रावधान है। इसके तहत अमेरिका किसी दूसरे देश की व्यापारिक नीतियों की जांच कर सकता है। यदि उसे लगता है कि कोई देश अमेरिकी हितों के खिलाफ काम कर रहा है, तो वह उस पर अतिरिक्त टैरिफ लगा सकता है।
भारत-अमेरिका ट्रेड डील
ट्रंप प्रशासन ने यह अतिरिक्त टैरिफ ऐसे समय में प्रस्तावित किया है जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौता अपने अंतिम चरण में है। पीयूष गोयल ने बताया कि अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीयर अगले दो सप्ताह में भारत आने वाले हैं। इस दौरान व्यापार समझौते को लेकर आगे की रणनीति पर चर्चा होगी।
पीयूष गोयल ने कहा, “वास्तव में यह एक व्यवस्था बनाने की कोशिश है, क्योंकि अमेरिका की अपनी कुछ राजनीतिक सीमाएं हैं। वहां की कांग्रेस उनके कुछ प्रस्तावित कदमों का समर्थन नहीं कर रही है। मुझे नहीं लगता कि सेक्शन 301 को लेकर किसी भी प्रकार की चिंता करनी चाहिए। हम इससे निपट लेंगे।”
उन्होंने यह भी दावा किया कि सेक्शन 301 की जांच एक खास देश को ध्यान में रखकर की गई है। हालांकि उन्होंने किसी देश का नाम नहीं लिया, लेकिन जानकारों का मानना है कि उनका इशारा चीन की ओर था।
पीयूष गोयल ने इस बात का भी जिक्र किया कि भारत हमेशा से निष्पक्ष और न्यायसंगत व्यापार का समर्थक रहा है। कार्यक्रम में पीयूष गोयल से चीन से होने वाले निवेश को लेकर भी सवाल पूछा गया। इस पर उन्होंने कहा कि सरकार को चीन से निवेश आने में कोई दिक्कत नहीं है, बशर्ते वह वांछित क्षेत्रों में हो और उसका मकसद भारतीय संपत्तियों पर अवसरवादी कब्जा करना न हो।
चीनी निवेश पर पीयूष गोयल
चीन के साथ बढ़ते व्यापार घाटे पर भी पीयूष गोयल ने चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इस घाटे को कम करने के लिए भारत को कई कदम उठाने होंगे। उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर जोर देना होगा, घरेलू उद्योग को मजबूत बनाना होगा और डंपिंग जैसी अनुचित व्यापारिक गतिविधियों पर रोक लगानी होगी।
फाइनेंशियल एक्सप्रेस से बातचीत के दौरान पीयूष गोयल ने ब्रिटेन के साथ हुए व्यापार समझौते का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यदि ब्रिटेन स्टील आयात पर नई पाबंदियां लागू करता है, तो भारत भी समझौते में दी गई कुछ रियायतों पर दोबारा विचार कर सकता है।
पीयूष गोयल ने भारतीय कंपनियों को भी एक संदेश दिया। उन्होंने कहा कि अब हर क्षेत्र में “कंफर्ट जोन” से बाहर निकलने की जरूरत है। चाहे बात बैंकिंग की हो, वित्तीय सेवाओं की, यूपीआई को वैश्विक स्तर पर पहुंचाने की, या फिर निर्माण, शिक्षा और संस्कृति जैसे क्षेत्रों की, भारत को हर क्षेत्र में आगे बढ़ना होगा।
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